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अपराधी-नेता सांठगांठ: लोकपाल की निगरानी में जांच कराने को लेकर याचिका दायर
Sun, 22 Nov 2020 08:46 PM IST
संजीव कुमार झा
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 22 Nov 2020 08:46 PM IST
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supreme court
- फोटो : पीटीआई
अपराधियों के सहारे राजनीति चमकाने वाले नेताओं पर लगाम लगाने के लिए देश के सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है। इस याचिका में इनकी आपस में सांठगांठ की लोकपाल की निगरानी में जांच कराए जाने का अनुरोध किया गया है।
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इस याचिका पर आगामी दिनों में सुनवाई होने की संभावना है। इसमें एनआईए, सीबीआई, ईडी, आईबी, एसएफआईओ, रॉ, सीबीडीटी और एनसीबी द्वारा की जाने वाले जांच की निगरानी करने का लोकपाल को निर्देश दिए जाने का आग्रह किया गया है।
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याचिकाकर्ता ने न्यायालय से सीआरपीसी के तहत वैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करने के लिए लोकपाल को सशक्त बनाने का भी आग्रह किया है। साथ ही न्यायालय से यह भी घोषित करने को कहा गया है कि लोकपाल नेताओं-नौकरशाहों-अपराधियों के खिलाफ आईपीसी और अन्य कानूनों के तहत अपराधों के लिये एकत्र सबूतों के आधार पर मुकदमा चलाने में सक्षम होगा।
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इसमें कहा गया है, अदालत ऐसे सभी मामलों में तेजी लाने के लिए विशेष न्यायालयों के गठन का निर्देश दे सकती है। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एन एन वोहरा ने राजनीति के अपराधीकरण और अपराधियों, राजनेताओं और नौकरशाहों के बीच साठगांठ की समस्या का अध्ययन करने के लिए गठित समिति की अध्यक्षता की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट अक्टूबर 1993 में सौंप दी थी।
रिपोर्ट में आपराधिक नेटवर्क पर आधिकारिक एजेंसियों की टिप्पणियों को शामिल किया गया था। याचिका में कहा गया है, ‘‘हालांकि, वोहरा समिति की रिपोर्ट के निष्कर्षों पर कोई कार्रवाई पिछले 27 वर्षों में शुरू नहीं की गई है।
याचिकाकर्ता ने उन सभी नेताओं के पद्म पुरस्कार वापस लेने का गृह सचिव को निर्देश देने का आग्रह किया है, जिनके नाम वोहरा समिति की रिपोर्ट में हैं। यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की है। याचिका में न्यायालय से यह भी आग्रह किया गया है कि एनआईए, सीबीआई, ईडी, आईबी, एसएफआईओ, रॉ, सीबीडीटी और एनसीबी जैसी जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच की निगरानी के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया जाए।