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Rajya Sabha: 'विधेयक कानूनी तरीके से वैध', दिल्ली अध्यादेश बिल पर बोले राज्यसभा सदस्य और पूर्व CJI रंजन गोगोई
Mon, 07 Aug 2023 10:00 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 07 Aug 2023 10:00 PM IST
सार
Rajya Sabha: राज्यसभा सदस्य और पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में सेवाओं के नियंत्रण के लिए अध्यादेश की जगह लेने वाला विधेयक पूरी तरह से वैध है
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राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
राज्यसभा सदस्य और पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सोमवार को कहा कि दिल्ली में सेवाओं के नियंत्रण के लिए अध्यादेश की जगह लेने वाला विधेयक पूरी तरह से वैध है और अगर कोई सदस्य असहमत है, तो उसकी अंतरात्मा को स्वतंत्र छोड़ दिया जाना चाहिए। संसद के उच्च सदन में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023 पर चर्चा में भाग लेते हुए गोगोई ने विधेयक को सही बताया।
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न्यायमूर्ति गोगोई (सेवानिवृत्त) ने कहा कि यह विधेयक इस साल मई में केंद्र द्वारा जारी अध्यादेश से धारा 3ए को हटाता है। उन्होंने कहा, 'मेरे विचार से जब 3ए को अध्यादेश से बाहर कर दिया गया है और यह विधेयक में नहीं है तो संविधान पीठ को भेजे गए सवाल स्व-अनुत्तरित हैं। क्योंकि अगर आप सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पढ़ते हैं, तो मामले को संविधान पीठ को भेजते हैं... मेरा विचार है कि पूरा संदर्भ अध्यादेश के 3ए के प्रावधान से प्रभावित हुआ है, जो अब अस्तित्व में नहीं है।'
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उच्च सदन के मनोनीत सदस्य न्यायमूर्ति गोगोई (सेवानिवृत्त) ने कहा कि दिल्ली की विधायिका तीन विषयों पर कानून बनाती है और संसद के पास इन तीन विषयों से परे कानून बनाने की शक्ति है। उन्होंने कहा, 'और विधेयक ठीक यही करना चाहता है। इसलिए, उल्लंघन का कोई सवाल ही नहीं है।' उन्होंने कहा कि कानून बनाने की संसद की विधायी क्षमता पर कोई विवाद नहीं है।
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उन्होंने कहा, सदन में आज संसदीय लोकतंत्र सदस्यों को पार्टी के निर्देशों के अनुसार मतदान करने के लिए मजबूर करता है...यह लोगों का एक छोटा सा वर्ग है, जिनसे आप उनकी अंतरात्मा की आवाज पर अपील करते हैं। मेरे लिए विधेयक सही है। मेरी अंतरात्मा मुझसे कहती है कि कुछ करो, मैं इसे करूंगा, लेकिन अगर कोई असहमत है तो उसकी अंतरात्मा को आजाद कर देना चाहिए। गृह मंत्री अमित शाह द्वारा विधेयक को विचार और पारित करने के लिए पेश किए जाने के बाद सदन में इस पर बहस शुरू हुई। यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है।