Parliament Session: भारत के 257 थानों में वाहन नहीं, 638 के पास में फोन की सुविधा नहीं, संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा
राज्यसभा की कार्यवाही 14 मार्च तक के लिए स्थगित हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट चर्चा पर जवाब देने के बाद शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही को स्थगित कर दी गई।
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संसद की एक स्थायी समिति ने गुरुवार को संसद में एक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में बताया गया कि देश में 257 थानों में वाहन नहीं हैं और 638 में टेलीफोन नहीं हैं। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली गृह मंत्रालय संबंधी स्थायी समिति ने कहा कि एक जनवरी 2020 की स्थिति के अनुसार देश में 16,833 थानों में से 257 थानों में वाहन नहीं है, 638 थानों में टेलीफोन नहीं है और 143 थानों में वायरलैस या मोबाइल फोन नहीं हैं।
समिति ने कहा कि जम्मू कश्मीर जैसे बहुत संवेदनशील सीमावर्ती केंद्रशासित प्रदेश में भी ऐसे थाने बड़ी संख्या में हैं, जिनमें टेलीफोन और वायरलैस सेट नहीं हैं। समिति ने सिफारिश की है कि गृह मंत्रालय ऐसे राज्यों को सलाह दे सकता है कि उनके थानों में पर्याप्त वाहन और संचार उपकरणों की व्यवस्था की जाए।
पूरे देश में पुलिस के 5.3 लाख पद खाली
समिति ने बताया कि राज्य पुलिस बलों में 5.30 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों के पद खाली पड़े हैं और इस तरह कुल स्वीकृत संख्या की तुलना में बल में 21 प्रतिशत की कमी है। रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य पुलिस बलों में 26,23,225 पदों की स्वीकृत संख्या की तुलना में एक जनवरी 2020 की स्थिति के अनुसार पुलिस बल में 5,31,737 पद खाली हैं और इस तरह पुलिस बल में करीब 21 प्रतिशत पद खाली हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य आनंद शर्मा की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के अनुसार खाली पड़े पदों में अधिकतर कांस्टेबल स्तर के हैं।
पुलिस बलों में महिलाओं को 33 फीसदी प्रतिनिधित्व देने की सिफारिश
समिति ने पुलिस के प्रशिक्षण, आधुनिकीकरण और सुधारों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट संसद में पेश की है। समिति ने पुलिस में महिलाओं के बेहद कम प्रतिनिधित्व पर चिंता जताई है। वर्तमान में पुलिस में महिलाओं को महज 10.30 फीसदी प्रतिनिधित्व ही हासिल है। समिति ने इसे 33 फीसदी तक करने की सिफारिश की है।
हर थाने में तीन महिला उपनिरीक्षक और 10 सिपाही
सिफारिश के अनुसार, गृहमंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सलाह दी है कि हर पुलिस थाने में कम से कम तीन महिला पुलिस उप निरीक्षक और 10 सिपाहियों की नियुक्ति की जानी चाहिए। ताकि थाने में महिला सहायता प्रकोष्ठ 24 घंटे काम कर सके। सिफारिश में कहा गया है कि पुलिस शोध और विकास ब्यूरो (बीपीआरडी) को महिला सहायता प्रकोष्ठ के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए।
कृषि कानूनों को फिर से लाने की कोई योजना नहीं
सरकार ने राज्यसभा में कहा कि किसानों के आंदोलन के केंद्र में रहे और बाद में वापस ले लिये गए तीन कृषि कानूनों को फिर से लाने की उसकी कोई योजना नहीं है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने उच्च सदन में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा कि वापस लिए गए तीन कृषि कानूनों को भविष्य में फिर से लाने की सरकार की कोई योजना नहीं है।
सत्र का पहला चरण भी समाप्त
- राज्यसभा की कार्यवाही 14 मार्च तक के लिए स्थगित हो गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट चर्चा पर जवाब देने के बाद शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही को स्थगित कर दी गई। इसके साथ ही बजट सत्र का पहला चरण भी समाप्त हो गया है। सत्र का दूसरा चरण 14 मार्च से आठ अप्रैल तक चलेगा।
- लोकसभा की कार्यवाही भी शुक्रवार को 14 मार्च शाम चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई और इस तरह निचले सदन में बजट सत्र का पहला चरण सम्पन्न हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन में सुचारू कामकाज के लिए सदस्यों का आभार व्यक्त किया और बताया कि इस दौरान कार्य उत्पादकता 121 प्रतिशत रही।
योगी की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक का लोकसभा से वाकआउट
इस बीच कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, नेशनल कॉन्फ्रेंस, द्रमुक और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की एक टिप्पणी का विरोध करते हुए शुक्रवार को लोकसभा से वाकआउट किया। दरअसल, योगी आदित्यनाथ ने एक वीडियो संदेश में उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को आगाह करते हुए दावा किया है कि अगर इस बार मतदाता चूक गए तो उत्तर प्रदेश को कश्मीर, बंगाल और केरल बनते देर नहीं लगेगी। लोकसभा की कार्यवाही आरंभ होने के साथ ही कई विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर खड़े हो गए। कुछ सदस्य नारेबाजी करते हुए आसन के निकट पहुंच गए।
अफगानिस्तान के हालात पड़ोसी देशों के लिए ‘स्वाभाविक चिंता’ का विषय : मुरलीधरन
विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि अफगानिस्तान के हालात भारत जैसे पड़ोसी देशों के लिए स्वाभाविक चिंता का विषय है और मध्य एशियाई देश भी ऐसी ही चिंता और उद्देश्य प्रकट करते हैं। भारत ने जनवरी में पहले भारत-मध्य एशिया सम्मेलन की मेजबानी की थी। इसमें कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और किर्गिस्तान ने वर्चुअल माध्यम से शिरकत की थी।
तृणमूल कांग्रेस सांसद सौगत रॉय के सवाल पर मुरलीधरन ने कहा कि सम्मेलन में अफगानिस्तान के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। भारत और पांच मध्य एशियाई देशों ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर संयुक्त कार्यबल के गठन का फैसला लिया। सम्मेलन के बाद जारी दिल्ली घोषणा में अफगानिस्तान के लोगों की मानवीय सहायता, आतंकवाद व ड्रग तस्करी से निपटने, महिलाओं, बच्चों व अल्पसंख्यकों के अधिकारियों के संरक्षण की बात कही गई थी। साथ ही भारत और मध्य एशियाई देशों के नेताओं ने हर दो साल पर सम्मेलन करने का भी निर्णय लिया। अगला सम्मेलन 2024 में होने की उम्मीद है।
रक्षा मंत्री की जगह कानून मंत्री ने दिया जवाब, विपक्ष ने किया हंगामा
लोकसभा में शुक्त्रस्वार को प्रश्नकाल के दौरान मंत्रियों की अनुपस्थिति पर विपक्ष ने हंगामा किया। विवाद उस समय शुरू हुआ जब रक्षा मंत्रालय से संबंधित पूरक प्रश्न का जवाब कानून मंत्री किरेन रिजिजू देने लगे। उस दौरान सदन में न तो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद थे और न ही रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट। विपक्ष ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के कारण मंत्री सदन का अपमान कर रहे हैं।
थरूर ने केंद्र से पत्रकार की जल्द रिहाई की मांग की
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पिछले दिनों कश्मीर से गिरफ्तार किए गए पत्रकार फहद शाह और सज्जाद गुल तथा 2020 से उत्तर प्रदेश में यूएपीए कानून के तहत हिरासत में बंद केरल के पत्रकार सिद्दीक कप्पन की तत्काल रिहाई की मांग केंद्र सरकार से की। थरूर ने लोकसभा में शून्यकाल में कहा कि पत्रकार फहद शाह को राजद्रोह के आरोप में और सज्जाद गुल को जन सुरक्षा कानून के तहत पिछले दिनों जम्मू कश्मीर में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि इसी तरह उत्तर प्रदेश में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए गए पत्रकार सिद्दीक कप्पन को लंबे समय से रिहा नहीं किया गया है।
रक्षा राज्य मंत्री ने वरुण के सवाल का दिया जवाब
- रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि 1 जनवरी 2021 से 31 जनवरी 2022 तक सेना को रक्षा संबंधी विषयों पर फिल्म/डॉक्यूमेंट्री/सीरीज के निर्माण के लिए एनओसी प्राप्त करने के लिए 18 प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनमें से 16 को मंजूरी दी गई और एक को खारिज किया गया। फिलहाल एक आवेदन लंबित भी है।
- उन्होंने बताया कि एक सेवानिवृत्त सेना अधिकारी के जीवन पर आधारित फिल्म के लिए एनओसी देने से इनकार करने का कारण कश्मीर के एक स्थानीय लड़के और सेना की एक सैनिक के बीच एक रोमांटिक रिश्ते का फिल्मांकन है, जो भारतीय सेना को खराब रोशनी में रखता है और सुरक्षा मुद्दों को उठाता है।