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पाकिस्तान और दुबई से जुड़े हैं पुलवामा आतंकी हमले की फंडिंग के तार

Mon, 25 Feb 2019 10:02 PM IST
Gaurav Pandey जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Gaurav Pandey Updated Mon, 25 Feb 2019 10:02 PM IST
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Pakistan and Dubai are linked to funding of pulwama terror attack
मसूद अजहर

पुलवामा में सीआरपीएफ काफिले पर हुए आतंकी हमले की कड़ियां अब जुड़ने लगी हैं। जांच एजेंसियों को यह पता चला है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के गुर्गों को हवाला के जरिए पाकिस्तान और दुबई से आर्थिक सहायता मिल रही थी। इसके लिए कथित तौर पर कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की मदद ली गई। विदेश से आने वाला पैसा इन्हीं नेताओं के खातों में जाता था। बाद में उस पैसे को विभिन्न संगठनों के नाम पर आतंकियों तक पहुंचाया जा रहा था। जांच एजेंसी का दावा है कि जल्द ही ऐसे लोग बेनकाब होंगे।

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बता दें कि पुलवामा हमले की विभिन्न स्तरों पर जांच चल रही है। इसमें सेना, लोकल पुलिस और एनआईए के अलावा वित्तीय जांच एजेंसियां भी शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि पिछले साल एनआईए ने कश्मीर घाटी में आतंकी फंडिंग के मामले में जो चार्जशीट दाखिल की थी, उसमें कश्मीरी अलगाववादियों का नाम सामने आया था। इनमें कई कारोबारी भी थे जो रुपयों का लेन-देन और उसे आगे बढ़ाने के मामले में अलगाववादियों की मदद कर रहे थे।
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आफताब हिलाली शाह उर्फ शाहिद-उल-इस्लाम, अयाज अकबर खांडे, फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे, नईम खान, अल्ताफ अहमद शाह, राजा महराजुद्दीन कलवाल और बशीर अहमद भट उर्फ पीर सैफुल्लाह पर आपराधिक साजिश और भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने के आरोप लगे थे। इनके अलावा जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियों को प्रायोजित करने और पथराव करने वालों के लिए पाकिस्तान से धन प्राप्त करने का आरोप भी लगाया गया था।
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अल्ताफ अहमद शाह हार्डलाइन हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी के दामाद हैं, जो पाकिस्तान के साथ जम्मू-कश्मीर के विलय की वकालत करते हैं। इस्लाम उदारवादी हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारूक का करीबी सहयोगी है। खांडे गिलानी के नेतृत्व वाले हुर्रियत के प्रवक्ता हैं।

कश्मीर घाटी में अलगाववादियों और आतंकी गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने के लिए काम करने के आरोपी कारोबारी जहूर अहमद शाह वटाली को पिछले साल 17 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। वह कथित रूप से पाकिस्तान से धन इकट्ठा कर रहा था।

पुलवामा मामले में भी कई अलगाववादी नेता जांच एजेंसी के निशाने पर

सूत्रों का कहना है कि पुलवामा हमले को अंजाम देने वाले आदिल डार और उसके साथियों, जिनकी संख्या करीब छह-सात है, को भी आर्थिक मदद पहुंचाई गई थी।आरडीएक्स और दूसरे विस्फोटकों को लाना, गाड़ी का इंतजाम व अन्य मदद, इन सब कामों के लिए जो पैसा खर्च हुआ, वह पाकिस्तान व दुबई से पहुंचा था। यह पैसा हवाला के जरिए लाया गया है। इसमें लोकल पुलिस की मदद से जांच एजेंसी ने प्रारंभिक तौर पर 37 अलगाववादी नेताओं के बैंक खाते चैक किए हैं।

एक स्थानीय बैंक के अलावा जिन एजेंसियों के जरिए विदेशों से धन मंगाया जाता है, उनसे भी पूछताछ चल रही है। इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि पुलवामा हमला और उससे पहले जैश के सदस्यों को समय-समय पर अलगाववादी व कुछ दूसरे स्थानीय कारोबारी आर्थिक मदद पहुंचा रहे थे।

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