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बड़ा सवाल: सरकार की जिद और किसानों के धरने से आखिर कैसे खुल पाएगा सिंघु और गाजीपुर बार्डर?

Tue, 07 Sep 2021 01:05 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Tue, 07 Sep 2021 01:05 PM IST
सार

भारतीय किसान यूनियन (असली) के नेता चौधरी हरपाल सिंह कहते हैं कि यह इतना बड़ा मुद्दा है, लेकिन सरकार अपनी जिद पर अड़ी है, तो किसान भी पीछे हटने वाले नहीं हैं। हरपाल सिंह कहते हैं कि हम गांव-गांव किसानों और लोगों को समझा रहे हैं। सरकार के दावे की असलियत बता रहे हैं...

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Petition filed on removal of farmers from singhu border and ghazipur border
गाजीपुर बॉर्डर - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)

विस्तार

केंद्र सरकार केंद्रीय कृषि मंत्रालय के पास गाजीपुर बार्डर, सिंघु बार्डर पर डटे किसान और उनके टेंट तंबू को लेकर कोई जवाब नहीं है। किसानों को दिल्ली में डेरा डाले नौ महीने होने जा रहे हैं। किसानों ने हरियाणा, पंजाब, हिमाचल जाने वाले चंडीगढ़ के मुख्यमार्ग (सिंघु बार्डर) पर अपने टेंट, तंबू गाड़ रखे हैं। गाजीपुर बार्डर पर एनएच-24 पर भी यही स्थिति है। इसके कारण हर रोज लाखों वाहनों को काफी घूमकर जाना पड़ता है और लोगों को परेशान होना पड़ता है। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भी इस मुद्दे का कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। ऐसे में यह एक बड़ा सवाल है कि आखिर कब तक देश के किसान दिल्ली बार्डर पर जमे रहें और इसका समाधान क्या हैं?

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कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं कि किसी ने अदालत में मामला दायर कर रखा है। क्या पता, अदालत इसे लेकर कोई दिशा-निर्देश दे। वह कहते हैं कि किसानों को भी अपनी जिद छोड़ देनी चाहिए। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के सचिवालय के पास भी इसका कोई जवाब नहीं है। राज्यमंत्री और किसानों के साथ वार्ता में शामिल एक अन्य मंत्री तीखे तेवर के साथ इस मुद्दे पर जवाब देते हैं। वह कहते हैं कि तो आप ही बताइए सरकार क्या करे? संसद का अपमान कर दे? जो कानून संसद ने पारित किया है, कुछ किसान संगठन उसे मानने को तैयार नहीं हैं। कानून को रद्द करने की जिद पकड़कर बैठे हैं। क्या ऐसा भी होता है? वह कहते हैं कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। हमारी सरकार लोकतंत्र के मूल्यों में विश्वास रखती है।
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भारतीय किसान यूनियन (असली) के नेता चौधरी हरपाल सिंह कहते हैं कि यह इतना बड़ा मुद्दा है, लेकिन सरकार अपनी जिद पर अड़ी है, तो किसान भी पीछे हटने वाले नहीं हैं। हरपाल सिंह कहते हैं कि हम गांव-गांव किसानों और लोगों को समझा रहे हैं। सरकार के दावे की असलियत बता रहे हैं। चौधरी हरपाल सिंह कहते हैं कि अब हमारी मांग और लड़ाई रुकने वाली नहीं है। चाहे हमें दस-बीस साल तक यह लड़ाई क्यों न लडऩी पड़े, हम लड़ेंगे। पंजाब के किसान ने गुरमीत सिंह कादियान कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार को किसानों की मांग को अपनी नाक का सवाल नहीं बनाना चाहिए। हमें भी इसका दु:ख होता है कि हर रोज हमारे लाखों भाई-बहनों को परेशानी होती है। लेकिन हमारे पास कोई और रास्ता नहीं है। केंद्र सरकार तो किसानों की मांग पर कान में तेल डालकर सोई हुई है।

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हमारी कौन सुनेगा?

सुमित रस्तोगी क्रॉसिंग रिपब्लिक गाजियाबाद में रहते हैं। उन्हें हर रोज दफ्तर जाने के लिए ढाई किमी का चक्कर काटना पड़ता है और आधे घंटे जाम में फंसना पड़ता है। सुमित कहते हैं कि केंद्र सरकार किसानों के मुद्दे का समाधान नहीं करना चाहती और किसान धरना स्थल खाली करने को तैयार नहीं है। अब आप ही बताइए इसमें हम क्या करें? प्रो. राम को बाड़ा हिन्दूराव अस्पताल पहुंचने के लिए हर रोज मशक्कत करनी पड़ती है और काफी लंबा रूट लेकर ड्यूटी पहुंचने की फजीहत झेलनी पड़ती है। पानीपत से राजेश कौशिक हर रोज दिल्ली आते हैं। राजेश कौशिक कहते हैं कि उन्हें कई किमी लंबी दूरी तय करके पेरीफेरल एक्सप्रेस का सहारा लेना पड़ता है। कौशिक का कहना है कि आखिर हमारी सुन ही कौन रहा है?

उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद निकल आएगा हल

सुरेन्द्र मलिक किसान नेता हैं। दार्शनिक अंदाज में कहते हैं कि हर समस्या का हल समय ही निकालता है। मलिक का कहना है कि 2022 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होना है। इसी चुनाव में भाजपा को किसानों की नाराजगी दिखाई पड़ जाएगी। इसके बाद किसानों के मुद्दे का हल भी निकल आएगा। बागपत के सूप गांव के होम्योपैथ डा. सुधीर तोमर किसानी भी करते हैं। तोमर का कहना है कि गोरखपुर से लेकर गाजियाबाद तक का किसान तंग है। आवारा पशु खेतों को चर ले जाते हैं। किसानों की पैदावार मारी जा रही है और कई क्षेत्रों में किसानों ने छुट्टा जानवरों के कारण कई पैदावार की बुआई तक बंद कर दी है। लेकिन केंद्र सरकार की आंख नहीं खुल रही है। कासगंज के संजय अग्रवाल खेती-खलिहानी के कारोबारी हैं। बीज, खाद आदि के थोक कारोबारी हैं। संजय अग्रवाल का कहना है कि वह भाजपा से जुड़े हैं। लेकिन संजय का मानना है कि किसान उनकी पार्टी से नाराज चल रहा है। अग्रवाल का कहना है कि केंद्र सरकार को किसानों से मिल बैठकर मुद्दा सुलझा लेना चाहिए।

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