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दार्जिलिंग: मालकिन की जान बचाने के लिए तेंदुए से भिड़ गया वफादार कुत्ता

Sat, 17 Aug 2019 11:10 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दार्जिलिंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दार्जिलिंग Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 17 Aug 2019 11:10 AM IST
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pet dog saved life of its owner Aruna Lama who was attacked by leopard on August 14 in Darjeeling
अरुणा लामा-पालतू कुत्ता टाइगर - फोटो : ANI

आपने कुत्तों की वफादारी को लेकर कई किस्से पढ़े और सुने होंगे। कई बार कुत्ते जान की बाजी लगाकर अपने मालिक की जान बचाते हैं। इसका हालिया उदाहरण दार्जिलिंग में देखने को मिला। जहां टाइगर नाम का कुत्ता अपनी 58 साल की मालकिन की जान बचाने के लिए बुधवार को तेंदुए से भिड़ गया। इस कुत्ते की उम्र महज चार साल है। सोनादा की अरुणा लामा उस हादसे को कभी नहीं भूल सकती हैं जब उन्होंने अपने स्टोररुम का दरवाजा खोला और उन्हें एक आवाज सुनाई दी। अंधेरे में उन्हें लाल आंखे दिखाई दीं।

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डर के मारे अरुणा ने दरवाजा बंद करने की कोशिश की लेकिन तब तक तेंदुए ने उनपर हमला कर दिया था। अरुणा की बेटी स्मृति लामा ने कहा, 'मैं और मेरी मां नया गांव स्थित अपने घर में चाय पी रहे थे। तभी हमने रसोई घर के नीचे स्टोररूम से कुछ शोर सुना। चूंकि हमने वहां जिंदा मुर्गों को रखा हुआ था इसलिए उन्होंने वहां जाकर चेक करने का फैसला लिया। जब उन्होंने दरवाजा खोला वह कुछ सेकेंड के लिए चौंक गई और फिर चिल्लाने लगी। इसी समय किसी ने उनपर हमला किया।'
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अरुणा ने खुद को तेंदुए के चंगुल से बचाने की कोशिश की लेकिन वह छूट नहीं पाई। इसी बीच खतरे को सूंघते हुए उनका पालतू कुत्ता उन्हें बचाने के लिए बीच में आ गया। वह उसपर लगातार भौंकने लगा। डरकर तेंदुआ अंधेरे में वहां से भाग गया। घटना में कुछ मुर्गों की मौत हो गई। स्मृति ने कहा, टाइगर तेंदुए और मेरी मां के बीच आ गया। उसने बिना डरे तेंदुए पर हमला किया। तेंदुए को इससे झटका लगा वह वहां से भाग गया। तेंदुए के हमले में अरुणा के सिर और कानों में चोट लगी है। उन्हें 20 टांके लगे हैं और उनका सिलिगुड़ी के अस्पताल में इलाज चल रहा है। 
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अरुणा ने घटना को याद करते हुए कहा कि कैसे टाइगर ने उनका कर्ज उतार दिया है। उन्होंने कहा, 'हमे वो 2017 में विरोध प्रदर्शन के दौरान भूख से तड़पते हुए मिला था। उस समय 104 दिनों के बंद के कारण पहाड़ों पर भोजन की कमी थी। हम उसे घर लेकर आए और पिछले दो सालों के दौरान हमारा रिश्ता बढ़ा है। यदि वह नहीं होता तो मैं यह कहानी सुनाने के लिए जिंदा नहीं होती। हम उसे खाना खिलाकर वापस उसके मालिकों के पास भेजने की कोशिश करते थे लेकिन वह वापस आ जाता था। इसके बाद हम उसे घर ले आए और टाइगर हमारे परिवार का सदस्य बन गया।'

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