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केंद्र को नोटिस : विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए एकसमान बैंकिंग कानून की मांग को लेकर याचिका, कालेधन व बेनामी खरीद-फरोख्त पर रोक के लिए जरूरी
Tue, 05 Apr 2022 12:58 PM IST
सुरेंद्र जोशी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Tue, 05 Apr 2022 12:58 PM IST
सार
याचिका में कहा है कि रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS), नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) और इंस्टेंट मनी पेमेंट सिस्टम (IMPS) का उपयोग भारतीय बैंकों में विदेशी धन जमा करने के लिए नहीं किया जाता है।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए एक समान बैंकिंग कानून (uniform banking code) बनाने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि कालेधन व बेनामी लेनदेन के लिए एक समान कानून जरूरी है।
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याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने प्रतिवादियों से कहा कि वे याचिका में उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लें। भाजपा नेता व वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने यह याचिका दायर की है। उन्होंने याचिका में कहा है कि रीयल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS), नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर (NEFT) और इंस्टेंट मनी पेमेंट सिस्टम (IMPS) का उपयोग भारतीय बैंकों में विदेशी धन जमा करने के लिए नहीं किया जाए, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इनके जरिए न केवल देश के विदेशी मुद्रा भंडार को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि अलगाववादियों, कट्टरपंथियों, नक्सलियों, माओवादियों, आतंकियों, देशद्रोहियों, धर्मांतरण माफिया, सिमी व पीएफआई जैसे कट्टरपंथी संगठनों को भी विदेशी धन पहुंच रहा है।
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अपनी मांग के समर्थन में उपाध्याय ने याचिका में दलील दी है कि वीसा के लिए आव्रजन नियम एक समान है, भले ही विदेशी व्यक्ति बिजनेस क्लास से सफर करे या इकॉनामी क्लास से। भले वह एयर इंडिया का उपयोग करे या ब्रिटिश एयरवेज का या चाहे वह अमेरिका से आए या यूगांडा से।
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इसीलिए उपाध्याय ने कोर्ट से मांग की है कि विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए विदेशी बैंक शाखाओं सहित भारतीय बैंकों में जमा की जाने वाली राशि का विवरण समान प्रारूप में होना चाहिए, चाहे वह चालू खाते में निर्यात भुगतान हो या बचत खाते में वेतन अथवा चैरिटी के चालू खाते या सेवा में दान बतौर YouTuber के खातों में देय शुल्क। इन सब भुगतान के प्रारूप एक समान होना चाहिए। फिर चाहे पैसा पश्चिमी देशों से आ रहा हो या किसी राष्ट्रीय बैंक से अथवा भारत में स्थित किसी विदेशी बैंक से।
भाजपा नेता ने याचिका में कहा है कि फॉरेन इनवर्ड रेमिटेंस सर्टिफिकेट (FIRC) अनिवार्य रूप से जारी होना चाहिए और सभी अंतरराष्ट्रीय व भारतीय बैंकों को उसे भुगतान की लिंक एसएमएस से अवश्य भेजना चाहिए। यदि किसी खाते में विदेशी मुद्रा को रुपये में परिवर्तित कर राशि जमा की जाए तो उसकी सूचना इस तरह से देना चाहिए।
भारत में अंदरुनी रूप से आरटीजीएस, एनईएफटी और आईएमपीएस के जरिए एक खाते से दूसरे खाते में पैसा भेजने की अनुमति सिर्फ किसी व्यक्ति या कंपनी को ही दी जाना चाहिए, किसी अंतरराष्ट्रीय बैंक को इसकी इजाजत नहीं दी जाना चाहिए। इस घरेलू बैंकिंग टूल का इस्तेमाल सिर्फ घरेलू बैंक लेनदेन के लिए ही किया जाना चाहिए।