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Reservation: कांग्रेस बोली- 50 फीसदी से अधिक हो आरक्षण की सीमा, संसद को पारित करना चाहिए कानून
Sun, 30 Jun 2024 04:35 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 30 Jun 2024 04:35 PM IST
सार
Reservation: कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी पार्टी कहती रही है कि एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण से जुड़े राज्य के सभी कानूनों को नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए।
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जयराम रमेश
- फोटो : एएनआई (फाइल)
विस्तार
कांग्रेस ने रविवार को कहा कि संसद को एक कानून पारित करना चाहिए, ताकि आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से अधिक हो सके। विपक्षी पार्टी की ओर से यह बयान तब सामने आया है, जब एक दिन पहले जद (यू) ने बिहार में आरक्षण की सीमा को नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की।
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जनता दल (यूनाइटेड) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की शनिवार को बैठक हुई। जिसमें पार्टी ने उच्च न्यायालय के हालिया उस फैसले पर चिंता जताई। जिसमें बिहार सरकार के अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण की सीमा 50 फीसदी से बढ़ाकर 65 फीसदी कर दी गई। बैठक में एक राजनीतिक प्रस्ताव भी पारित किया गया। जिसमें जदयू ने भाजपा के नेतृतत्व वाली केंद्र सरकार से राज्य के कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में डालने का अनुरोध किया, ताकि उसकी न्यायिक समीक्षा की संभावना खारिज की जा सके।
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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान विपक्षी पार्टी कहती रही है कि एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण से जुड़े राज्य के सभी कानूनों को नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए।
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उन्होंने कहा, यह अच्छी बात है कि जद (यू) ने कल पटना में यही मांग उठाई है। लेकिन उसकी सहयोगी भाजपा राज्य और केंद्र दोनों जगह इस मामले पर पूरी तरह चुप है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, आरक्षण कानूनों को 50 फीसदी की सीमा से परे नौवीं अनुसूची में लाना भी कोई समाधान नहीं है, क्योंकि 2007 के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के अनुसार ऐसे कानून न्यायिक समीक्षा के अधीन हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए संविधान संशोधन कानून की जरूरत है।
उन्होंने कहा, ऐसी स्थिति में संसद के पास एकमात्र रास्ता यह है कि वह संविधान संशोधन विधेयक पारित करे, जिससे एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण 50 फीसदी से ज्यादा हो सके।