सरकार पवन हंस की बिक्री को नए सिरे से करेगी नीलामी, बेचने की पिछली कोशिश हुई थी नाकाम
सरकार वित्तीय संकट से जूझ रही प्रमुख हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता कंपनी पवन हंस को बेचने के लिए नए सिरे से बोली दस्तावेज आमंत्रित कर सकती है। इसमें संभावित खरीदारों को कंपनी पर 500 करोड़ रुपये की आकस्मिक देनदारी के बदले क्षतिपूर्ति का प्रवाधान भी हो सकता है। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि ताजा प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (पीआईएम) मई के अंत तक जारी किया जाएगा। कंपनी पर यह देनदारी विवादित कर मांग से संबंधित है।
कंपनी में सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी है। शेष 49 फीसदी हिस्सेदारी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) के पास है। पवन हंस में पूरी 100 फीसदी हिस्सेदारी को बिक्री के लिए रखा गया है। एक अन्य सूत्र के मुताबिक, परामर्शदाताओं के अनुमान के तहत पूरी हिस्सेदारी बेचने से सरकार को 1,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
सरकार ने अप्रैल, 2018 में पवन हंस के 51 फीसदी हिस्से की बिक्री के लिए बोली दस्तावेज जारी किए थे, जिसकी अंतिम तारीख 18 जून थी। इसके बाद ओएनजीसी बोर्ड ने भी जुलाई में अपनी 49 फीसदी हिस्सेदारी को बेचने का फैसला लिया था। इसके बाद सरकार ने अगस्त में बोली के लिए नए दस्तावेज जारी किए।
पहले भी बेचने की हुई कोशिश
सरकार इससे पहले भी 46 हेलीकॉप्टर के बेड़े वाली कंपनी को बेचने में सफल नहीं हो पाई थी। पवन हंस की बिक्री के लिए 6 मार्च को ही बोली प्रक्रिया संपन्न हुई थी। इसमें कोई भी बोलीदाता आगे नहीं आया था। इसके बाद सरकार ने निवेशकों के साथ उनकी समस्याओं पर चर्चा की एवं बोली दस्तावेज को उनके लिए और अधिक आकर्षक बनाने का निर्णय लिया।