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सिंधु जल संधि विवाद: भारत ने खारिज किया मध्यस्थता अदालत का फैसला, कहा- संप्रभु फैसलों पर अधिकार नहीं

Mon, 31 Aug 2026 06:13 PM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Mon, 31 Aug 2026 06:13 PM IST
सार

विदेश मंत्रालय ने विश्व बैंक द्वारा गठित सिंधु जल संधि से जुड़ी मध्यस्थता अदालत के फैसले को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने इस अदालत को ‘अवैध तरीके से गठित’ संस्था करार देते हुए कहा कि भारत का पाकिस्तान के साथ जल संधि को स्थगित रखने का फैसला लागू रहेगा।

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India rejects Court of Arbitration ruling on Indus Waters Treaty says it has no authority sovereign decisions
अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत ने सोमवार को विश्व बैंक द्वारा गठित सिंधु जल संधि से जुड़ी मध्यस्थता अदालत के फैसले को खारिज करते हुए उसे अवैध रूप से गठित निकाय बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि इस अदालत का भारत के संप्रभु फैसलों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला लागू रहेगा। वहीं, मध्यस्थता अदालत ने कहा है कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित करने के लिए भारत द्वारा दिए गए आधार पर्याप्त नहीं हैं और संधि अभी भी पूरी तरह लागू है।

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भारत ने अदालत के गठन पर ही उठाए सवाल
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि विश्व बैंक ने संधि की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन करते हुए इस तथाकथित मध्यस्थता अदालत का गठन किया है। भारत इस तथाकथित अदालत के फैसले को उसी तरह खारिज करता है, जिस तरह उसने पहले भी इस ‘अवैध रूप से गठित’ संस्था की सभी टिप्पणियों और फैसलों को खारिज किया है। भारत ने कानून की नजर में इस अवैध रूप से गठित तथाकथित मध्यस्थता अदालत के अस्तित्व को कभी मान्यता नहीं दी है और लगातार यह रुख कायम रखा है कि इस कथित मध्यस्थता निकाय की स्थापना ही सिंधु जल संधि का गंभीर उल्लंघन है। 
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भारत ने कार्यवाही में हिस्सा लेने से किया इनकार
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, 'भारत ने इस निकाय के सामने कभी पैरवी नहीं की और इसके पहले दिए गए किसी भी फैसले या टिप्पणी को मानने से भी इनकार किया है। भारत ने इस निकाय के सामने कभी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई और इसके पहले के किसी भी फैसले पर कोई संज्ञान लेने से इनकार किया है।' विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मध्यस्थता अदालत के पास भारत के संप्रभु फैसलों पर किसी भी तरह का अधिकार क्षेत्र नहीं है। अब या भविष्य में इसके दिए गए किसी भी फैसले का भारत द्वारा शुरू की गई परियोजनाओं से जुड़े उसके कदमों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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अदालत ने संधि स्थगित करने के भारत के फैसले को नहीं माना
विदेश मंत्रालय का यह बयान उस समय आया, जब इससे कुछ घंटे पहले मध्यस्थता अदालत ने कहा था कि जिन आधारों पर भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया, वे संधि को निलंबित करने या समाप्त करने को उचित नहीं ठहराते। इसलिए सिंधु जल संधि पूरी तरह लागू है और भारत को संधि के तहत अपने दायित्वों का पालन करना चाहिए।


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पहलगाम हमले के बाद भारत ने संधि को किया था स्थगित
भारत ने पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था। इसके बाद से पाकिस्तान के नेताओं ने कई बार पानी को अपनी ‘रेड लाइन’ बताया है और भारत के इस कदम को ‘युद्ध की कार्रवाई’ करार देते हुए धमकी भी दी है।

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