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संसद 21 नवंबर 2019 : इलेक्टोरल बॉन्ड पर बवाल, विपक्ष ने सरकार को घेरा

Thu, 21 Nov 2019 09:28 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 21 Nov 2019 09:28 PM IST
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Parliament Live Updates uproar in Lok Sabha Rajya Sabha over economy, govt to table bill for debate
संसद भवन (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

संसद के शीतकालीन सत्र का गुरुवार को चौथा दिन रहा। लोकसभा में आज कांग्रेस ने सरकार को चुनावी चंदे वाले इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर घेरा। कांग्रेस का कहना है कि बॉन्ड के जरिए भाजपा को फायदा हुआ है। इसे लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है। इस मुद्दे को लेकर दोनों सदनों में विपक्ष काफी हंगामा कर रही है। इसी बीच कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट कर दिया है।

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गंगा की स्वच्छता के लिए मंजूर की गईं 305 परियोजनाएं

जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में गुरुवार को कहा कि गंगा नदी में प्रदूषण की चुनौतियों से निपटने में राज्य सरकारों के प्रयासों को भारत सरकार वित्तीय तथा तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। उन्होंने प्रश्नकाल में कहा कि गंगा की स्वच्छता के लिए अब तक 305 परियोजनाएं मंजूर की गई हैं जिनकी अनुमानित लागत 28,613.75 करोड़ रुपये है, इनमें से 109 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और शेष परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
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लोकसभा में विपक्ष का हंगामा

इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर कांग्रेस सांसदों ने लोकसभा से वॉक आउट किया। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी सदन में कहा कि सरकार ने जो इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए हैं, उससे सरकारी भ्रष्टाचार को अमीलजामा पहना दिया गया है। उन्होंने कहा कि इलेक्टोरल बॉन्ड के ना डोनर का पता है, ना कितने पैसे दिए गए यह पता है, जिसको दिया गया है उसकी भी कोई जानकारी नहीं है।

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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर कहा, 'जब इलेक्टोरल बॉन्ड पेश किए गए थे, तो हममें से कई लोगों ने इसपर गंभीर आपत्ति जताई थी कि कैसे यह आसानी से अमीर निगमों और व्यक्तियों के लिए अनुचित राजनीतिक दलों, विशेष रूप से सत्तारूढ़ पार्टी को प्रभावित करने का एक तरीका बन सकता है।'

पीएसयू के विनिवेश, चुनावी बॉन्ड के मुद्दे पर हंगामा

सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश तथा चुनावी बॉन्ड के मुद्दे पर आरबीआई की आपत्ति पर चर्चा करने की मांग कर रहे वाम और कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। हंगामे की वजह से उच्च सदन में शून्यकाल नहीं हो पाया। सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम वेंकैया नायडू ने आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखवाए।

इसके बाद उन्होंने बताया कि कांग्रेस के मोहम्मद अली खान, बी के हरिप्रसाद और वाम दलों के सदस्यों के के रागेश, इलामारम करीम तथा टी के रंगराजन आदि ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश तथा चुनावी बॉन्ड के मुद्दे पर आरबीआई की आपत्ति चर्चा करने के लिए कार्य स्थगन नोटिस दिए हैं। सभापति ने कहा कि उन्होंने इन नोटिस को स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इन नोटिस की वजह से कार्यस्थगन कर अन्य (मुद्दों) को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती।

कांग्रेस सदस्यों ने चुनावी बॉन्ड पर आरबीआई की आपत्ति तथा वाम दलों के सदस्यों ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश पर चर्चा करने के लिए नोटिस दिए थे। सभापति ने चर्चा की मांग कर रहे सदस्यों से शून्यकाल चलने देने की अपील की और कांग्रेस की विप्लव ठाकुर से उनका शून्यकाल के लिए सूचीबद्ध मुद्दा उठाने को कहा।

मेरठ की युवती का मामला उठा 

मेरठ की युवती को दुबई ले जाए जाने के लव जेहाद से संबंधित मामला संसद में बृहस्पतिवार को उठा। यह मुद्दा मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने उठाते हुए स्पीकर ओम बिड़ला से युवती की तलाश के लिए जांच शुरू कराए जाने की मांग की है। सांसद ने यहां तक कहा कि युवती की गुमशुदगी से क्षेत्र में चिंता फैल गई है।

सांसद ने शून्यकाल के दौरान कहा कि युवती को पूर्व निर्धारित योजना के तहत नदीम नाम के व्यक्ति ने उसका पासपोर्ट बनवाकर वीजा का प्रबंध किया। सांसद ने कहा कि पीड़िता के परिजनों ने उनसे खुद मुलाकात की है। इसके बाद ही युवती के गायब होने का मामला मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में लाया गया। सांसद ने आशंका व्यक्त की कि युवती को नदीम दुबई लेकर गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई में देरी की है। यही कारण है कि वह स्पीकर से युवती की तलाश के लिए जांच शुरू कराए जाने का आग्रह कर रहे हैं।

बसपा सांसद ने उठाया कांस्टेबल की मौत का मामला

बसपा सांसद दानिश अली ने भी संसद में उनके संसदीय क्षेत्र अमरोहा से संबंधित एक कांस्टेबल की थाने में मौत का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि कांस्टेबल प्रवीण कुमार बागपत में तैनात था। उसके परिजनों का आरोप है कि उसकी मौत नहीं बल्कि हत्या हुई है। प्रवीण की मौत थाने के ही दरोगा के रिवाल्वर की गोली लगने से हुई, लेकिन इस मामले पर अब तक पुलिस की ओर से केस दर्ज नहीं किया जा रहा है।

किसानों को न ठहराएं जिम्मेदारी- भगवंत मान 

आप सांसद भगवंत मान और अपना दल की सांसद अनुप्रिया पटेल ने कहा कि पराली जलाने के लिए किसानों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं। उन्हें ऐसी फसलें उगाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जिसमें पराली न बनती हो। 

इलेक्टोरल ब़ॉन्ड पर सरकार को बनाएंगे जवाबदेह

कांग्रेस की संसदीय रणनीति बैठक को लेकर सूत्रों का कहना है, 'हम इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे को इतनी जल्दी खत्म नहीं होने देंगे। हम सरकार को जवाबदेह बनाएंगे। सरकार के खिलाफ रणनीति बनाने के लिए विपक्षी दलों तक पहुंचकर हम इस पर विस्तृत चर्चा चाहते हैं। यदि सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड पर चर्चा करने की अनुमति नहीं देती तो कांग्रेस सदन से वॉकआउट करेगी। कांग्रेस गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन भी करेगी।'

मिट्टी का कलश लेकर संसद पहुंचे मंत्री

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल आज जलियांवाला बाग की मिट्टी का कलश लेकर संसद पहुंचे। पीएम मोदी को ये कलश सौपेंगे। बता दें कि 19 नवंबर को राज्यसभा में जलियांवाला बाग नैशनल मेमोरियल (अमेंडमेंट) बिल पास हुआ था। 

लोकसभा अध्यक्ष ने दी नसीहत

प्रश्नकाल के दौरान नारे लगा रहे कांग्रेस सांसदों को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की नसीहत देते हुए कहा कि हमारा दायित्व है कि सदन की गरिमा को बनाए रखें। कृपया सदन के वेल में ना आएं। मैंने बहस और चर्चा का हमेशा मौका दिया है।


हाउस के वेल में न आएं

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने विपक्षी सांसदों के प्रश्नकाल के दौरान सदन में नारेबाजी करने को लेकर कहा, 'सदन की गरिमा को बनाए रखना हमारा कर्तव्य है। कृपया हाउस के वेल में न आएं। मैंने हमेशा चर्चा और बहस के लिए सभी को मौका दिया है।'

शून्य काल में उठाया जा सकता है वनवासियों को जमीन के अधिकार से वंचित करने का मुद्दा

आप के राज्य सभा सदस्य संजय सिंह ने वन अधिकार कानून का सही तरीके से पालन नहीं होने से वनवासियों के वन संपदा और जमीन के अधिकार से वंचित होने का मुद्दा गुरुवार को उच्च सदन में शून्य काल में उठाने की अनुमति सभापति से मांगी है। सिंह ने राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू को पत्र लिख कर कहा है कि वन क्षेत्र में निवास करने वाले वनवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए बनाए गए वन अधिकार क़ानून को लागू हुए 12 साल हो गए लेकिन यह समुचित तरीके से अमल में नहीं लाया जा सका है। इस कारण से देश के लाखों वनवासी वन संपदा और जमीन के अधिकार से वंचित होकर विस्थापन की स्थिति में आ गए हैं।

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