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संसदीय समिति के सीबीएसई-एनटीए से तीखे सवाल: पूछा- आपकी पेपर लीक की परिभाषा क्या है?; जानें और क्या-क्या कहा
Sun, 07 Jun 2026 05:35 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 07 Jun 2026 05:35 PM IST
सार
नीट परीक्षा और सीबीएसई की मूल्यांकन व्यवस्था से जुड़े विवादों की समीक्षा कर रही संसदीय समिति ने दोनों संस्थाओं से लिखिति में जवाब मांगे हैं। समिति ने परीक्षा सुरक्षा, कथित अनियमितताओं, संस्थागत जवाबदेही और सुधार संबंधी उपायों पर कई प्रश्न उठाए हैं। एनटीए से परीक्षा गोपनीयता, जांच प्रक्रियाओं, कर्मचारियों की स्थिति और विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों पर अमल की जानकारी मांगी गई है। वहीं, सीबीएसई से ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रणाली के लिए निविदा शर्तों में किए गए संशोधनों, ठेका प्रक्रिया, तकनीकी मानकों और संबंधित कंपनियों की पृष्ठभूमि को लेकर जवाब तलब किया गया है।
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संसदीय समिति ने अपनाया सख्त रुख
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
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विस्तार
संसद की एक समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से यह स्पष्ट करने को कहा है कि उसकी परिभाषा में पेपर लीक किसे माना जाएगा? सूत्रों के अनुसार, इसके साथ ही यह भी सवाल पूछा गया है कि क्या 2018 से अब तक उसके द्वारा आयोजित किसी परीक्षा में पेपर लीक की घटना हुई है। समिति ने एनटीए अधिकारियों से पिछले हफ्ते हुई अपनी बैठक के बाद यह सवाल पूछे हैं।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने कहा था कि उनकी प्रणाली से कोई पेपर लीक नहीं हुआ और कुछ प्रश्न केवल एक गेस पेपर के रूप में प्रसारित हो रहे थे। कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली यह संसदीय समिति नीट पेपर लीक मामले और सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (ओएसएम) विवाद की जांच कर रही है। समिति ने एनटीए और सीबीएसई सहित कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को तलब किया था।
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सीबीएसई और एनटीए से मांगे लिखित जवाब
समिति ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और एनटीए से क्रमशः ओएसएम प्रणाली और एनईईटी परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर लिखित जवाब मांगे हैं। समिति ने एनटीए से पूछा है कि क्या उसने सीबीआई की जांच से अलग एनईईटी-यूजी 2024 पेपर में कथित अनियमितताओं की जांच कराई थी।
समिति ने पिछले तीन वर्षों में एनटीए की कर्मचारी संख्या, 2022 के बाद हुई नई भर्तियों और उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई वार्षिक रिपोर्टों का विवरण भी मांगा है। सूत्रों के अनुसार, समिति ने राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों में से प्रत्येक पर विस्तृत रिपोर्ट और एनटीए द्वारा की गई कार्रवाई का ब्यौरा भी मांगा है।
ओएसएम प्रणाली के लिए बदलावों पर भी पूछे सवाल
पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति का गठन जून 2024 में केंद्र सरकार ने किया था। इसका उद्देश्य एनटीए के माध्यम से परीक्षाओं के पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन के लिए सुझाव देना था। इसमें एनटीए की संरचना और कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने से जुड़े सुझाव शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार, सीबीएसई को आठ जून तक और एनटीए को 10 जून तक लिखित जवाब देने को कहा गया है। दोनों एजेंसियों ने अभी तक जवाब नहीं दिया है। संसदीय समिति ने सीबीएसई से यह भी पूछा है कि ओएसएम प्रणाली के लिए जारी विभिन्न अनुरोध प्रस्तावों (आरएफपी) में कथित बदलाव क्यों किए गए और क्या अनुबंध देने से पहले कोएम्पट (COEMPT) की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी।
समिति कोएम्प्ट पर को लेकर उठाए सवाल
समिति ने यह भी जानना चाहा कि क्या सीबीएसई को यह जानकारी थी कि कोएम्प्ट एडुटेक और/या उसके निदेशक पहले ग्लोबरेना टेक्लॉलिजीस से जुड़े रहे हैं, जिसकी मूल्यांकन प्रणाली पर 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परिणामों की जांच में सवाल उठे थे। इसके साथ ही यह तथ्य अनुबंध देने के निर्णय में कैसे शामिल किया गया।
समिति ने सीबीएसई से यह भी पूछा कि ओएसएम अनुबंध के तीसरे आरएफपी में खराब प्रदर्शन के रिकॉर्ड वाले बोलीदाताओं को अयोग्य ठहराने वाला प्रावधान क्यों हटाया गया। इसके अलावा, समिति ने यह जानना चाहा कि पहले ब्लैकलिस्ट किए गए बोलीदाताओं पर रोक लगाने वाला प्रावधान तीसरे आरएफपी में केवल वर्तमान में ब्लैकलिस्ट कंपनियों तक सीमित क्यों कर दिया गया और बोलीदाता के लिए न्यूनतम 50 करोड़ रुपये के टर्नओवर की शर्त क्यों रखी गई।
नियमों में बदलाव की प्रक्रिया पर खड़े हुए सवाल
समिति ने यह भी पूछा कि आरएफपी के प्रावधानों में बदलाव कर अपने डेटा सेंटर रखने वाले ठेकेदारों को प्राथमिकता देने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से मान्यता प्राप्त डेटा सेंटर का उपयोग करने वालों को प्राथमिकता क्यों दी गई। समिति ने यह भी सवाल उठाया कि रोबोटिक स्कैनर का प्रावधान क्यों हटाया गया और उसकी जगह पर्याप्त स्कैनर जैसी सामान्य शर्त क्यों रखी गई। साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं की रीढ़ काटे बिना स्कैनिंग करने की शर्त क्यों हटाई गई।
सूत्रों के अनुसार, समिति ने यह भी पूछा कि स्कैनिंग रिजॉल्यूशन की न्यूनतम आवश्यकता 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई क्यों की गई। समिति ने यह भी पूछा कि बड़े प्रोजेक्ट संभालने का अनुभव (प्रति प्रोजेक्ट कम से कम 5 लाख छात्रों से जुड़ा कार्य) रखने की शर्त हटाकर कई परियोजनाओं की कुल उत्तर पुस्तिका संख्या के आधार पर अनुभव मान्य करने का प्रावधान क्यों किया गया।
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सीबीएसई से मांगे दस्तावेज
सूत्रों ने बताया कि समिति ने पहले सीबीएसई से फरवरी 2025, मई 2025 और अगस्त 2025 में जारी ओएसएम आरएफपी से जुड़े दस्तावेज मांगे थे, लेकिन बोर्ड ने अब तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराया है। समिति ने सीबीएसई से यह भी पूछा है कि ओएसएम ड्राई रन के पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई और क्या यह रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय के साथ साझा या चर्चा की गई थी।
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सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने कहा था कि उनकी प्रणाली से कोई पेपर लीक नहीं हुआ और कुछ प्रश्न केवल एक गेस पेपर के रूप में प्रसारित हो रहे थे। कांग्रेस सदस्य दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली यह संसदीय समिति नीट पेपर लीक मामले और सीबीएसई के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (ओएसएम) विवाद की जांच कर रही है। समिति ने एनटीए और सीबीएसई सहित कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को तलब किया था।
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सीबीएसई और एनटीए से मांगे लिखित जवाब
समिति ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और एनटीए से क्रमशः ओएसएम प्रणाली और एनईईटी परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर लिखित जवाब मांगे हैं। समिति ने एनटीए से पूछा है कि क्या उसने सीबीआई की जांच से अलग एनईईटी-यूजी 2024 पेपर में कथित अनियमितताओं की जांच कराई थी।
समिति ने पिछले तीन वर्षों में एनटीए की कर्मचारी संख्या, 2022 के बाद हुई नई भर्तियों और उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई वार्षिक रिपोर्टों का विवरण भी मांगा है। सूत्रों के अनुसार, समिति ने राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों में से प्रत्येक पर विस्तृत रिपोर्ट और एनटीए द्वारा की गई कार्रवाई का ब्यौरा भी मांगा है।
ओएसएम प्रणाली के लिए बदलावों पर भी पूछे सवाल
पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति का गठन जून 2024 में केंद्र सरकार ने किया था। इसका उद्देश्य एनटीए के माध्यम से परीक्षाओं के पारदर्शी, सुचारू और निष्पक्ष संचालन के लिए सुझाव देना था। इसमें एनटीए की संरचना और कार्यप्रणाली, परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करने से जुड़े सुझाव शामिल थे।
सूत्रों के अनुसार, सीबीएसई को आठ जून तक और एनटीए को 10 जून तक लिखित जवाब देने को कहा गया है। दोनों एजेंसियों ने अभी तक जवाब नहीं दिया है। संसदीय समिति ने सीबीएसई से यह भी पूछा है कि ओएसएम प्रणाली के लिए जारी विभिन्न अनुरोध प्रस्तावों (आरएफपी) में कथित बदलाव क्यों किए गए और क्या अनुबंध देने से पहले कोएम्पट (COEMPT) की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी।
समिति कोएम्प्ट पर को लेकर उठाए सवाल
समिति ने यह भी जानना चाहा कि क्या सीबीएसई को यह जानकारी थी कि कोएम्प्ट एडुटेक और/या उसके निदेशक पहले ग्लोबरेना टेक्लॉलिजीस से जुड़े रहे हैं, जिसकी मूल्यांकन प्रणाली पर 2019 के तेलंगाना इंटरमीडिएट परिणामों की जांच में सवाल उठे थे। इसके साथ ही यह तथ्य अनुबंध देने के निर्णय में कैसे शामिल किया गया।
समिति ने सीबीएसई से यह भी पूछा कि ओएसएम अनुबंध के तीसरे आरएफपी में खराब प्रदर्शन के रिकॉर्ड वाले बोलीदाताओं को अयोग्य ठहराने वाला प्रावधान क्यों हटाया गया। इसके अलावा, समिति ने यह जानना चाहा कि पहले ब्लैकलिस्ट किए गए बोलीदाताओं पर रोक लगाने वाला प्रावधान तीसरे आरएफपी में केवल वर्तमान में ब्लैकलिस्ट कंपनियों तक सीमित क्यों कर दिया गया और बोलीदाता के लिए न्यूनतम 50 करोड़ रुपये के टर्नओवर की शर्त क्यों रखी गई।
नियमों में बदलाव की प्रक्रिया पर खड़े हुए सवाल
समिति ने यह भी पूछा कि आरएफपी के प्रावधानों में बदलाव कर अपने डेटा सेंटर रखने वाले ठेकेदारों को प्राथमिकता देने के बजाय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से मान्यता प्राप्त डेटा सेंटर का उपयोग करने वालों को प्राथमिकता क्यों दी गई। समिति ने यह भी सवाल उठाया कि रोबोटिक स्कैनर का प्रावधान क्यों हटाया गया और उसकी जगह पर्याप्त स्कैनर जैसी सामान्य शर्त क्यों रखी गई। साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं की रीढ़ काटे बिना स्कैनिंग करने की शर्त क्यों हटाई गई।
सूत्रों के अनुसार, समिति ने यह भी पूछा कि स्कैनिंग रिजॉल्यूशन की न्यूनतम आवश्यकता 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई क्यों की गई। समिति ने यह भी पूछा कि बड़े प्रोजेक्ट संभालने का अनुभव (प्रति प्रोजेक्ट कम से कम 5 लाख छात्रों से जुड़ा कार्य) रखने की शर्त हटाकर कई परियोजनाओं की कुल उत्तर पुस्तिका संख्या के आधार पर अनुभव मान्य करने का प्रावधान क्यों किया गया।
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सीबीएसई से मांगे दस्तावेज
सूत्रों ने बताया कि समिति ने पहले सीबीएसई से फरवरी 2025, मई 2025 और अगस्त 2025 में जारी ओएसएम आरएफपी से जुड़े दस्तावेज मांगे थे, लेकिन बोर्ड ने अब तक उन्हें उपलब्ध नहीं कराया है। समिति ने सीबीएसई से यह भी पूछा है कि ओएसएम ड्राई रन के पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई और क्या यह रिपोर्ट शिक्षा मंत्रालय के साथ साझा या चर्चा की गई थी।