Pakistan: लापता लोगों की रिहाई की मांग कर रही महिलाओं पर अत्याचार, चीन ने अधर में छोड़ी बिजली परियोजना
पाकिस्तान में बलोचिस्तानियों पर आए दिन अत्याचार और नागरिकों के जबरन गायब होने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार पर आरोप लगे हैं कि वह बिना किसी दंड के कानून का बेजा इस्तेमाल कर रही है। अशरफ बलोच ने कहा कि दुर्भाग्यवश पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य देश है।
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पाकिस्तान में लापता लोगों की रिहाई की मांग कर रही बलोच महिलाओं को कराची की सड़कों पर पुलिस ने सारी हदें पार करते हुए घसीटा। इस क्रूरता पर मानवाधिकार कार्यकर्ता अशरफ बलोच ने कहा कि बाढ़-बारिश से त्रस्त यह तथाकथित इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान की तस्वीर है।
बता दें कि पाकिस्तान में बलोचिस्तानियों पर आए दिन अत्याचार और नागरिकों के जबरन गायब होने के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार पर आरोप लगे हैं कि वह बिना किसी दंड के कानून का बेजा इस्तेमाल कर रही है। अशरफ बलोच ने कहा कि दुर्भाग्यवश पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का सदस्य देश है। उधर कनाडा स्थित थिंक टैंक इंटरनेशनल फोरम फॉल राइट्स एंड सिक्योरिटी (आईएफएफआरएएस) ने कहा कि विडंबना है कि पाकिस्तानी सरकारों ने जबरन गायब होने की प्रथा को खत्म करने का संकल्प लिया है लेकिन इसका कोई अंत नहीं है।
This is so called Islamic Republic of Pakistan.
— Ashraf Baloch (@imasbaloch) September 10, 2022
Baloch women being dragged on the streets of Karachi for demanding release of Baloch missing persons.
Unfortunately Pakistan is member of UN. pic.twitter.com/t2GsPII6jk
पांच से आठ हजार लोग गायब हुए
पाकिस्तान के सशस्त्र बलों पर अनुमानित रूप से 5,000 से 8,000 लोगों के गायब होने के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगा है। आईएफएफआरएएस के मुताबिक, लापता सूची में बलोचिस्तानी कार्यकर्ता सबसे ऊपर हैं। संगठन ने कहा, बलोचों को रोजगार व अन्य प्राकृतिक संसाधनों से भी दूर रखा गया है।
चीन का झटका : अधर में छोड़ी बिजली परियोजना
बिजली और ईंधन की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान को उसके मित्र देश चीन ने बड़ा झटका दिया है। चीनी इंजीनियरों व कर्मियों ने पीओके स्थित 969 मेगावाट की नीलम-झेलम जलविद्युत परियोजना की मरम्मत का काम जुलाई से ही बंद कर रखा है। इसका कारण क्षेत्र में परियोजना का बढ़ता विरोध बताया गया है। चीन का आरोप है कि पाकिस्तानी पुलिस उसके कर्मचारियों को सुरक्षा देने में विफल रही है। 508 अरब रुपये की इस परियोजना को लेकर चीन और पाक में गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं क्योंकि देश में बाढ़ के चलते गंभीर बिजली संकट है।