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PAC: ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात सैनिकों के लिए कपड़ों-उपकरणों की आपूर्ति में हो सुधार, संसदीय समिति की वकालत

Wed, 14 Dec 2022 07:14 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Wed, 14 Dec 2022 07:14 PM IST
सार

समिति ने अपनी रिपोर्ट में सलाह देते हुए कहा कि सैनिकों के लिए वस्तुओं और कपड़ों के लिए व्यय और राजस्व और पूंजीगत खरीद की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है। जिससे खरीद की समयसीमा को कम करने में भी मदद मिलेगी।

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Par panel says There should not be any gap in supply of clothing to troops in high-altitude regions
भारतीय जवान। - फोटो : PTI

विस्तार

 तवांग में चीनी सैनिकों के साथ भारतीय सेना के जवानों की झड़प के बाद उपजे तनाव के बीच एक संसदीय पैनल ने  ऊंचाई वाले क्षेत्रों में देश की सुरक्षा में तैनात सैनिकों के लिए कपड़ों, उपकरणों, राशन और आवास सुविधाओं में सुधार की वकालत की है। 

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दरअसल, बुधवार को लोक लेखा समिति ने लोकसभा में अपनी 55वीं रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट में लोक लेखा समिति (पीएसी) ने ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों के लिए सर्दियों के कपड़ों की खरीद में अत्यधिक देरी के साथ-साथ उनके आवास की स्थिति में सुधार के लिए परियोजना के कार्यान्वयन की ओर इशारा किया। इसके साथ ही समिति ने उन क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए बेहतर गुणवत्ता वाले कपड़ों, उपकरणों, राशन और आवास सुविधाओं की खरीद के लिए दृष्टिकोण में तत्काल सुधार की भी सिफारिश की।
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पीएसी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि ऑडिट के दौरान कई बार कपड़ों और अन्य वस्तुओं की खरीद में चार साल तक की देरी के उदाहरण पाए गए। इस संदर्भ में, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की अध्यक्षता वाली समिति ने 2007 में उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों के लिए कपड़ों की वस्तुओं की तेजी से खरीद के लिए पूर्ण वित्तीय शक्तियों के साथ एक अधिकार प्राप्त समिति की स्थापना का भी जिक्र किया। समिति ने यह भी कहा कि खराब मौसम वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधनों के अलग से आवंटन की जरूरत है। 
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उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सैनिकों के लिए आवास की स्थिति में सुधार के लिए जारी परियोजना का जिक्र करते हुए संसदीय कमेटी ने कहा कि जांच के दौरान पाया गया कि इसे एडॉक तरीके से लागू किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी कभी नहीं ली गई। इतना ही नहीं, यहां तक कि पायलट परियोजना को भी चरणों में मंजूरी दी गई। इन सबके कारण 274 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद पायलट परियोजना सफल नहीं रही।


समिति ने अपनी रिपोर्ट में सलाह देते हुए कहा कि सैनिकों के लिए वस्तुओं और कपड़ों के लिए व्यय और राजस्व और पूंजीगत खरीद की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र विकसित करने की आवश्यकता है। जिससे खरीद की समयसीमा को कम करने में भी मदद मिलेगी। गौरतलब है कि कठोर सर्दियों के महीनों के दौरान लद्दाख सहित सियाचिन आदि स्थानों में तापमान शून्य से 40 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है।

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