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अन्नदाता पर कीटनाशक की दोहरी मार, कंपनियों ने कहा-विपरीत प्रभाव के लिए किसान खुद ही जिम्मेदार

Sat, 15 Aug 2020 07:35 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 15 Aug 2020 07:35 AM IST
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Pesticide harmfull effects on the health of farmers
Pesticide use - फोटो : पीटीआई

महाराष्ट्र के वैशम्पायन मेमोरयिल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (वीएमजीएमसी) के  डॉ. शेखर पिछले तीन साल से अपने अस्पताल में जुलाई से अक्तूबर के बीच किसानों में कीटनाशक प्वाइजनिंग के बढ़ते मामले देख रहे हैं। यह मौसम कपास की खेती का होता है। महाराष्ट्र में कपास की खेती में कीटनाशकों का अधिक प्रयोग होने से किसान और उनका परिवार ही सबसे अधिक चपेट में आ रहे हैं।

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30% कीटनाशक ही जाता है फसल या कीट परछिड़काव के दौरान महज 30% कीटनाशक ही कीट या फसल पर जाता है, 70% हवा में रह जाता है। इसकी चपेट में आकर कैंसर जैसी बीमारियों की चपेट में किसान सबसे पहले आते हैं, फिर भी कीटनाशकों के विपरीत प्रभाव के लिए सबसे पहले किसान को ही लापरवाह ठहराया जाता है।
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कीटनाशक के कुचक्र में किसान को फंसाया गया
अंतरराष्ट्रीय संस्था पेस्टीसाइड एक्शन नेटवर्क की भारतीय शाखा के कंसलटेंट एवं नीति विशेषज्ञ डॉ. नरसिंह रेड्डी कीटनाशकों के दुष्प्रभाव को समझाते हैं-हरित क्रांति के रूप में फर्टिलाइजर और जो बीज आए उनके साथ कीटनाशक भी आए। किसान को वैज्ञानिक हर दिन नहीं मिलता, दुकान से लेकर कीटनाशक डाल देता है। जानकारी भी नहीं होती कि कीटनाशक कितने खतरनाक हैं। किसान को इस कुचक्र में फंसाया गया है। उन्हें जो खेती बताई जा रही है वो पैकेज के रूप में है। हाइब्रिड बीज के लिए जरूरी है रासायनिक खादें, उसके बाद कीट आते हैं तो कीटनाशक भी जरूरी होता है। किसानी में बदलाव से ही वह उससे बाहर आ सकता है।
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कीटनाशक इस्तेमाल करने वाले क्षेत्रों में खुदकुशी ज्यादा
पंजाब में ऑर्गेनिक खेती की मुहिम जगा रहे ‘खेती विरासत मिशन’ के कार्यकारी निदेशक उपेंद्र दत्त कहते हैं, माना भारत के किसान ने जानकारी के अभाव में ज्यादा कीटनाशक डाला जिससे नुकसान हुआ। लेकिन अमेरिका या यूरोप के देशों में कीटनाशकों को क्यों बैन करना पड़ा? समझना होगा, खेती सिर्फ बाजार के लिए नहीं है, आहार के लिए भी होती है। पंजाब में जहां कीटनाशकों का प्रयोग ज्यादा होता है वहां किसानों की आत्महत्याओं की घटनाएं भी ज्यादा होती हैं। भटिंडा कैंसर सिटी बन गया है। गांवों में ज्यादातर लोगों को त्वचा रोग है।

उपभोक्ताओं से आएगी जैविक क्रांतिर
सायनों का उपयोग कम करने पर कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा कहते हैं, हरित क्रांति किसानों द्वारा लाई गई थी अब जैविक क्रांति उपभोक्ताओं से आएगी। उपभोक्ता सुरक्षित खाद्य पदार्थ की मांग करेगा। पंजाब में फाजिल्का के कटेड़ा गांव के अनिल ज्यानी जैविक खेती कर रहे हैं।


ज्यानी ने बताया, इससे पैदावार भी अच्छी होती है व केमिकल खर्च भी बचता है। वह 1925 रुपये प्रति क्विंटल की एमएसपी पर न बेच 5000 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचते हैं। कहते हैं, हरियाणा-पंजाब का किसान एमएसपी के लिए खेती करता है, शुद्ध खाने के लिए नहीं। मानसिकता बदलनी होगी।

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