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संसद सत्र: कोरोना पर 12 घंटे का वक्त, नगालैंड जैसा मुद्दा, फिर भी सरकार को पुरजोर तरीके से नहीं घेर पाया विपक्ष

Tue, 07 Dec 2021 09:02 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 07 Dec 2021 09:02 PM IST
सार

29 नवंबर से शुरू हुआ संसद का शीतकालीन सत्र 23 दिसंबर को खत्म होगा। मंगलवार तक सत्र के नौ दिन पूरे हो चुके हैं। इस बीच, कई मौके ऐसे आए जब विपक्ष सरकार को मजबूती से घेर सकता था।  

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Parliament session: 12 hours time to debate on Corona, issue like Nagaland, yet the opposition could not surround the government strongly
सदन में आम जनता के मुद्दों पर अब तक विपक्ष का रवैया कुछ खास देखने को नहीं मिला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

संसद का शीतकालीन सत्र भी हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। आम जनता के मुद्दों पर अब तक विपक्ष का रवैया कुछ खास देखने को नहीं मिला। इसके दो बड़े उदाहरण हैं। पहला- कोरोना और दूसरा- नगालैंड में सेना की गोली से मारे गए ग्रामीणों का। इन दोनों ही मुद्दों पर सरकार को घेरने के लिए विपक्ष के पास काफी मौका था, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। कम से कम आंकड़े और तथ्य तो यही बयां कर रहे हैं।  
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कोरोना पर संसद में क्या हुआ?
कोरोना महामारी पर तीन दिसंबर को लोकसभा में चर्चा हुई। इसके लिए 12 घंटे का समय तय किया गया था। ये सदन में होने वाली सबसे लंबी चर्चाओं में से एक था। सरकार ने विपक्ष को मुद्दे उठाने के लिए पर्याप्त मौका भी दिया। नतीजा ये रहा कि कोरोना महामारी जैसे गंभीर विषय पर केवल 96 सांसदों ने अपनी बात रखी। हालांकि, इनमें भी विपक्ष के सवाल कमजोर रहे तो सत्ता पक्ष के सांसद केवल सरकार का गुणगान ही करते नजर आए।
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किस सांसद ने क्या कहा?

Parliament session: 12 hours time to debate on Corona, issue like Nagaland, yet the opposition could not surround the government strongly
लोकसभा में बोलते हुए कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी। - फोटो : अमर उजाला
1. अधीर रंजन चौधरी : कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, 'कोरोना के डेल्टा वैरिएंट का आरओ वैल्यू 1.64 था। अब वैज्ञानिकों ने ओमिक्रॉन के लिए चेतावनी दी है कि इसमें ज्यादा सावधानी बरतनी है। इसके फैलने की रफ्तार 2.0 से भी अधिक है। अब तक कोरोना के मिले किसी भी वैरिएंट से ज्यादा। वैश्विक पैमाने पर अगर देखें तो शोध के क्षेत्र में हमारा निवेश काफी कम है। किसी ने हाल ही में कहा है कि भारतीय अच्छे ट्रेडर्स हो सकते हैं लेकिन इंवेटर्स नहीं। सरकार ने हेल्थ रिसर्च और वैक्सीन उत्पादन पर काफी कम खर्च किया। इसका नतीजा सबके सामने है।

2. महुआ मोइत्रा : तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा ने कहा, ' ये समय वास्तव में एक परिवर्तन का है। महामारी की शुरुआत हमारे यहां एक उत्सव के रूप में हुई। जब सरकार को टीकों का ऑर्डर देना था तब प्रधानमंत्री ने हम सभी को बाहर इकट्ठा होकर थाली, ताली बजाने और मोमबत्ती जलाने के लिए प्रोत्साहित किया।'

3. प्रो. सौगत रॉय : तृणमूल कांग्रेस के सांसद प्रो. रॉय ने 1962 भारत-चीन युद्ध से अपनी बात शुरू की। कहा कि हम तब भी युद्ध के मैदान में बिना तैयारी के चलते गए थे और आज भी वही स्थिति है।

4. कल्याण बनर्जी : तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने वैक्सीनेशन के आंकड़ों पर सवाल उठाया। कहा कि यहां बैठे कुछ लोग कहते हैं कि देश में 110 करोड़ वैक्सीनेशन हो गया, कुछ कहते हैं कि 115 करोड़ वैक्सीनेशन हो गया है और मेरा मोबाइल कॉलर ट्यून कहता है कि 100 करोड़ से ज्यादा वैक्सीनेशन हो चुका है। हमारे देश में 135 करोड़ की आबादी है। इसमें 95 करोड़ ही ऐसे हैं जिनकी उम्र 18 साल से अधिक है। ऐसे में यह कैसे संभव है कि 100 करोड़ से ज्यादा लोगों को टीका लग गया हो?

(नोट : 100 करोड़ से ज्यादा लोगों को नहीं, बल्कि 100 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगाई जा चुकी है। हर एक इंसान को वैक्सीन की दो डोज लगनी है। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में 50% लोगों को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है।)

5. डॉ. डीएनवी सेंथिलकुमार एस : डीएमके के सांसद डॉ. डीएनवी ने कोरोना महामारी में चर्चा के दौरान प्रवासी मजदूरों का मुद्दा उठाया। कहा, भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के बाद ये पहली बार है जब इतनी बड़ी संख्या में मजदूरों का पलायन हुआ हो। सरकार ने सबको सड़कों पर अकेला छोड़ दिया। कई दर्दनाक कहानी सामने आ चुकी है।

6. विनायक राउत : शिवसेना के सांसद विनायक राउत ने निजीकरण का मुद्दा उठाया। कहा कि कोरोना का निगेटिव असर रेलवे, एलआई और 26 सरकारी कंपनियों पर भी हो चुका है। सरकार ने इन सभी का निजीकरण कर दिया। अगर देश को बचाना है तो वापस इन कंपनियों को सरकारी करना होगा।

7. एएम आरिफ : सीपीआई (एम) के सांसद एएम आरिफ ने कहा, 'सरकार ने प्रधानमंत्री की फोटो के साथ लोगों को वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट दिया है। हकीकत में इस सर्टिफिकेट पर सुप्रीम कोर्ट की फोटो होनी चाहिए। बिना कोर्ट ये संभव नहीं हो पाता। सरकार ने तो आम लोगों को लूटने के लिए फार्मा कंपनियों को खुली छूट दे रखी थी।'

भाजपा के सांसदों ने क्या कहा?

Parliament session: 12 hours time to debate on Corona, issue like Nagaland, yet the opposition could not surround the government strongly
तेजस्वी सूर्या - फोटो : अमर उजाला
1. तेजस्वी सूर्या : भाजपा के सांसद तेजस्वी सूर्या ने आंकड़ों के जरिए सरकार की तारीफ की और कांग्रेस पर तंज कसा। कहा हिमाचल प्रदेश में 100% लोगों को वैक्सीन का पहला टीका और 91% लोगों को वैक्सीन की दोनों डोज लग चुकी है। गोवा, गुजरात में भी काफी तेजी से वैक्सीनेशन हुआ, लेकिन कांग्रेस शासित एक भी राज्य ऐसा नहीं है जहां 90% से अधिक लोगों को वैक्सीन की एक डोज लग पाई हो।

2. डॉ. कीर्ति सोलंकी : भाजपा की सांसद डॉ. कीर्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री ने टेस्टिंग, ट्रैकिंग और ट्रीटमेंट को आधार बनाकर लोगों को कोरोना से बचाया। आंकड़ों के जरिए सरकार की तारीफ की।

( भाजपा की प्रो. रीता बहुगुणा जोशी और रतन लाल कटारिया ने भी वैक्सीनेशन और टेस्टिंग के आंकड़ों के जरिए सरकार की तारीफ की।)

नगालैंड के मुद्दे पर केवल हंगामा हुआ
राज्यसभा के 12 सदस्यों के निलंबन की वापसी और किसानों के लिए एमएसपी की गारंटी सहित कई मांगों को लेकर शुरुआत से ही सदन में केवल हंगामा हो रहा है। नगालैंड के मुद्दे पर भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। सेना की गलती से मारे गए 12 ग्रामीणों के मसले पर सदन में सोमवार को चर्चा हुई। विपक्ष ने शुरू में ही हंगामा कर दिया।

कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी, टीएमसी के सांसद सुदीप बंदोपाध्याय समेत विपक्ष के कई सांसद सदन में गृहमंत्री के बयान की मांग करते रहे। इसके चलते दो बार सदन की कार्यवाही स्थगित हुई। तीन बजे गृहमंत्री अमित शाह ने पहले लोकसभा और फिर राज्यसभा में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके तुरंत बाद दोनों सदनों में विपक्ष की नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ता देख सभापति ने सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
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