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Parliament Updates: चीते भारत लाने के लिए केन्या के साथ नहीं किए समझौते, सरकार ने संसद में दी जानकारी
Thu, 08 Aug 2024 08:34 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 08 Aug 2024 08:34 PM IST
सार
Parliament Updates: केंद्र ने संसद को बताया कि चीतों को भारत लाने के लिए केन्या सरकार के साथ किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। आठ चीतों का पहला बैच सितंबर 2022 में भारत आया था और 12 चीतों का दूसरा बैच पिछले साल फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चीतों को भारत लाने के लिए केन्या के साथ किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। सरकार ने गुरुवार को संसद में यह जानकारी दी। एक सवाल के जवाब में केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा को बताया कि भारत में चीतों के आने के बाद मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में उनके 17 शावकों का जन्म हुआ है।
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उन्होंने कहा, चीतों को भारत लाने के लिए केन्या सरकार के साथ किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं। आठ चीतों का पहला बैच सितंबर 2022 में भारत आया था और 12 चीतों का दूसरा बैच पिछले साल फरवरी में दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था। सूत्रों के मुताबिक, सरकार अब उनके प्रजनन पर ध्यान देने के लिए योजना बना रही है।
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विमान एमआरओ इंडस्ट्री के सात वर्षों में 400 करोड़ डॉलर तक पहुंचने की संभावना
नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने लोकसभा में प्रश्नकाल में बताया कि देश में विमान एमआरओ (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सेवाओं की स्थापना को सुविधाजनक बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। साथ ही सात वर्षों में 200 करोड़ डॉलर से बढ़कर 400 करोड़ डॉलर हो सकता है। उन्होंने कहा कि घरेलू रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) उद्योग और विमानन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विमान के पुर्जों, घटकों, परीक्षण उपकरणों, औजारों और टूलकिट पर 5 प्रतिशत की एक समान दर से जीएसटी लागू किया है।
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उन्होंने कहा कि यदि कोई भी व्यक्ति देश में कहीं भी हवाई पट्टी या हवाई अड्डे के साथ एमआरओ उद्योग स्थापित करना चाहता है तो केंद्र सरकार सभी प्रकार की सहायता प्रदान करने के लिए तैयार है। मोदी सरकार के तहत पिछले 10 वर्षों के दौरान देश के विमानन उद्योग में बड़े पैमाने पर परिवर्तन और वृद्धि हुई है तथा घरेलू एयरलाइनों ने 1,100 से अधिक विमानों के लिए ऑर्डर दिए हैं।
विमानन कानून में विसंगतियों को दूर करेगा भारतीय वायुयान विधेयक: सरकार
नायडू ने लोकसभा में यह भी कहा कि भारतीय वायुयान विधेयक 2024 मौजूदा विमानन कानून में विसंगतियों को दूर करेगा और उद्योग को आगे बढ़ने में मदद करेगा। यह विधेयक 90 साल पुराने विमान अधिनियम को बदलने का प्रयास करता है। मंत्री ने नए कानून की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि विमान अधिनियम, 1934 वर्षों से इसके कई संशोधनों के कारण पुराना हो गया है।
'एलएएचडीसी के पास निर्णय लेने की शक्तियां'
सरकार ने संसद को बताया कि 2019 में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के गठन के बाद लद्दाख के स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों (एलएएचडीसी) के लोकतांत्रि प्रतिनिधित्व और निर्णय लेने की शक्तियों को बरकरार रखा गया है। केंद्र शासित प्रदेश को आदिवासी क्षेत्र का दर्जा देने के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि ये एलएएचडीसी अपने-अपने जिलों में विभिन्न विषयों पर कार्यकारी शक्तियों का प्रयोग करना जारी रखे हुए हैं।
'पिछले 10 वर्षों में 1700 वर्ग किमी से अधिक वन क्षेत्र कम हुआ'
सरकार ने कहा कि विकास गतिविधियों के कारण पिछले दस वर्षों में 1,700 वर्ग किलोमीटर से अधिक वन क्षेत्र का नुकसान हुआ। लेकिन क्षतिपूर्ति करने के लिए वनीकरण के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया है। राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में पर्यावरण एवं वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा यह भी कहा कि देश का समग्र वन क्षेत्र बढ़ा है और सरकार इसे और बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के पांच राज्यों अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, नगालैंड, मिजोरम और मेघालय में वन क्षेत्र कम हुआ है, वहीं आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा, कर्नाटक और झारखंड जैसे राज्यों में वन क्षेत्र बढ़ा है।
2,100 आदिवासी छात्रों को सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण दिया जाएगा
सरकार ने संसद को बताया कि 2100 आदिवासी छात्रों को सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित किया जाएगा। जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारतीय विज्ञान संस्थान, बंगलूरू के सहयोग से अगले तीन वर्षों में 1,500 जनजातीय छात्रों को इस प्रौद्योगिकी में बुनियादी प्रशिक्षण और 600 जनजातीय छात्रों को उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा।
भाजपा सांसद सीएम रमेश के एक प्रश्न के जवाब में केंद्रीय जनजातीय मामलों के राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने कहा कि उनके मंत्रालय ने जनजातीय समुदाय के छात्रों के लिए सेमीकंडक्टर निर्माण संबंधी प्रशिक्षण परियोजना भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के नैनो विज्ञान और इंजीनियरिंग केंद्र को दी है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण देने के लिए आईआईएससी सहित छह बड़े नैनो केंद्र बनाए हैं। उइके ने कहा कि आरक्षण नीतियों के अनुसार इन नैनो केंद्रों के डिग्री कार्यक्रमों में आदिवासी समुदायों का प्रतिनिधित्व है।
झील फटने के कारण बाढ़ की आशंका वाले बांधों के डिजाइन की समीक्षा होगी
सरकार ने कहा कि वह ग्लेशियल झील के फटने से बाढ़ की आशंका वाले सभी मौजूदा और निर्माणाधीन संवेदनशील बांधों के डिजाइन की समीक्षा करेगी। साथ ही सरकार सुनिश्चित करेगी कि इन बांधों में अत्यधिक बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त क्षमता हो। ग्लेशियल झील विस्फोट बाढ़ (जीएलओएफ) वह स्थिति है, जब ग्लेशियल झील वाले बांध के टूटने के कारण पैदा होती है। इसके अलावा, ग्लेशियल झीलों वाले क्षेत्रों में सभी नए बांधों के लिए जीएलओएफ अध्ययन करना अनिवार्य कर दिया गया है। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने कहा कि केंद्रीय जल आयोग के उपायों में प्रत्येक वर्ष जून से अक्तूबर तक हिमालयी क्षेत्र में 902 हिमनद झीलों और जल निकायों की निगरानी शामिल है।
राकांपा (शरद चंद्र पवार) सांसद ने की पीएम-आवास योजना की राशि बढ़ाने की मांग
लोकसभा में आवास योजना पीएम-आवास योजना के तहत वितरित राशि को मौजूदा 1.6 लाख रुपये से बढ़ाकर चार लाख रुपये करने की पुरजोर मांग की गई। शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए राकांपा (शरद चंद्र पवार) निलेश लंके ने कहा कि पीएम-आवास योजना के तहत वितरित राशि महाराष्ट्र के अहमदनगर जैसे जिले में मकान बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। लंके ने कहा, बढ़ती महंगाई और ग्रामीण क्षेत्रों में घटती आय को देखते हुए पीएम-आास योजना के तहत कुछ बदलावों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत लाभार्थी को घर बनाने के लिए 1.2 लाख रुपये, शौचालय बनाने के लिए 12 हजार रुपये और मनरेगा मजदूरी पर 26 हजार से 28 हजार रुपये मिलते हैं।