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पालघर अस्पताल हिंसा: विधायक के बेटे समेत 14 गिरफ्तार, नौ अभी भी फरार; हाईकोर्ट ने क्यों लगाई पुलिस को फटकार?
Fri, 11 Sep 2026 09:08 PM IST
देवेश त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Fri, 11 Sep 2026 09:08 PM IST
सार
पालघर के रिलीफ अस्पताल में दही हांडी के बाद घायल 'गोविंदाओं' के इलाज के बिल को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था। इस मामले में पुलिस ने शुक्रवार को 14 और लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें विधायक राजेंद्र गावित का बेटा और 12 'गोविंदा' शामिल हैं। इससे पहले शिवसेना नेता राहुल घरात की गिरफ्तारी हुई थी।
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अस्पताल में घुसकर मारपीट-तोड़फोड़ का मामला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पालघर में अस्पताल में घुसकर हिंसा और तोड़फोड़ करने के मामले में पुलिस ने शुक्रवार को 14 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें विधायक राजेंद्र गावित का बेटा रोहित गावित और 12 'गोविंदा' शामिल हैं। इसके साथ ही मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। इससे पहले शिवसेना के पालघर शहर प्रमुख राहुल घरात को सात सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि रोहित गावित को शनिवार को अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं, गिरफ्तार किए गए 12 'गोविंदाओं' को स्थानीय अदालत ने 13 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
क्या है पूरा मामला?
छह सितंबर की तड़के एक कथित भीड़ पालघर के रिलीफ अस्पताल में घुस गई थी। पुलिस के मुताबिक, यह भीड़ कथित तौर पर शिवसेना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की थी। पांच सितंबर को दही हांडी कार्यक्रम के बाद घायल 'गोविंदाओं' को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। उनके इलाज के बिल को लेकर विवाद के बाद यह घटना हुई। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने अस्पताल के रिसेप्शनिस्ट के साथ मारपीट की, एक डॉक्टर को गालियां दीं और आईसीयू में घुसकर वहां भर्ती एक घायल व्यक्ति को जबरन अपने साथ ले गई।
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किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (प्रिवेंशन ऑफ वायलेंस एंड डैमेज ऑर लॉस टू प्रॉपर्टी) एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपियों पर मारपीट, आपराधिक धमकी, जबरन प्रवेश, गैरकानूनी जमावड़ा और अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 22 लोगों की पहचान की है। मामले में शिवसेना के जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे, शहर प्रमुख राहुल घरात, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे और डिप्टी तालुका प्रमुख रोहित गावित समेत 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत पर 15 सितंबर को सुनवाई
पुलिस अधिकारी ने बताया कि तीन आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। इनमें निलंबित पूर्व जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे, पार्षद नीलमकुमार सांखे और ड्राइवर शुभम बांदिवडेकर शामिल हैं। इनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं पर 15 सितंबर को सुनवाई होगी।
पुलिस के अनुसार, नौ आरोपी फरार हैं। अभियोजन पक्ष ने शुक्रवार को हाईकोर्ट को बताया कि प्राथमिकी में शुरुआत में अज्ञात बताए गए 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फरार नौ आरोपियों में से तीन ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर जताई नाराजगी
इस बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पालघर अस्पताल हिंसा मामले की जांच को लेकर पुलिस को फटकार लगाई। न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने पुलिस के रवैये को 'लापरवाह' बताते हुए जांच को 'हास्यास्पद और गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण' करार दिया।
पीठ ने कोंकण संभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक को जांच की समीक्षा करने और 17 सितंबर को अदालत में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में यह बताने को कहा गया है कि पालघर पुलिस की ओर से अब तक की गई कार्रवाई कानूनी रूप से उचित थी या नहीं।
हाईकोर्ट ने कहा कि पालघर पुलिस की कार्रवाई 'सिर्फ दिखावटी' नजर आती है और ऐसा लगता है कि जांच इस तरह की गई जिससे अंततः आरोपियों को फायदा हो। पीठ ने जांच के तरीके पर भी सवाल उठाए। इसमें घटनास्थल के पंचनामा तैयार करने से लेकर थाने की केस डायरी में की गई प्रविष्टियों तक की प्रक्रिया शामिल है।
अस्पताल में तोड़फोड़ को लेकर लगे क्या आरोप?
पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे जुलाई में ठाणे के एक नागरिक अस्पताल में हुई मारपीट की घटना के संबंध में स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किया गया था। उस मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे आरोपी हैं। इसी सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंडरगी ने इस सप्ताह की शुरुआत में अदालत को पालघर की घटना की जानकारी दी थी।
अदालत को बताया गया कि पांच और छह सितंबर की दरमियानी रात कई शिवसेना कार्यकर्ता पालघर के रिलीफ अस्पताल में कथित तौर पर घुस गए थे। वहां पांच सितंबर को दही हांडी समारोह में शामिल होने के बाद घायल हुए कुछ 'गोविंदा' भर्ती थे। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि अस्पताल अधिक शुल्क वसूल रहा है। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर अस्पताल में तोड़फोड़ की, डॉक्टरों को धमकाया, कर्मचारियों के साथ मारपीट की और आईसीयू में भर्ती घायल लोगों को जबरन अपने साथ ले गए।
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पुलिस अधिकारी ने बताया कि रोहित गावित को शनिवार को अदालत में पेश किया जाएगा। वहीं, गिरफ्तार किए गए 12 'गोविंदाओं' को स्थानीय अदालत ने 13 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
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क्या है पूरा मामला?
छह सितंबर की तड़के एक कथित भीड़ पालघर के रिलीफ अस्पताल में घुस गई थी। पुलिस के मुताबिक, यह भीड़ कथित तौर पर शिवसेना के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की थी। पांच सितंबर को दही हांडी कार्यक्रम के बाद घायल 'गोविंदाओं' को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। उनके इलाज के बिल को लेकर विवाद के बाद यह घटना हुई। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने अस्पताल के रिसेप्शनिस्ट के साथ मारपीट की, एक डॉक्टर को गालियां दीं और आईसीयू में घुसकर वहां भर्ती एक घायल व्यक्ति को जबरन अपने साथ ले गई।
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किन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा?
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता और महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (प्रिवेंशन ऑफ वायलेंस एंड डैमेज ऑर लॉस टू प्रॉपर्टी) एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। आरोपियों पर मारपीट, आपराधिक धमकी, जबरन प्रवेश, गैरकानूनी जमावड़ा और अन्य धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 22 लोगों की पहचान की है। मामले में शिवसेना के जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे, शहर प्रमुख राहुल घरात, विधायक राजेंद्र गावित के बेटे और डिप्टी तालुका प्रमुख रोहित गावित समेत 22 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत पर 15 सितंबर को सुनवाई
पुलिस अधिकारी ने बताया कि तीन आरोपियों ने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। इनमें निलंबित पूर्व जिला प्रमुख कुंदन बालकृष्ण सांखे, पार्षद नीलमकुमार सांखे और ड्राइवर शुभम बांदिवडेकर शामिल हैं। इनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं पर 15 सितंबर को सुनवाई होगी।
पुलिस के अनुसार, नौ आरोपी फरार हैं। अभियोजन पक्ष ने शुक्रवार को हाईकोर्ट को बताया कि प्राथमिकी में शुरुआत में अज्ञात बताए गए 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। फरार नौ आरोपियों में से तीन ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया।
हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर जताई नाराजगी
इस बीच, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पालघर अस्पताल हिंसा मामले की जांच को लेकर पुलिस को फटकार लगाई। न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने पुलिस के रवैये को 'लापरवाह' बताते हुए जांच को 'हास्यास्पद और गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण' करार दिया।
पीठ ने कोंकण संभाग के अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक को जांच की समीक्षा करने और 17 सितंबर को अदालत में रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। रिपोर्ट में यह बताने को कहा गया है कि पालघर पुलिस की ओर से अब तक की गई कार्रवाई कानूनी रूप से उचित थी या नहीं।
हाईकोर्ट ने कहा कि पालघर पुलिस की कार्रवाई 'सिर्फ दिखावटी' नजर आती है और ऐसा लगता है कि जांच इस तरह की गई जिससे अंततः आरोपियों को फायदा हो। पीठ ने जांच के तरीके पर भी सवाल उठाए। इसमें घटनास्थल के पंचनामा तैयार करने से लेकर थाने की केस डायरी में की गई प्रविष्टियों तक की प्रक्रिया शामिल है।
अस्पताल में तोड़फोड़ को लेकर लगे क्या आरोप?
पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसे जुलाई में ठाणे के एक नागरिक अस्पताल में हुई मारपीट की घटना के संबंध में स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किया गया था। उस मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे आरोपी हैं। इसी सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मुंडरगी ने इस सप्ताह की शुरुआत में अदालत को पालघर की घटना की जानकारी दी थी।
अदालत को बताया गया कि पांच और छह सितंबर की दरमियानी रात कई शिवसेना कार्यकर्ता पालघर के रिलीफ अस्पताल में कथित तौर पर घुस गए थे। वहां पांच सितंबर को दही हांडी समारोह में शामिल होने के बाद घायल हुए कुछ 'गोविंदा' भर्ती थे। शिवसेना कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि अस्पताल अधिक शुल्क वसूल रहा है। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर अस्पताल में तोड़फोड़ की, डॉक्टरों को धमकाया, कर्मचारियों के साथ मारपीट की और आईसीयू में भर्ती घायल लोगों को जबरन अपने साथ ले गए।