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पायल तड़वी आत्महत्या: जांच समिति बोली- रैगिंग तो होती थी, पर जातीय टिप्प्णी के सबूत नहीं

Tue, 11 Jun 2019 11:41 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Sneha Baluni Updated Tue, 11 Jun 2019 11:41 AM IST
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Payal Tadvi: state appointed committee report confirms ragging but found no evidence of casteism
डॉक्टर पायल तडवी (फाइल फोटो) - फोटो : FaceBook

मुंबई में मेडिकल की छात्रा डॉ पायल तड़वी हत्याकांड की जांच के लिए महाराष्ट्र राज्य सरकार ने राज्य स्तरीय समिति का गठन किया था, जिसकी रिपोर्ट तैयार हो गई है। इस रिपोर्ट में यह बात तो सामने आई है कि तीनों सीनियर छात्राएं पायल की रैगिंग किया करती थी, लेकिन रिपोर्ट में जातीय टिप्पणी किए जाने के सबूत नहीं मिले हैं।

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महाराष्ट्र की अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत एडमिशन पाने वाली भील मुस्लिम समुदाय की तड़वी पर दी गई समिति की रिपोर्ट में पाया गया है कि तीन सीनियर उसकी रैगिंग किया करते थे। हालांकि जांच में जाति आधारित भेदभाव के कोई सबूत नहीं मिले हैं। मालूम हो कि तीनों आरोपी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं।  
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, समिति की 16 पन्ने की जांच रिपोर्ट चिकित्सा शिक्षा विभाग के पास है और इसे कुछ दिनों में चिकित्सा शिक्षा विभाग मंत्री गिरीश महाजन को सौंपा जाएगा। चार सदस्यों वाली समिति ने 32 लोगों के बयान दर्ज किए जिसमें डॉक्टर, हॉस्टल के साथी, तडवी के परिवारवाले और आरोपी डॉक्टर- डॉ. भक्ति मेहर, डॉ. अंकिता खंडेलवाल और डॉ. हेमा आहूजा के माता-पिता के बयान शामिल हैं। 
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'नजरअंदाजी करने वाली एचओडी भी दोषी'

रिपोर्ट में जहां तडवी पढ़ती थी, उस स्त्रीरोग और प्रसूति विभाग के प्रमुख की गलती बताई गई है। वरिष्ठ डॉक्टरों की नजरअंदाजी के कारण तड़वी ने आत्महत्या की। हालांकि विभाग प्रमुख(एचओडी) या अंतिम वर्ष की तीनों छात्राओं के खिलाफ कोई कार्रवाई करने का सुझाव नहीं दिया गया है। तड़वी की हत्या के बाद नायर अस्पताल ने एक रिपोर्ट जमा कराई है जिसमें कहा गया है कि तड़वी के साथ रैगिंग होती थी। 

26 साल की तड़वी ने 22 मई को टोपीवाला मेडिकल कॉलेज से जुड़े बीवाईएल अस्पताल के हॉस्टल के कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसकी मां ने तीनों सीनियरों खिलाफ पुलिस में उत्पीड़न और जाति आधारित भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी। समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि तीनों आरोपियों ने कई मौकों पर तड़वी की बेइज्जती की थी, लेकिन जांच में जातिवादी टिप्पणियों के ठोस सबूत नहीं मिले।


जांच पर आयोग ने उठाए सवाल

पायल, तड़वी भील मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती थी और उसे अनुसूचित जनजाति के आरक्षित कोटे से दाखिला मिला था। इसी बीच राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष नंद कुमार साईं का कहना है कि जांच में कई खामियां हैं। उन्होंने कहा, 'कॉलेज के डीन पायल के शव को कमरे से हटाने और पुलिस की अनुपस्थिति में आपातकालीन विभाग में ले जाने के लिए अधिकृत नहीं है। कमरे को तुरंत सील भी नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जांच हुई है वह प्रोटोकॉल के तहत नहीं है।'

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