फैसला: सेना में महिला अफसरों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- दो महीने में दें स्थायी कमीशन
- सुप्रीम कोर्ट ने महिला अफसरों के स्थायी कमीशन देने पर की सुनवाई
- कहा- सेना की ओर से अपनाए गए मानकों की नहीं हो सकती न्यायिक समीक्षा
- कोर्ट ने दिया निर्देश - दो महीने के भीतर महिला अफसरों को स्थायी कमीशन दें
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय सेना और नौसेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन की मांग को लेकर दायर याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि वह एक महीने के भीतर महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन देने पर विचार करे और नियत प्रक्रिया का पालन करते हुए दो महीने के भीतर इन्हें स्थायी कमीशन दें।
भारतीय सेना और नौसेना में महिला अधिकारियों के लिए स्थायी आयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेना द्वारा अपनाए गए मानकों की कोई न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती है। इस मामले को लेकर महिला अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि जब एक महिला सेना में करियर चुनती है, कई कड़ी परीक्षाओं को पार करती है। यह तब और मुश्किल हो जाता है, जब समाज महिलाओं पर चाइल्टकेयर और घरेलू काम की जिम्मेदारी डालता है।
Permanent commission for women officers in Indian Army & Navy: There can be no judicial review of standards adopted by the Army," says Supreme Court
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) March 25, 2021
कहा, महिलाओं को अधिकार दिए बिना समानता की बात झूठी
भारतीय सेना में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने संबंधी मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 2010 तक सीमा पार से फायरिंग का आंकड़ा 250 बार से अधिक नहीं है, जिन आंकड़ों को रिकॉर्ड में रखा गया है, वे बेंचमार्किंग के मामले को पूरी तरह से गलत साबित होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सामाजिक व्यवस्था पुरुषों ने पुरुषों के लिए बनाई है, समानता की बात झूठी है। आर्मी ने मेडिकल के लिए जो नियम बनाए वो महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करता है। महिलाओं को बराबर अवसर दिए बिना रास्ता नहीं निकल सकता।
क्या है मामला
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को भारतीय सेना की 17 महिला अधिकारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सेना ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बावजूद अभी तक महिला अधिकारियों को 50 फीसदी तक स्थायी आयोग (पीसी) प्रदान नहीं किया है। सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर बीते साल सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी थी। कोर्ट ने कहा था कि केंद्र सेना में कंबैट इलाकों को छोड़कर सभी इलाकों में महिलाओं को स्थायी कमान देने के लिए बाध्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था यह फैसला
बता दें कि पिछले साल 17 फरवरी को दिए अहम फैसले में शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाए। न्यायालय ने केंद्र की शारीरिक सीमाओं की दलील को खारिज करते हुए कहा था कि यह महिलाओं के खिलाफ लैंगिक भेदभाव है।न्यायालय ने केंद्र को निर्देश दिया था तीन महीनों के भीतर सभी सेवारत एसएससी महिला अधिकारियों के नाम पर स्थायी कमीशन के लिए गौर किया जाए, चाहे उन्हें सेवा में 14 साल से अधिक हो गए हो या चाहे 20 साल।
क्या है स्थायी कमीशन?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले आर्मी में 14 साल तक शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) में सेवा दे चुके पुरुषों को ही स्थायी कमीशन का विकल्प मिल रहा था, लेकिन महिलाओं को यह हक नहीं था। दूसरी ओर वायुसेना और नौसेना में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन पहले से मिल रहा है। शॉर्ट सर्विस कमीशन में महिलाएं 14 साल तक सर्विस के बाद रिटायर हो जाती हैं। अब वे स्थायी कमीशन के लिए अप्लाई कर सकेंगी। सेलेक्ट होने वाली महिला अफसर आगे भी सर्विस जारी रख सकेंगी और रैंक के हिसाब से रिटायर होंगी।
आर्मी में महिलाओं को अब बराबरी का हक मिलेगा। महिलाओं को सेना की सभी 10 स्ट्रीम- आर्मी एयर डिफेंस, सिग्नल, इंजीनियर, आर्मी एविएशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर, आर्मी सर्विस कॉर्प, इंटेलीजेंस, जज, एडवोकेट जनरल और एजुकेशनल कॉर्प में परमानेंट कमीशन मिल पाएगा।