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Plane Crash: विमान हादसों की जांच और सुरक्षा के लिए कम बजट का मुद्दा फिर उठा, संसदीय समिति भी जता चुकी चिंता
Fri, 20 Jun 2025 12:34 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 20 Jun 2025 12:34 PM IST
सार
परिवहन और संस्कृति विभाग की स्थायी संसदीय समिति ने 25 मार्च 2025 को राज्यसभा में एक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा गया था कि डीजीसीए, एएआईबी और बीसीएएस को बजट का कम आवंटन किया गया है। विमान हादसों की जांच और सुरक्षा को दिए गए बजट में भी विसंगतियां हैं।
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एअर इंडिया विमान हादसे की तस्वीर
- फोटो : PTI
विस्तार
अहमदाबाद विमान हादसे की कई स्तर पर जांच चल रही है। इस बीच एक बार फिर विमान हादसों की जांच और सुरक्षा के लिए कम बजट आवंटन किए जाने का मुद्दा एक बार फिर उठा है। संसदीय समिति भी इसे लेकर चिंता चुकी है। अहमदाबाद विमान हादसे से कुछ महीने पहले ही संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार है। लेकिन यहां विमान सुरक्षा और हादसों की जांच के लिए महज 35 करोड़ रुपये का बजट दिया गया है।
दरअसल पर्यटन, परिवहन और संस्कृति विभाग की स्थायी संसदीय समिति ने 25 मार्च 2025 को राज्यसभा में एक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा गया था कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए), विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) को सही अनुपात में बजट का आवंटन नहीं किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए डीजीसीए को 30 करोड़, एएआईबी को 20 करोड़ और बीसीएएस को महज 15 करोड़ रुपये मिले।
ये भी पढ़ें: विमान का ब्लैक बॉक्स किस जगह डिकोड होगा, यह निर्णय एएआईबी लेगा; सरकार ने किया स्पष्ट
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समिति ने कहा था कि भारत में जिस तरह से हवाई अड्डों और यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) को अधिक बजट दिए जाने की जरूरत है। बजट अनुमान 2025-26 के लिए पूंजीगत परिव्यय में प्रमुख विमानन निकायों में धन के आवंटन में स्पष्ट असंतुलन है।
रिपोर्ट में कहा गया कि डीजीसीए को आवंटित बजट की दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक जांच की जानी चाहिए। डीजीसीए को विनियामक निरीक्षण का काम सौंपा गया है। संसदीय समिति ने कहा था कि एयरलाइन कंपनियों के लिए मानकों का पालन करना जरूरी है, लेकिन बुनियादी ढांचे के तेजी से हो रहे विस्तार को देखते हुए विमान सुरक्षा क्षमताओं और दुर्घटना जांच संसाधनों में बढ़ोतरी जरूरी है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इसलिए यह आकलन करना जरूरी है कि क्या मौजूदा बजट सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और जांच क्षमताओं को बढ़ाने के लिए पर्याप्त है। जैसे-जैसे विमानन सेवाओं का विस्तार द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों तक हो रहा है, उस हिसाब से सुरक्षा ढांचे और क्षमताओं को भी आनुपातिक रूप से बढ़ाया जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें: एअर इंडिया की 15% उड़ानों में कटौती, 21 जून से 15 जुलाई तक इन अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर असर
संसदीय समिति ने डीजीसीए, बीसीएएस और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) में सीमित मानवशक्ति पर भी गंभीर चिंता जताई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार डीजीसीए में 53 फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। जबकि बीसीएएस में 35 फीसदी और एएआई में 17 फीसदी पद खाली हैं।
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दरअसल पर्यटन, परिवहन और संस्कृति विभाग की स्थायी संसदीय समिति ने 25 मार्च 2025 को राज्यसभा में एक रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा गया था कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए), विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) को सही अनुपात में बजट का आवंटन नहीं किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए डीजीसीए को 30 करोड़, एएआईबी को 20 करोड़ और बीसीएएस को महज 15 करोड़ रुपये मिले।
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समिति ने कहा था कि भारत में जिस तरह से हवाई अड्डों और यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) और नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) को अधिक बजट दिए जाने की जरूरत है। बजट अनुमान 2025-26 के लिए पूंजीगत परिव्यय में प्रमुख विमानन निकायों में धन के आवंटन में स्पष्ट असंतुलन है।
रिपोर्ट में कहा गया कि डीजीसीए को आवंटित बजट की दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक जांच की जानी चाहिए। डीजीसीए को विनियामक निरीक्षण का काम सौंपा गया है। संसदीय समिति ने कहा था कि एयरलाइन कंपनियों के लिए मानकों का पालन करना जरूरी है, लेकिन बुनियादी ढांचे के तेजी से हो रहे विस्तार को देखते हुए विमान सुरक्षा क्षमताओं और दुर्घटना जांच संसाधनों में बढ़ोतरी जरूरी है।
रिपोर्ट में कहा गया कि इसलिए यह आकलन करना जरूरी है कि क्या मौजूदा बजट सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और जांच क्षमताओं को बढ़ाने के लिए पर्याप्त है। जैसे-जैसे विमानन सेवाओं का विस्तार द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों तक हो रहा है, उस हिसाब से सुरक्षा ढांचे और क्षमताओं को भी आनुपातिक रूप से बढ़ाया जाना चाहिए।
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संसदीय समिति ने डीजीसीए, बीसीएएस और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) में सीमित मानवशक्ति पर भी गंभीर चिंता जताई। नागरिक उड्डयन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार डीजीसीए में 53 फीसदी से अधिक पद रिक्त हैं। जबकि बीसीएएस में 35 फीसदी और एएआई में 17 फीसदी पद खाली हैं।
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