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पाकिस्तान ने पूरी की 91 साल के भारतीय बुजुर्ग की आखिरी इच्छा
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 25 Jun 2016 01:27 PM IST
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- फोटो : ani
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अगर 91 साल की उम्र में किसी बुजुर्ग की आखिरी इच्छा पूरी हो जाए तो वाकई उसे कितना संतोष मिलेगा। ऐसा ही एक मामला मेरठ में सामने आया है, जहां रहने वाले कृष्णा खन्ना की जैसे मन की मुराद ही पूरी हो गई हो। मामला पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है, जहां कृष्णा खन्ना के बचपन की यादें जुड़ी हुई थी।
पूरी कहानी आजादी के पहले की है जब 1930 में कृष्णा खन्ना पाकिस्तान स्थित उढोक में अपने भाईयों के साथ बचपन के दिन गुजार रहे थे। यहीं पर उन्होंने अपने दादा के साथ रहकर अपना बचपन बिताया, खेले-कूदे। हालांकि आजादी के समय यानी 1947 का दौर याद करते हुए कृष्णा खन्ना कहते हैं कि वह समय उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दौर था, जिसे वह भूलना चाहते हैं। उस समय हुए दंगों में उन्हें उढ़ोक में अपना घर छोड़कर शेखपुरा आना पड़ा। जहां उन्होंने एक गुरुद्वारे में शरण लेकर अपनी जान बचाई। इस समय भी हमलावर गुरुद्वारे को घेरे हुए थे लेकिन सेना की टीम ने पहुंचकर किसी तरह से उन्हें और गुरुद्वारे में रुके हुए दूसरे लोगों को सुरक्षित जगह पर ले गए।
उस दौर को याद करके कृष्णा खन्ना बेहद भावुक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना में दोनों देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि अब मैं एक बार फिर से अपनी यादों को संजोना चाहता हूं। मैं एक बार फिर से उस जमीन को देखना चाहता हूं जहां मैंने अपना बचपन बिताया है।
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पूरी कहानी आजादी के पहले की है जब 1930 में कृष्णा खन्ना पाकिस्तान स्थित उढोक में अपने भाईयों के साथ बचपन के दिन गुजार रहे थे। यहीं पर उन्होंने अपने दादा के साथ रहकर अपना बचपन बिताया, खेले-कूदे। हालांकि आजादी के समय यानी 1947 का दौर याद करते हुए कृष्णा खन्ना कहते हैं कि वह समय उनकी जिंदगी का सबसे कठिन दौर था, जिसे वह भूलना चाहते हैं। उस समय हुए दंगों में उन्हें उढ़ोक में अपना घर छोड़कर शेखपुरा आना पड़ा। जहां उन्होंने एक गुरुद्वारे में शरण लेकर अपनी जान बचाई। इस समय भी हमलावर गुरुद्वारे को घेरे हुए थे लेकिन सेना की टीम ने पहुंचकर किसी तरह से उन्हें और गुरुद्वारे में रुके हुए दूसरे लोगों को सुरक्षित जगह पर ले गए।
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उस दौर को याद करके कृष्णा खन्ना बेहद भावुक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस घटना में दोनों देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। हालांकि अब मैं एक बार फिर से अपनी यादों को संजोना चाहता हूं। मैं एक बार फिर से उस जमीन को देखना चाहता हूं जहां मैंने अपना बचपन बिताया है।
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10 साल से वीजा के लिए अप्लाई कर रहे थे
कृष्णा खन्ना ने बताया कि वह पिछले 10 साल से लगातार पाकिस्तान जाने के लिए वीजा अप्लाई कर रहे थे लेकिन, कामयाबी नहीं मिल रही थी। आखिरकार 91 की उम्र में उन्हें वीजा मिल गया। उन्हें न केवल उढोक और शेखपुरा जाने की आज्ञा दी गई बल्कि उन्हें तीन अन्य जगहों पर भी जाने की छूट दी गई है। कृष्णा खन्ना अकेले नहीं बल्कि उनके साथ उनके 80 वर्षीय जगदीश को पाकिस्तान का दौरा करने की आज्ञा मिली है।
कृष्णा खन्ना को जैसे ही इस बात की जानकारी मिली उन्हें पाकिस्तान जाने का वीजा मिल गया है, उनकी आंखें छलक आई। वह तुरंत ही मेरठ के एक खेल के सामान वाली दुकान पर गए जहां उन्होंने क्रिकट की गेंद खरीदी।
उन्होंने बताया कि मैंने पिछले एक दशक में न जाने के कितनी ही बार कोशिश की जिससे पाकिस्तान जा सकूं। इसके लिए पाकिस्तान हाई कमीशन में कई प्रयास किए, लेकिन हर बार मुझे मना कर दिया गया। उन्हें पाकिस्तान का वीजा देने के लिए वहां के किसी स्थानीय स्पॉन्सर की जरूरत थी। ये पाकिस्तान का वीजा हासिल करने का बेहद जरूरी दस्तावेज है। मेरे पास ऐसा कोई स्पॉन्सर नहीं था। हालांकि वीजा दिए जाने के बाद पाकिस्तान के प्रेस मंत्री मंजूर अली मेमन कहा कि पाकिस्तान उच्चायोग, वरिष्ठ सज्जन को वीजा देने से खुश है। हम उनका दिल से स्वागत करते हैं।
कृष्णा खन्ना को जैसे ही इस बात की जानकारी मिली उन्हें पाकिस्तान जाने का वीजा मिल गया है, उनकी आंखें छलक आई। वह तुरंत ही मेरठ के एक खेल के सामान वाली दुकान पर गए जहां उन्होंने क्रिकट की गेंद खरीदी।
उन्होंने बताया कि मैंने पिछले एक दशक में न जाने के कितनी ही बार कोशिश की जिससे पाकिस्तान जा सकूं। इसके लिए पाकिस्तान हाई कमीशन में कई प्रयास किए, लेकिन हर बार मुझे मना कर दिया गया। उन्हें पाकिस्तान का वीजा देने के लिए वहां के किसी स्थानीय स्पॉन्सर की जरूरत थी। ये पाकिस्तान का वीजा हासिल करने का बेहद जरूरी दस्तावेज है। मेरे पास ऐसा कोई स्पॉन्सर नहीं था। हालांकि वीजा दिए जाने के बाद पाकिस्तान के प्रेस मंत्री मंजूर अली मेमन कहा कि पाकिस्तान उच्चायोग, वरिष्ठ सज्जन को वीजा देने से खुश है। हम उनका दिल से स्वागत करते हैं।