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Sansad: सुरक्षा उपायों पर संसदीय समिति ने दीं सिफारिशें, कानूनी प्रक्रिया को तकनीक के जरिये आसान बनाने का सुझा
Fri, 24 Nov 2023 06:24 AM IST
जलज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: जलज मिश्रा
Updated Fri, 24 Nov 2023 06:24 AM IST
सार
भाजपा सांसद बृज लाल की अध्यक्षता वाली समिति का कहना है कि प्रस्तावित कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 532 के तहत समन, वारंट, जांच, पूछताछ, गवाही और सुनवाई जैसी विधिक प्रक्रियाओं को इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरणों के जरिये पूरा करने को बढ़ावा देना स्वागत योग्य बदलाव है।
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File Photo
- फोटो : Social Media
विस्तार
केंद्र सरकार की तरफ से प्रस्तावित तीन आपराधिक कानूनों को परख रही संसद की स्थायी समिति ने कानूनी प्रक्रिया को तकनीक के जरिये आधुनिक और आसान बनाने के प्रयासों की सराहना की है। साथ ही, समिति ने सरकार को तकनीक के दुरुपयोग व कानूनों के प्रवर्तन में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को लेकर चेताया है और तकनीक के उपयोग को सुरक्षित बनाने के मजबूत उपायों की सिफारिशें भी की हैं।
भाजपा सांसद बृज लाल की अध्यक्षता वाली समिति का कहना है कि प्रस्तावित कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 532 के तहत समन, वारंट, जांच, पूछताछ, गवाही और सुनवाई जैसी विधिक प्रक्रियाओं को इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरणों के जरिये पूरा करने को बढ़ावा देना स्वागत योग्य बदलाव है लेकिन, इन प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनिक संचार तभी किया जाना चाहिए, जब सुरक्षा के मजबूत उपाय सुनिश्चित कर लिए जाएं। समिति का कहना है कि जब तक इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के संग्रह और भंडारण, डाटा सुरक्षा और अनधिकृत पहुंच या उल्लंघन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए अभेद्य सुरक्षा उपाय नहीं कर लिए जाएं, तब तक इनके इस्तेमाल से बचना चाहिए।
एसएमएस से भी एफआईआर
समिति ने इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों से दी गई जानकारी के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के प्रावधान को स्वागत योग्य बताया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के मुताबिक संज्ञेय अपराध से संबंधित कोई भी जानकारी, चाहे अपराध किसी भी क्षेत्र में हुआ हो, मौखिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक संचार के जरिये दी जा सकती है, जिसके आधार पर पुलिस को एसएमएस से भी एफआईआर दर्ज करनी होगी।
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ऑडियो-विजुअल गवाही तय स्थानों पर की जाए
समिति ने साक्ष्य विधेयक की धारा 266 में प्रस्तावित ऑडियो-विजुअल और इलेक्ट्रॉनिक गवाही को सुरक्षित बनाने के लिए सिफारिश करते हुए कहा कि गवाहों को डराने-धमकाने से बचाने और फर्जी गवाही की आशंकाओं से बचने के लिए गवाही सिर्फ चुनिंदा सरकारी स्थानों पर ही रिकॉर्ड की जानी चाहिए। इसके लिए साक्ष्य विधेयक की धारा 266 में प्रावधान जोड़ा जा सकता है।
पुलिस के सामने होगी ट्रैक करने की चुनौती
समिति ने कहा है कि एफआईआर को ट्रैक करना मुश्किल होगा। खासतौर पर अगर किसी पुलिस अधिकारी को एसएमएस भेजना क्लॉज 173 के दायरे में जानकारी प्रदान करने के रूप में माना जाता है, जो पुलिस के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। समिति ने सुझाव दिया, किसी भी मौखिक या इलेक्ट्रॉनिक जानकारी को पुलिस स्टेशन लिखित रूप में दर्ज करे और जानकारी देने वाले को उस जानकारी पर हस्ताक्षर करना होगा।
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भाजपा सांसद बृज लाल की अध्यक्षता वाली समिति का कहना है कि प्रस्तावित कानून भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 532 के तहत समन, वारंट, जांच, पूछताछ, गवाही और सुनवाई जैसी विधिक प्रक्रियाओं को इलेक्ट्रॉनिक संचार उपकरणों के जरिये पूरा करने को बढ़ावा देना स्वागत योग्य बदलाव है लेकिन, इन प्रक्रियाओं में इलेक्ट्रॉनिक संचार तभी किया जाना चाहिए, जब सुरक्षा के मजबूत उपाय सुनिश्चित कर लिए जाएं। समिति का कहना है कि जब तक इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के संग्रह और भंडारण, डाटा सुरक्षा और अनधिकृत पहुंच या उल्लंघन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए अभेद्य सुरक्षा उपाय नहीं कर लिए जाएं, तब तक इनके इस्तेमाल से बचना चाहिए।
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एसएमएस से भी एफआईआर
समिति ने इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों से दी गई जानकारी के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के प्रावधान को स्वागत योग्य बताया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 173 के मुताबिक संज्ञेय अपराध से संबंधित कोई भी जानकारी, चाहे अपराध किसी भी क्षेत्र में हुआ हो, मौखिक रूप से या इलेक्ट्रॉनिक संचार के जरिये दी जा सकती है, जिसके आधार पर पुलिस को एसएमएस से भी एफआईआर दर्ज करनी होगी।
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ऑडियो-विजुअल गवाही तय स्थानों पर की जाए
समिति ने साक्ष्य विधेयक की धारा 266 में प्रस्तावित ऑडियो-विजुअल और इलेक्ट्रॉनिक गवाही को सुरक्षित बनाने के लिए सिफारिश करते हुए कहा कि गवाहों को डराने-धमकाने से बचाने और फर्जी गवाही की आशंकाओं से बचने के लिए गवाही सिर्फ चुनिंदा सरकारी स्थानों पर ही रिकॉर्ड की जानी चाहिए। इसके लिए साक्ष्य विधेयक की धारा 266 में प्रावधान जोड़ा जा सकता है।
पुलिस के सामने होगी ट्रैक करने की चुनौती
समिति ने कहा है कि एफआईआर को ट्रैक करना मुश्किल होगा। खासतौर पर अगर किसी पुलिस अधिकारी को एसएमएस भेजना क्लॉज 173 के दायरे में जानकारी प्रदान करने के रूप में माना जाता है, जो पुलिस के लिए काम करना मुश्किल हो जाएगा। समिति ने सुझाव दिया, किसी भी मौखिक या इलेक्ट्रॉनिक जानकारी को पुलिस स्टेशन लिखित रूप में दर्ज करे और जानकारी देने वाले को उस जानकारी पर हस्ताक्षर करना होगा।