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Parliament: 1994 में भी लगी थी संसद की सुरक्षा में सेंध; 2001 के बाद कितने हुए बदलाव, नए भवन में क्या अलग?
Thu, 14 Dec 2023 03:21 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Thu, 14 Dec 2023 03:21 PM IST
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संसद सुरक्षा चूक
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
संसद में बुधवार को लोकसभा की दर्शक दीर्घा में बैठे दो व्यक्ति अचानक सदन में कूद गए और कलर स्मोक उड़ाने लगे। दो अन्य लोगों ने संसद के बाहर हंगामा मचाया। इस मामले में पुलिस छह में से पांच आरोपियों को गिरफ्त में ले चुकी है। एक अन्य आरोपी अभी फरार है। कम लोगों को ही पता है कि बुधवार जैसी ही घटना 1994 में भी दो बार घटी थीं। इस घटना के बाद संसद की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।आखिर किसके पास है संसद की सुरक्षा की जिम्मेदारी? नए संसद भवन में क्या सुरक्षा नियमों में कोई बदलाव हुआ है? 1994 में क्या हुआ था? 2001 के हमले के बाद क्या बदलाव किए गए? इस घटना के बाद क्या संसद की सुरक्षा को लेकर कोई बदलाव होने की बात हो रही है? आइये जानते हैं...
संसद की सुरक्षा में चूक।
- फोटो :
अमर उजाला
संसद की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसके पास है?
संसद चलाने की प्रति मिनट लागत 2.5 लाख रुपये तक आती है। पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने एक साक्षात्कार में जानकारी दी थी कि इसमें संसद सुरक्षा के साथ-साथ, इमारत के रखरखाव, बिजली, पानी, पेट्रोल और भोजन बिल, सांसदों, उनके अंगरक्षकों, संसद कर्मचारियों के वेतन और भत्ते शामिल हैं।
विशेष तौर पर संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर डालें तो, यह कई एजेंसियों द्वारा मिलकर की जाती है। इसमें ढेर सारी एजेंसियां और उनका इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होता है। लोकसभा सचिवालय में संयुक्त सचिव (सुरक्षा) संसद की पूरी सुरक्षा के प्रमुख होते हैं। संसद की सुरक्षा में लगी सारी एजेंसियां, इन्हीं को रिपोर्ट करती हैं।
संसद की सुरक्षा में कई एजेंसियां शामिल होती हैं। संसद की सुरक्षा के सबसे बाहरी घेरे में दिल्ली पुलिस तैनात रहती है। यानी सबसे पहली एंट्री में लोगों पर दिल्ली पुलिस की निगरानी रहती है। दूसरा घेरा सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एनएसजी, आदि एजेंसियों का होता है। संसद के बाहर अगला घेरा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप (PDG) ग्रुप का है।
संसद में बाहरी सुरक्षा के घेरों के बाद आता है, संसद के अंदर की सुरक्षा। लोकसभा और राज्यसभा में सांसदों की सुरक्षा के लिए पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस (PSS) की सुरक्षा सेवा तैनात रहती है।
संसद चलाने की प्रति मिनट लागत 2.5 लाख रुपये तक आती है। पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचार्य ने एक साक्षात्कार में जानकारी दी थी कि इसमें संसद सुरक्षा के साथ-साथ, इमारत के रखरखाव, बिजली, पानी, पेट्रोल और भोजन बिल, सांसदों, उनके अंगरक्षकों, संसद कर्मचारियों के वेतन और भत्ते शामिल हैं।
विशेष तौर पर संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर नजर डालें तो, यह कई एजेंसियों द्वारा मिलकर की जाती है। इसमें ढेर सारी एजेंसियां और उनका इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होता है। लोकसभा सचिवालय में संयुक्त सचिव (सुरक्षा) संसद की पूरी सुरक्षा के प्रमुख होते हैं। संसद की सुरक्षा में लगी सारी एजेंसियां, इन्हीं को रिपोर्ट करती हैं।
संसद की सुरक्षा में कई एजेंसियां शामिल होती हैं। संसद की सुरक्षा के सबसे बाहरी घेरे में दिल्ली पुलिस तैनात रहती है। यानी सबसे पहली एंट्री में लोगों पर दिल्ली पुलिस की निगरानी रहती है। दूसरा घेरा सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एनएसजी, आदि एजेंसियों का होता है। संसद के बाहर अगला घेरा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप (PDG) ग्रुप का है।
संसद में बाहरी सुरक्षा के घेरों के बाद आता है, संसद के अंदर की सुरक्षा। लोकसभा और राज्यसभा में सांसदों की सुरक्षा के लिए पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस (PSS) की सुरक्षा सेवा तैनात रहती है।
संसद (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो :
ANI
1994 में क्या हुआ था?
संसद सुरक्षा में चूक के मामले पहले भी सामने आए हैं। दो घटनाएं तो साल 1994 में घटित हुई थीं। पहली घटना 5 मई 1994 के दिन लगभग 11.20 बजे हुई जब एक आगंतुक विजिटर गैलरी से लोकसभा के कक्ष में कूद गया और नारे लगाने की कोशिश की। आरोपी की पहचान प्रेम पाल सिंह सम्राट के रूप में हुई थी। घटना के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने सम्राट को तुरंत हिरासत में ले लिया।
वहीं, दूसरी घटना 4 अगस्त 1994 को सुबह 11.06 बजे घटी थी। तब मोहन पाठक नाम का शख्स विजिटर गैलरी से नीचे लोकसभा कक्ष में कूद गया और नारेबाजी की। इस बीच, एक अन्य व्यक्ति मनमोहन सिंह तिवारी ने विजिटर गैलरी से नारे लगाए। दोनों व्यक्तियों को सुरक्षा अधिकारियों द्वारा तुरंत हिरासत में ले लिया गया।
संसद सुरक्षा में चूक के मामले पहले भी सामने आए हैं। दो घटनाएं तो साल 1994 में घटित हुई थीं। पहली घटना 5 मई 1994 के दिन लगभग 11.20 बजे हुई जब एक आगंतुक विजिटर गैलरी से लोकसभा के कक्ष में कूद गया और नारे लगाने की कोशिश की। आरोपी की पहचान प्रेम पाल सिंह सम्राट के रूप में हुई थी। घटना के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने सम्राट को तुरंत हिरासत में ले लिया।
वहीं, दूसरी घटना 4 अगस्त 1994 को सुबह 11.06 बजे घटी थी। तब मोहन पाठक नाम का शख्स विजिटर गैलरी से नीचे लोकसभा कक्ष में कूद गया और नारेबाजी की। इस बीच, एक अन्य व्यक्ति मनमोहन सिंह तिवारी ने विजिटर गैलरी से नारे लगाए। दोनों व्यक्तियों को सुरक्षा अधिकारियों द्वारा तुरंत हिरासत में ले लिया गया।
संसद हमला
- फोटो :
AMAR UJALA
2001 के हमले के बाद क्या बदलाव किए गए?
संसद में सुरक्षा चूक की सबसे बड़ी घटना 22 साल पहले 2001 को हुई थी। 13 दिसंबर 2001 को संसद पर जैश ए मोहम्मद के आतंकियों ने हमला कर दिया था। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला किया। इस घटना में नौ लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।
इस हमले के बाद संसद की सुरक्षा को और पुख्ता बनाने का काम किया गया। इसके तहत अपनाए गए नए सुरक्षा उपायों में संसद की ओर जाने वाली सभी मुख्य सड़कों पर मोटे बैरिकेड्स, कारों के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग, प्रमुख गलियारों में भीड़ रोकने वाले बैरिकेड्स, आगंतुकों के लिए फोटो पहचान पास और सीसीटीवी शामिल थे।
वहीं सुरक्षा के एक अतिरिक्त घेरे के लिए एक डॉग स्क्वाड तैनात किया गया। संसद के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप (PDG) ग्रुप का सुरक्षा घेरा भी शामिल हुआ। यह फोर्स डेढ़ हजार से ज्यादा जवान और अधिकारियों से मिलकर बनी है, जिसका मुख्य काम संसद की सुरक्षा है। पीडीजी के पास आतंकरोधी ऑपरेशन के लिए पास से लड़ने वाले हथियार और वाहन होते हैं। इसमें एक अलग से संचार और मेडिकल टीम होती है।
संसद में सुरक्षा चूक की सबसे बड़ी घटना 22 साल पहले 2001 को हुई थी। 13 दिसंबर 2001 को संसद पर जैश ए मोहम्मद के आतंकियों ने हमला कर दिया था। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के पांच आतंकवादियों ने संसद भवन पर हमला किया। इस घटना में नौ लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।
इस हमले के बाद संसद की सुरक्षा को और पुख्ता बनाने का काम किया गया। इसके तहत अपनाए गए नए सुरक्षा उपायों में संसद की ओर जाने वाली सभी मुख्य सड़कों पर मोटे बैरिकेड्स, कारों के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग, प्रमुख गलियारों में भीड़ रोकने वाले बैरिकेड्स, आगंतुकों के लिए फोटो पहचान पास और सीसीटीवी शामिल थे।
वहीं सुरक्षा के एक अतिरिक्त घेरे के लिए एक डॉग स्क्वाड तैनात किया गया। संसद के बाहर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप (PDG) ग्रुप का सुरक्षा घेरा भी शामिल हुआ। यह फोर्स डेढ़ हजार से ज्यादा जवान और अधिकारियों से मिलकर बनी है, जिसका मुख्य काम संसद की सुरक्षा है। पीडीजी के पास आतंकरोधी ऑपरेशन के लिए पास से लड़ने वाले हथियार और वाहन होते हैं। इसमें एक अलग से संचार और मेडिकल टीम होती है।
संसद की सुरक्षा में ये हैं घेरे।
- फोटो :
Amar Ujala
नए संसद भवन में सुरक्षा नियमों में क्या बदलाव हुआ है? पहले कैसे सुरक्षा होती थी?
संसद की नई इमारत में भी सुरक्षा के लिहाज से बड़े बदलाव किए गए थे। नई इमारत में बाउंड्री वॉल को 20 मीटर से अधिक ऊंचा किया गया है। इसके साथ बिजली की बाड़ लगाई गई। इसके अलावा मुख्य प्रवेश और निकास द्वारों को इस तरह से बनाया गया है कि कोई भी अनाधिकृत वाहन अंदर नहीं आ सकता है। यह उपाय 2001 जैसे किसी हमले की आशंका कम करने के लिए उठाया गया है।
अन्य उपायों की बात करें तो संसद की निगरानी बढ़ाई गई है और वार्ड बांटे गए हैं। वहीं, सुरक्षा के एक हिस्से के रूप में दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त कर्मियों को संसद परिसर में तैनात किया गया है। इस बीच बुधवार की घटना ने तमाम उपायों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब जानकारी यह भी है कि संसद ने सुरक्षा ऑडिट करने का फैसला किया है।
संसद की नई इमारत में भी सुरक्षा के लिहाज से बड़े बदलाव किए गए थे। नई इमारत में बाउंड्री वॉल को 20 मीटर से अधिक ऊंचा किया गया है। इसके साथ बिजली की बाड़ लगाई गई। इसके अलावा मुख्य प्रवेश और निकास द्वारों को इस तरह से बनाया गया है कि कोई भी अनाधिकृत वाहन अंदर नहीं आ सकता है। यह उपाय 2001 जैसे किसी हमले की आशंका कम करने के लिए उठाया गया है।
अन्य उपायों की बात करें तो संसद की निगरानी बढ़ाई गई है और वार्ड बांटे गए हैं। वहीं, सुरक्षा के एक हिस्से के रूप में दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त कर्मियों को संसद परिसर में तैनात किया गया है। इस बीच बुधवार की घटना ने तमाम उपायों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। अब जानकारी यह भी है कि संसद ने सुरक्षा ऑडिट करने का फैसला किया है।
Parliament Security Breach
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Social Media
अब क्या नए सुरक्षा इंतजाम की बात कही जा रही है?
सुरक्षा में चूक की घटना पर लोकसभा अध्यक्ष ने जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही संसद की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला भी किया गया है। इसके तहत संसद के अंदर और बाहर और अधिक संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही सदन में विजिटर गैलरी में कांच लगाया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सदन में कूदकर हंगामा न कर सके। जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट की तरह संसद भवन के गेट पर बॉडी स्कैन मशीनें भी लगाई जाएंगीं।
सुरक्षा में चूक की घटना पर लोकसभा अध्यक्ष ने जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही संसद की सुरक्षा बढ़ाने का फैसला भी किया गया है। इसके तहत संसद के अंदर और बाहर और अधिक संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। इसके साथ ही सदन में विजिटर गैलरी में कांच लगाया जाएगा ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति सदन में कूदकर हंगामा न कर सके। जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट की तरह संसद भवन के गेट पर बॉडी स्कैन मशीनें भी लगाई जाएंगीं।