Personal Data Protection Bill: RBI के डिप्टी गवर्नर ने जताई डेटा सुरक्षा के लिए कानून की जरूरत, कही यह बात
गौरतलब है कि बीते महीने केंद्र सरकार ने निजी डेटा सुरक्षा विधेयक को संसद से वापस ले लिया था। केंद्रीय सूचना एवं प्रोद्योगिकी मंत्री (आईटी मंत्री) अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि देश को अब ऑनलाइन क्षेत्र के लिए एक 'वृहद कानूनी ढांचा' चाहिए।
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केंद्र सरकार द्वारा निजी डेटा सुरक्षा विधेयक को वापस लिए जाने के एक महीने बाद आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबि शंकर ने एक बार फिर उपभोक्ताओं के डेटा और उनकी निजता को सुरक्षित रखने के लिए एक कानून की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने आर्थिक शोध संस्थान एनसीएईआर के सेमिनार में बोलते हुए कहा कि इस समय भारत बहुत तेजी से डिजिटलीकरण की तरफ बढ़ रहा है। डिजिटलीकरण की तेज रफ्तार के कारण भारत के पास बड़ी मात्रा में डेटा मौजूद है। उन्होंने बताया कि वर्तमान युग में डेटा ही मुद्रा है ऐसे में इस डेटा का मुद्रीकरण करके हम और मजबूत हो सकते हैं।
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी रबि शंकर ने कहा कि इसके लिए कड़े नियम और कानून बनाने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा कि डेटा के मुद्रीकरण के लिए उपभोक्ताओं की सहमति ली जानी चाहिए।
बीते माह सरकार ने विधेयक लिया था वापस
गौरतलब है कि बीते महीने केंद्र सरकार ने निजी डेटा सुरक्षा विधेयक को संसद से वापस ले लिया था। केंद्रीय सूचना एवं प्रोद्योगिकी मंत्री (आईटी मंत्री) अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में इसकी जानकारी देते हुए कहा था कि देश को अब ऑनलाइन क्षेत्र के लिए एक 'वृहद कानूनी ढांचा' चाहिए। इसके तहत डेटा निजता से लेकर पूरे इंटरनेट इकोसिस्टम, साइबरसिक्योरिटी, दूरसंचार नियामक और गैर निजी डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भी अलग-अलग कानून बनाने जरूरी होंगे। ताकि देश में नवाचार (इनोवेशन) को बढ़ावा दिया जा सके।
सरकार ने शुरू कर दी थी तैयारियां
गौरतलब है कि सरकार ने भारत में उपभोक्ताओं के निजी डेटा को सुरक्षित करने के मकसद से 2018 में ही इस विधेयक को लाने की तैयारी शुरू कर दी थी। इसके नियम तय कर के ड्राफ्टिंग करने तक सरकार ने चार साल का समय लिया। इतना ही नहीं कई कमेटियों ने इस विधेयक को परखा। यहां तक कि संसद की संयुक्त समिति (जेसीपी) ने भी इस विधेयक की समीक्षा की। हालांकि, गूगल, फेसबुक जैसे बड़ी टेक कंपनियों, निजता और सिविल सोसाइटी के एक्टिविस्ट्स ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया था।
टेक कंपनियों ने तो इस विधेयक का विरोध करते हुए सरकार के डेटा लोकलाइजेशन के प्रस्तावित नियम का भी विरोध किया था। दरअसल, इस नियम के तहत गूगल, फेसबुक, ट्विटर जैसी विदेशी कंपनियों को भी भारतीय उपभोक्ताओं का संवेदनशील डेटा की एक कॉपी भारत में स्टोर करनी होती। इसके अलावा भारत से अहम निजी डेटा ले जाने पर पूरी तरह रोक लगाने का भी प्रावधान था। कार्यकर्ताओं को भी इस विधेयक के एक नियम से शिकायत थी, जिससे सरकार और केंद्रीय एजेंसियों को इसके प्रावधान का पालन करने से छिपे तौर पर छूट मिल सकती थी।
आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताई थी यह वजह
बाद में केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विधेयक को वापस लेने के सरकार के फैसले की वजह भी बताई थी। उन्होंने कहा है कि निजी डेटा सुरक्षा विधेयक, 2019 पर संसद की संयुक्त समिति (जेसीपी) ने काफी विचार किया। इसमें 81 संशोधन प्रस्तावित किए गए। इसके अलावा भारत के डिजिटल इकोसिस्टम के लिए एक समग्र कानूनी ढांचा बनाने के लिए भी 12 प्रस्ताव सौंपे गए थे। ऐसी स्थिति में सरकार इस विधेयक को वापस ले रही है। हम एक वृहद कानूनी ढांचे के लायक नए विधेयक को जल्द पेश करेंगे।