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पेगासस स्पाइवेयर: जासूसी के लिए नहीं, सिर्फ गैरकानूनी गतिविधियों में तकनीकी इंटरसेप्शन कर सकती है सरकार

Fri, 29 Oct 2021 05:31 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली।
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Fri, 29 Oct 2021 05:31 AM IST
सार

पेगासस स्पाइवेयर के उपयोग की बात केंद्र सरकार ने आज तक न मानी है और न ही इससे इनकार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार के इस रुख को देखते हुए जांच का आदेश दिया है। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने इससे आम नागरिकों के भी प्रभावित होने की आशंका पर चिंता व्यक्त की है। वहीं, कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम का कहना है कि देश महात्मा गांधी की उस सीख से दूर हो गया है जिसमें उन्होंने शासकों से नहीं डरने की बात कही थी।

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Pegasus spyware: Not for spying, only central government can do technical interception in illegal activities
पेगासस जासूसी कांड - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

पेगासस जासूसी कांड के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच समिति बनाने के बाद भी कई प्रश्न अनुत्तरित हैं। मसलन, क्या सरकार नागरिकों की जासूसी कर सकती है? क्या इसके लिए कानून हैं? यह इंटरसेप्शन क्या है, जिसे पारंपरिक तौर पर पहले से करने की बात सरकार मान रही है? कुल मिलाकर मूल प्रश्न ये है कि क्या भारत सरकार कानून के तहत नागरिकों के व्हाट्सएप, फेसबुक, मैसेंजर, ट्विटर, टेलीग्राम एप, इंस्टाग्राम, जीमेल, सिग्नल, वाइबर आदि तमाम इंटरनेट आधारित एप पर संदेश व ऑडियो-वीडियो कॉल को देख, इंटरसेप्ट या टेप कर सकती है?

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नवम्बर 2019 में केंद्र सरकार द्वारा संसद में दिए एक जवाब के अनुसार सरकार कानूनन प्रसार माध्यमों को इंटरसेप्ट कर सकती है। आईटी कानून, 2000 की धारा 69 केंद्र या राज्य सरकार को किसी भी कंप्यूटर या मोबाइल डिवाइस में सृजित, स्टोर, प्रसारित और उस डिवाइस तक पहुंचे संदेश की निगरानी, उसे इंटरसेप्ट और डिक्रिप्ट करने का अधिकार देती है। ऐसा देश की संप्रभुता, अखंडता, सुरक्षा, अन्य देशों से दोस्ताना संबंध व जन व्यवस्था और संज्ञेय अपराधों को रोकने के लिए किया जाता है। 
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दूसरे शब्दों में कहें तो ऐसे व्यक्तियों या समूहों जिनपर गैरकानूनी या देशविरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने का संदेह हो, उनके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इंटरसेप्ट करने की अनुमति सरकार को कानूनन हासिल है। इसके लिए 10 एजेंसियां अधिकृत हैं। हालांकि सरकार अब तक यह साफ नहीं कर सकी है कि उसने पेगासस खरीदा और इसका उपयोग किया या नहीं। उसने केवल उन प्रक्रियाओं का हवाला दिया है, जिनके जरिये देश में फोन टेप किए जा सकते हैं और इंटरनेट आधारित सेवाओं पर नजर रखी जाती है।
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बिना अनुमति नहीं कर सकते इंटरसेप्शन

  • आईटी कानून के अनुसार इंटरसेप्शन के लिए एजेंसियों को तय प्रक्रिया के तहत अनुमति लेनी होती है।
  • यह अनुमति हर मामले के अनुसार अलग-अलग ली जाती है, पहले से व्यापक निगरानी की अनुमति नहीं होती।
  • केंद्रीय स्तर पर कैबिनेट सचिव और राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनी समिति यह अनुमति देती है।
  • अनुमति दो महीने के लिए होती है, जरूरत होने पर अवधि बढ़ाई जा सकती है, लेकिन छह महीने से अधिक नहीं।

जासूसी तो हरगिज नहीं कर सकती सरकार

  • कानून की यह शक्ति सिर्फ इंटरसेप्ट करने की है। अगर किसी के खिलाफ अपराध या गैरकानूनी गतिविधियों का शक हो तो पूर्व अनुमति से सरकारी जांच एजेंसियां उसके सूचना माध्यमों को इंटरसेप्ट कर सकती हैं।
  • सरकार किसी के फोन में स्पाइवेयर डलवा कर जासूसी नहीं करवा सकती। जबकि पेगासस जासूसी में लोगों के फोन व अन्य डिवाइस में स्पाइवेयर डालने के आरोप हैं।

तो किसने किए फोन हैक
अगर केंद्र सरकार यह कहे कि उसने किसी भी नागरिक के फोन में पेगासस स्पाइवेयर नहीं डाला तो यह नई चिंता की बात होगी कि फिर ऐसा किसने किया?

गैर सरकारी एजेंसी को नहीं बेच सकते पेगासस : इस्राइल
भारत में इस्राइली राजदूत नाओर गिलोन ने कहा कि पेगासस स्पाइवेयर बनाने वाली इस्राइली कंपनी एनएसओ इसे गैर-सरकारी एजेंसी को नहीं बेच सकती। नाओर ने कहा, एनएसओ एक निजी इस्राइली कंपनी है। उसे और उस जैसी सभी कंपनियों को उत्पाद निर्यात करने के लिए लाइसेंस लेना होता है। इस्राइल यह लाइसेंस केवल सरकारों को उत्पाद बेचने के लिए देता है। यह अनिवार्य है। भारत में जो हो रहा है, वह भारत का अंदरूनी मसला है।’

जांच का हिस्सा बनने से लोगों के मना करने से क्षुब्ध हूं :  चिदंबरम

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने गुरुवार को कहा कि जासूसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दिए बयान से वह व्यथित हैं। चिदंबरम ने सवाल किया, कोई भी कर्तव्यनिष्ठ नागरिक सर्वोच्च राष्ट्रीय हित के मामले में शीर्ष कोर्ट के अनुरोध को अस्वीकार कैसे कर सकता है? उन्होंने महात्मा गांधी के कथन 'भारतीयों को अपने शासकों से नहीं डरना चाहिए' को उद्धृत करते हुए कहा कि देश इस सीख से बहुत दूर हो चुका है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस मुद्दे पर जांच के लिए कुछ तकनीकी विशेषज्ञों से संपर्क किया गया था लेकिन कुछ लोगों ने विनम्रतापूर्वक इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया था। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को फैसले में कहा कि कानून के शासन द्वारा शासित लोकतांत्रिक देश में बेलगाम जासूसी की अनुमति नहीं दी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के संदेश का इंतजार : आरवी रवींद्रन
पेगासस जासूसी मामले की निगरानी की जिम्मेदारी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आरवी रवींद्रन ने कहा है कि उन्हें अब तक इसके संबंध में आदेश प्राप्त नहीं हुए हैं। इस मामले की जांच के दायरे के बारे में पूछे जाने पर जस्टिस रवींद्रन ने कहा, मुझे नहीं मालूम, क्योंकि मुझे अभी सुप्रीम कोर्ट के संदेश का इंतजार है। जब तक सर्वोच्च न्यायालय से कोई सूचना प्राप्त नहीं होगी, मुझे कैसे कुछ पता होगा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी की जांच के लिए बुधवार को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।  

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