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स्वास्थ्य मामलों की संसदीय समिति ने कहा- 'कोरोना संक्रमण के बीच निजी अस्पतालों ने की मनमानी वसूली'

Sun, 22 Nov 2020 04:28 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 22 Nov 2020 04:28 AM IST
सार

  • स्वास्थ्य मामलों की संसदीय समिति ने राज्यसभा के सभापति को सौंपी रिपोर्ट।
  • स्वास्थ्य पर खर्च को बताया नाकाफी, कहा- सरकारी अस्पताल में बेड की कमी। 

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Parliamentary Committee on Health Affairs said Private hospitals made self-will charges amid corona infection
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच स्वास्थ्य मामलों की संसदीय समिति ने बताया है कि महामारी के बीच निजी अस्पतालों ने इलाज के नाम पर मनमानी पैसे वसूले हैं। समिति ने कहा कि संक्रमण बढ़ने, सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त बेड न होने और इलाज का स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से निजी अस्पताल मनमानी पैसे ले रहे हैं। इलाज के लिए उचित दर तय करके मरीजों को बचाया जा सकता है।

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समिति के प्रमुख रामगोपाल यादव ने कोविड-19 और इसके प्रबंधन पर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को सौंपी रिपोर्ट में कोविड-19 के इलाज के दिशा-निर्देश जारी करवाने की मांग की है। कोरोना मामले में सरकारी कार्यप्रणाली पर संसदीय समिति की पहली रिपोर्ट में कहा गया है कि 130 करोड़ आबादी की स्वास्थ्य सुविधाओं पर खर्च बहुत कम है।
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जर्जर स्वास्थ्य सुविधाएं महामारी से निपटने में सबसे बड़ी बाधा हैं। समिति ने जन स्वास्थ्य सुविधाओं पर सरकारी खर्च बढ़ाने की सिफारिश करते हुए कहा, अगले दो वर्ष में स्वास्थ्य सुविधाओं पर जीडीपी का 2.5 प्रतिशत खर्च करने की जरूरत है। इसके साथ ही 2025 तक देश में स्वास्थ्य सुविधाओं का पर्याप्त ढांचा तैयार करने का सुझाव दिया गया है।
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स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से मनमानी
समिति ने कहा, पर्याप्त सरकारी सुविधा न होने से लोगों को भारी मुश्किल होती है और बड़ी संख्या में मरीजों की मौत होती है। कोरोना काल में यह समस्या और जटिल होती दिखी है। लोगों को निजी अस्पतालों की मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। इलाज संबंधी स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से निजी अस्पतालों पर रोक-टोक नहीं है। इससे गरीब और मध्यवर्ग को भारी मुश्किल हुई है।

  
जीडीपी का 2.5 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च हो
राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 ने 2025 तक स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकारी खर्च जीडीपी का 2.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य तय किया है। जबकि 2017 में यह जीडीपी का महज 1.7 प्रतिशत था।

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