फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   'Pandit Nehru sacrificed national interest for personal ambition'; Serious allegations by BJP

Indus Water Treaty: 'पंडित नेहरू ने निजी महत्वाकांक्षा के आगे राष्ट्रीय हित की तिलांजलि दी'; BJP के गंभीर आरोप

Mon, 18 Aug 2025 05:57 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पवन पांडेय Updated Mon, 18 Aug 2025 05:57 PM IST
सार

Indus Water Treaty: भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए सिंधु जल संधि 1960 को पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सबसे बड़ी भूल करार दिया है। उन्होंने ये भी कहा कि पंडित नेहरू ने निजी महत्वाकांक्षा के आगे राष्ट्रीय हित की तिलांजलि दे दी थी।

विज्ञापन
'Pandit Nehru sacrificed national interest for personal ambition'; Serious allegations by BJP
जेपी नड्डा, अध्यक्ष, भाजपा - फोटो : पीटीआई

विस्तार

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर निशाना साधा है। जेपी नड्डा ने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट के सीरीज में लिखा- 1960 की सिंधु जल संधि, पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की सबसे बड़ी भूलों में से एक थी, जिसमें राष्ट्रीय हितों को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं की बलिवेदी पर रखा गया था।
विज्ञापन



 
विज्ञापन
विज्ञापन

संसद से राय नहीं ली गई- नड्डा
जेपी नड्डा ने आगे लिखा- सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह संधि सितंबर 1960 में हस्ताक्षरित हुई, लेकिन संसद में इसे दो महीने बाद नवंबर में रखा गया। चर्चा भी केवल प्रतीकात्मक रही- सिर्फ 2 घंटे। संसद की अनदेखी ने पूरे राष्ट्र को आहत किया।

 यह भी पढ़ें - धर्मस्थल मामला: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र ने जांच पर उठाए सवाल; कहा- SIT पर किसका दबाव, सीएम जवाब दें

'कांग्रेस के नेताओं ने भी जताया विरोध'
जेपी नड्डा के अनुसार, नेहरू के इस फैसले का विरोध उनकी अपनी पार्टी के सांसदों ने किया। अशोक मेहता ने इस संधि को 'दूसरा विभाजन' बताया था। वहीं ए.सी. गुहा ने पाकिस्तान को 83 करोड़ रुपये स्टर्लिंग देने की आलोचना करते हुए इसे मूर्खता की पराकाष्ठा करार दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि संसद को दरकिनार करना तानाशाही सरकार का रवैया है।


अटल बिहारी वाजपेयी की दूरदृष्टि
भाजपा अध्यक्ष ने आगे पोस्ट में बताया कि उस समय युवा सांसद अटल बिहारी वाजपेयी ने नेहरू के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान की अनुचित मांगों को मान लेना दोस्ती की गारंटी नहीं हो सकता। उन्होंने साफ कहा कि सच्ची दोस्ती अन्याय पर नहीं टिक सकती। यदि पाकिस्तान की मांगों को ठुकराने से रिश्ते बिगड़ते हैं, तो ऐसा होना ही बेहतर है।



'कमजोर और जनभावना से बिल्कुल अलग थे नेहरू के तर्क'
जेपी नड्डा ने आगे लिखा- संसद में जब नेहरू ने संधि का बचाव किया तो उनके तर्क कमजोर और जनभावना से बिल्कुल अलग थे। उन्होंने राष्ट्रीय पीड़ा को हल्के में लेते हुए कहा- 'विभाजन किस चीज का? एक बाल्टी पानी का?' उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों में संसद की राय लेना आवश्यक नहीं समझा गया। यही नहीं, उन्होंने विरोध करने वाले सांसदों की चिंताओं को संकुचित दृष्टिकोण कहकर खारिज कर दिया था।

 यह भी पढ़ें - ED के खुलासे: लाइसेंस खत्म, फिर भी जबरन वसूली और तीन नदियों से अवैध खनन; 'झारखंड टाइगर ग्रुप' नाम का समूह गठित

मोदी सरकार का ऐतिहासिक कदम
जेपी नड्डा ने आखिरी में लिखा- आज भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नेतृत्व क्षमता के कारण उस ऐतिहासिक भूल का बोझ कम कर पाया है। मोदी सरकार ने सिंधु जल संधि को अस्थायी तौर पर रोककर कांग्रेस के उस गंभीर ऐतिहासिक अपराध को सुधारने की कोशिश की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed