फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Pakistan will have to wait for consent of India

भारत की हां के लिए फिलहाल पाकिस्तान को करना होगा इंतजार

Thu, 29 Nov 2018 03:28 AM IST
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Updated Thu, 29 Nov 2018 03:28 AM IST
विज्ञापन
Pakistan will have to wait for consent of India

पाकिस्तान में होने वाले सार्क सम्मेलन में शामिल होने से भारत के इनकार से साफ हो गया है कि करतारपुर कॉरिडोर निर्माण के बहाने दोनों देशों के रिश्ते पर जमी बर्फ अभी नहीं पिघलेगी। हालांकि ऐसा नहीं है कि आतंकी वारदात के बाद दोनों देश वार्ता की मेज पर नहीं बैठे हों, मगर इस बार कारण संसदीय चुनाव सिर पर होने और आतंकवाद पर भारत की चिंताओं पर पाकिस्तान की नई सरकार की चुप्पी है।

विज्ञापन


सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान में नई सरकार आने के बाद संवाद का सिलसिला शुरू हो सकता था, लेकिन इमरान खान की सरकार ने भारत की चिंता दूर करने का ठोस संकेत तक नहीं दिया। रही-सही कसर अमृतसर में ग्रेनेड हमले ने पूरी कर दी। इस हमले के कारण पाक की नई सरकार का करतारपुर कॉरिडोर पर सकारात्मक रुख भी रिश्तों पर जमी बर्फ नहीं पिघला पाया।
विज्ञापन


मोदी सरकार की दिक्कत यह है कि उसने आतंकवाद जारी रहते वार्ता न करने की बात कही है। ऐसे में सरकार ठीक लोकसभा चुनाव से पहले संवाद का सिलसिला कैसे शुरू कर सकती है। करतारपुर कॉरिडोर के शिलान्यास कार्यक्रम में भी पाक पीएम इमरान खान ने भारत से रिश्ते सुधारने पर तो बल दिया, लेकिन उनके भाषण में आतंकवाद पर भारत की चिंताओं का रत्ती भर भी जिक्र नहीं था।

विज्ञापन
विज्ञापन

सिर्फ वाजपेयी ने दिखाया था साहस

चुनाव सिर पर होने के बावजूद महज एक पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान से बातचीत का साहस दिखाया था। वह भी तब, जब 1999 में शांति कायम करने बस से लाहौर जाने के बाद उसी साल उन्हें कारगिल युद्ध झेलना पड़ा और 2001 में संसद पर आतंकी हमला हुआ। कारगिल के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ आगरा आए। जबकि चुनावी साल 2004 के जनवरी महीने में वाजपेयी रिश्ते सुधारने इस्लामाबाद गए।

सुलझते-उलझते दिखे रिश्ते

आतंकवाद के सवाल पर भारत-पाक के बीच संवाद की संभावना बनती बिगड़ती रही। वर्ष 2008 में काबुल में भारतीय दूतावास पर हमले और उसी वर्ष मुंबई आतंकी हमले के बाद भी तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने रिश्ते सुधारने की कोशिश की थी। इस दौरान दोनों देशों के बीच बातचीत भी हुई, लेकिन 2013 में जवान हेमराज और सुधाकर की नृशंस हत्या के कारण वार्ता टूट गई। मोदी सरकार के कार्यकाल में पठानकोट, उड़ी हमलों ने सरकार का जायका बिगाड़ कर रख दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed