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आयुर्वेद और यूनानी दवाओं से बताई कोरोना की काट: अमर उजाला और आयुष मंत्रालय ने आयोजित किया पांच दिवसीय वेबिनार

Fri, 18 Jun 2021 08:04 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Tanuja Yadav Updated Fri, 18 Jun 2021 08:04 PM IST
सार

स्वस्थ जीवन के लिए सेहत के प्रति जागरूकता अत्यंत महत्वपूर्ण है। कोरोना काल में इसका महत्व काफी ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में अमर उजाला ने आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय आयुर्वेदिक विद्यापीठ के साथ पांच दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया, जिसमें आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा पद्धति के प्रति लोगों की रुचि बढ़ाने की कोशिश की गई।

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Panel Discussion Ministry Of Ayush Organises Series Of Five Webinars On Ayurved and Health with Amar Ujala
अमर उजाला वेबिनार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इस वेबिनार की शुरुआत 14 जून 2021 से हुई और यह 18 जून 2021 तक जारी रहा। इस दौरान रोजाना शाम पांच बजे जाने-माने विशेषज्ञों ने आयुर्वेद का महत्व समझाया, जिसका प्रसारण अमर उजाला के फेसबुक और यूट्यूब चैनल पर किया गया।

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वेबिनार के विशेषज्ञ

  • डॉ. तनूजा नेसरी (निदेशक, अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान)
  • राजीव वासुदेवन (सीएमडी, आयुर्वैद हॉस्पिटल और आयुष एडवाइजरी कमेटी के सदस्य)
  • रंजीत पुराणिक (प्रबंध निदेशक, श्री धूतापापेश्वर लिमिटेड)
  • प्रो. संजीव कुमार शर्मा (निदेशक, राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर)
  • डॉ. अरविंद चोपड़ा (सेंटर फॉर रोमैटिक डिसीज, पुणे एवं चीफ क्लिनिक कोऑर्डिनेटर, आयुष मंत्रालय, सीएसआईआर)
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  • डॉ. भावना पराशर (वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक, सीएसआईआर-आईजीआईबी)
  • डॉ. अनुपम श्रीवास्तव (निदेशक, राष्ट्रीय आयर्वेद विद्यापीठ)
  • डॉ. एन. श्रीकांत (निदेशक जनरल सीसीआरएएस)

पहले दिन बताया कोरोना के उपचार में आयुर्वेद का महत्व
बता दें कि इस कार्यक्रम का ध्येय वाक्य 'सेहत है संग तो जीतेंगे हर जंग' रखा गया था। इसकी पहली कड़ी में 14 जून को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान की निदेशक डा. तनुजा नेसरी ने बताया कि घर में रहकर इलाज करा रहे मरीजों को कब तक और कौन सी दवा दी जा सकती है। साथ ही, उन्होंने एलोपैथिक दवाओं के साथ आयुर्वेदिक दवाओं के इस्तेमाल की भी जानकारी दी। डॉ. तनुजा नेसरी ने कहा कि खुशनुमा जीवन जीने के लिए हमें आयुर्वेद को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। इसके अलावा कोरोना के साथ भी और कोरोना को बाद भी स्वस्थ जीवन जीने के लिए आयुर्वेदिक जीवन शैली को अपनाना होगा। उन्होंने बताया कि ध्यान, पौष्टिक भोजन, व्यायाम और योग को जीवनशैली में शामिल करें तो कोरोना काल में भी सुरक्षित रह सकते हैं।

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दूसरे दिन समझाया कम खर्च में प्रभावी इलाज का तरीका
गौरतलब है कि इस कार्यक्रम की दूसरी कड़ी में 15 जून को आयुर्वेद हॉस्पिटल और आयुष एडवाइजरी कमेटी के सदस्य राजीव वासुदेवन पाठकों से रूबरू हुए। उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही, ‘आयुर्वेद और स्वास्थ्य बीमा’ के बारे में जानकारी दी। राजीव वासुदेवन के मुताबिक, करीब 3000 वर्षों से आयुर्वेद हमारी सेहत की देखभाल कर रहा है और इसने कोरोना के इलाज में भी अपनी भूमिका साबित की।  उन्होंने बताया कि एलोपैथी में दवाएं बनाने के लिए लाखों डॉलर का खर्च होता है, जबकि आयुर्वेद में कम खर्च में प्रभावी इलाज मुहैया कराया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आयुर्वेदिक दवाएं लेने में भी सुनी-सुनाई बातों के आधार पर प्रयोग नहीं करना चाहिए।

तीसरे दिन आयुर्वेद के रहस्य पर चर्चा
वेबिनार के तीसरे दिन यानी 16 जून को श्री धूतापापेश्वर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक रंजीत पुराणिक आयुर्वेद उद्योग में औषधीय पौधों की खपत के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जब से आयुर्वेद को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स के दायरे में आया और इसके मानकीकरण की मुहिम चलाई गई। इससे लोगों में आयुर्वेद को लेकर जागरूकता बढ़ी। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में कोई रहस्य नहीं है। एलोपैथी में दवाओं के पेटेंट की समस्या आती है। आयुर्वेद में ऐसा नहीं है। इसे सेवाभाव की चिकित्सा कहा जाता है। अश्वगंधा, गिलोय, च्यवनप्राश, तुलसी, पिंपली जैसी औषधियां मनुष्य के स्वास्थ्य और प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

चौथे दिन बताया भोजन-नींद के ध्यान का तरीका
इस कार्यक्रम की चौथी कड़ी में 17 जून को राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, जयपुर के प्रो. संजीव कुमार शर्मा शल्य तंत्र पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बेहतर नींद लेना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अहम है। रात सोने के लिए बनी है और दिन काम करने के लिए। हमें इसी व्यवस्था के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए। इसके अलावा अच्छे स्वास्थ्य में भोजन की भूमिका भी अहम है। हमें भोजन की प्रकृति के बारे में यानी यह मालूम होना चाहिए कि जो भोजन हम ले रहे हैं वह कैसा है। हमें अपनी तासीर पता होनी चाहिए।


अंतिम दिन दी गई आयुष-64 किट की जानकारी
वेबिनार के अंतिम दिन यानी 18 जून को जाने-माने विशेषज्ञों ने कोरोना के उपचार में आयुर्वेद के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में पूरी दुनिया को आयुर्वेद का सही इस्तेमाल करना है तो सही दिशा में अनुसंधान के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है। डॉ. तनुजा केसरी ने आयुर्वेद से 600 से ज्यादा मरीजों को ठीक करने की जानकारी दी। साथ ही, बताया कि इन मरीजों का रिकवरी टाइम भी घटकर 50 फीसदी हो गया। सीसीआरएएस के निदेशक जनरल डॉ. एन. श्रीकांत ने कहा कि आयुष मंत्रालय द्वारा तैयार की गई आयुष-64 किट व अश्वगंधा को कोविड-19 की रोकथाम के लिए काफी उपयुक्त पाया गया।

अब भी देख सकते हैं वेबिनार के वीडियो
अगर आप पांच दिवसीय इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए तो चिंता की कोई बात नहीं है। आप अमर उजाला के यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज पर जाकर इन वेबिनार के सभी वीडियो देख सकते हैं और कोरोना से जंग में आयुर्वेद के महत्व को समझ सकते हैं।

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