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आईएसआई के लिए जासूसी करने वाली पूर्व राजनयिक माधुरी पर आरोप साबित, इस तरह इस्लाम से हुआ था लगाव

Sat, 19 May 2018 11:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 19 May 2018 11:43 AM IST
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Patiala Court convicted Diplomat Madhuri Gupta of giving confidential information to ISI agent
माधुरी गुप्ता

अदालत ने गोपनीय सूचना पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई को देने व देश की सुरक्षा से समझौता करने के मामले में पूर्व राजनयिक माधुरी गुप्ता को दोषी करार दिया है। माधुरी गुप्ता पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रेस एवं सूचना सचिव थी। दिल्ली पुलिस ने उन्हें 2010 में गिरफ्तार किया था। दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सिद्धार्थ शर्मा ने माधुरी गुप्ता को जासूसी करने व गोपनीय सूचनाएं आईएसआई को देने के मामले में भारतीय गोपनीयता अधिनियम की कई धाराओं में दोषी करार दिया था। माधुरी गुप्ता की सजा पर शनिवार को सुनवाई होगी। 

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अदालत ने माधुरी गुप्ता को गोपनीयता अधिनियम की धारा तीन व पांच के तहत दोषी करार दिया है। इन धाराओं में माधुरी को तीन साल तक की सजा हो सकती है। दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने माधुरी गुप्ता को 22 अप्रैल 2010 में गिरफ्तार किया था। माधुरी पर गोपनीय जानकारी आईएसआई को देने व उसके दो अधिकारियों को मुबशर रजा राणा व जमशेद के संपर्क में रहने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद 19 जुलाई 2010 को माधुरी गुप्ता के खिलाफ गोपनीयता अधिनियम समेत कई धाराओं में चार्जशीट दाखिल की थी। अदालत ने चार्जशीट पर सुनवाई के बाद माधुरी गुप्ता के खिलाफ आपराधिक साजिश, विश्वासघात व गोपनीयता अधिनियम के तहत 12 नवंबर 2016 को आरोप तय किए थे।                     
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ये था मामला       
 
माधुरी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में बतौर महिला राजनयिक तैनात थी और उसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को खुफिया सूचनाएं मुहैया कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। विदेश मंत्रालय की माधुरी गुप्ता (53) नामक इस महिला राजनयिक को बातचीत के लिए सार्क सम्मलेन के बहाने भारत बुलाया गया। आरोप है कि उसने पाकस्तिानी खुफिया एजेंसियों को खुफिया विभाग से जुड़ी भारतीय रणनीति व विदेश के संबंधित नीतिगत मामलों से संबंधित सूचनाएं मोटी रकम लेकर मुहैया कराई। उसे पदोन्नति मिलने के बाद तीन साल पहले इस्लामाबाद स्थित उच्चायोग में तैनात किया गया था।
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माधुरी गुप्ता इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में द्वितीय सचिव स्तर के पद पर प्रेस एण्ड इंर्फोमेशन विंग में तैनात थी। उन पर आरोप था कि वह वर्ष 2007 से रॉ व नीतिगत फैसलों की जानकारी पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई को उपलब्ध करा रही थी। जानकारी मिलने पर माधुरी गुप्ता की गतिविधियों पर दिसंबर महीने से कड़ी नजर रखी जा रही थी। फोन सर्विलांस के अलावा ई-मेल व आने-जाने पर कड़ी नजर रखी जा रही थी। आईएसआई को खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने के पुख्ता सबूत मिलने के बाद माधुरी को भारत बुलाया गया। जिसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

Patiala Court convicted Diplomat Madhuri Gupta of giving confidential information to ISI agent
माधुरी गुप्ता

पहला मामला सामने आया      
इस तरह का पहला मामला सामने आया है। अब तक कोई भी राजनयिक कहीं भी अपनी ही सरकार की खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने के आरोप में कभी गिरफ्तार नहीं किया गया। 
      
इस तरह फंसी जासूसी के जाल में

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विष्णु प्रकाश के मुताबिक माधुरी गुप्ता के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्स हैं। जानकारी के मुताबिक कहा जा रहा है कि माधुरी ने पाकिस्तान को खुफिया सूचनाएं पहुंचाने का काम पहले तो जासूसी सिस्टम और सीनियर अधिकारियों से बदला लेने के चलते शुरू किया था। लेकिन बाद में वह जासूसी के इस जाल में फंस गई और उसे डरा-धमकाकर जासूसी का ये काम कराया जाने लगा।

ऐसा था प्रारंभिक जीवन

माधुरी गुप्ता जेएनयू की छात्रा रह चुकी है। वहां उसने 2000 से 2005 तक मध्यकालीन भारतीय इतिहास की पढ़ाई की और उसी दौरान वह इस्लाम से बहुत ज्यादा प्रभावित हो गईं। उसे उस धर्म से बहुत लगाव हो गया। माधुरी की मां प्रिंसिपल और पिता शिक्षक थे। इससे पहले साल 1970 में उसने डीयू के एंथ्रोलॉजी विभाग से फॉरेंसिक साईंस, क्रिमोलॉजी और क्रिमिनल लॉ की पढ़ाई की थी।    

वर्ष 1970 में वह डीयू के एंथ्रोलॉजी विभाग से फोरेंसिक साईंस, क्रमोलॉजी व क्रिमिनल लॉ की पढ़ाई कर चुकी है। माधुरी ने 2003 से 2005 तक स्टडी लीव ली और जेएनयू में इतिहास से एम. फिल कराने के लिए एंरोल कराया। मध्यकालीन भारत में एम-फिल करने के दौरान ही उसे इस्लाम से इस कदर प्यार हो गया था कि वह इस्लाम धर्म की कई बातें मानने लगी थीं। पाक स्थित भारतीय उच्चायोग में तैनात होने के बाद वह उसकी पाक खुफिया विभाग केअधिकारी 60 वर्षीय राणा से हुई थी।

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