{"_id":"66c84f579e2e16ed9308eee9","slug":"paite-hmar-mlas-object-to-use-of-kuki-zo-in-social-media-manipur-news-in-hindi-2024-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Manipur: पाइते-हमार विधायकों ने 'कुकी-जो' शब्द के इस्तेमाल पर जताई चिंता, कहा- हमारी पहचान को ठेस पहुंचती है","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Manipur: पाइते-हमार विधायकों ने 'कुकी-जो' शब्द के इस्तेमाल पर जताई चिंता, कहा- हमारी पहचान को ठेस पहुंचती है
Fri, 23 Aug 2024 03:00 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंफाल
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 23 Aug 2024 03:00 PM IST
सार
कुकी और जोमी ऐसे शब्द हैं जिनका उपयोग संबंधित प्रथाओं और पहचानों को साझा करने वाली विभिन्न उप-जनजातियों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। ब्रिटिश शासन में 19वीं और 20वीं सदी नें कुकी शब्द बहुत ज्यादा प्रचलित था।
विज्ञापन
social media new
- फोटो : istock
विस्तार
मणिपुर में पाइते और हमार समुदाय के तीन विधायकों ने सोशल मीडिया और प्रेस के बयान में 'कुकी-जो' शब्द के इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह उनकी जनजाति का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता है। इससे उनकी विशिष्ट पहचान के सम्मान को भी ठेस पहुंचती है।
शुक्रवार को जारी एक बयान में तिपाईमुख विधायक एन. सनाटे ने कहा, "मैं अपने लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैंने कभी भी किसी भी मंच, संगठन या बयान का समर्थन नहीं किया है और न ही करूंगा, जो हमार की पहचान को मिटा दें।"
थानलॉन विधायक वुंगजागिन वाल्टे ने कहा, "कुकी-जो शब्द का इस्तेमाल करने वालों को मेरे समुदाय के लोग गैर-समावेशी मानते हैं। मैं ऐसे शब्द का समर्थन नहीं करूंगा जो मेरे निर्वाचन क्षेत्र के सभी समूहों का सम्मान न करता हो।" वाल्टे ने बताया कि वह जोमि समुदाय के पाइते अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे शब्दों को बढ़ावा देने का आग्रह किया जो उनके साझा इतिहास और आकांक्षाओं को एकजुट करता है।
विज्ञापन
बता दें कि कुकी और जोमी ऐसे शब्द हैं जिनका उपयोग संबंधित प्रथाओं और पहचानों को साझा करने वाली विभिन्न उप-जनजातियों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। ब्रिटिश शासन में 19वीं और 20वीं सदी नें कुकी शब्द बहुत ज्यादा प्रचलित था। जबकि, जोमी भारत, म्यांमार और बांग्लादेश में कुछ कुकी-चिन भाषा बोलने वालों द्वारा अपनाई गई एक पहचान है। जोमी आमतौर पर कुकी और चिन के लेबल को अस्वीकार करते हैं।
विज्ञापन
शुक्रवार को जारी एक बयान में तिपाईमुख विधायक एन. सनाटे ने कहा, "मैं अपने लोगों की आकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि मैंने कभी भी किसी भी मंच, संगठन या बयान का समर्थन नहीं किया है और न ही करूंगा, जो हमार की पहचान को मिटा दें।"
विज्ञापन
थानलॉन विधायक वुंगजागिन वाल्टे ने कहा, "कुकी-जो शब्द का इस्तेमाल करने वालों को मेरे समुदाय के लोग गैर-समावेशी मानते हैं। मैं ऐसे शब्द का समर्थन नहीं करूंगा जो मेरे निर्वाचन क्षेत्र के सभी समूहों का सम्मान न करता हो।" वाल्टे ने बताया कि वह जोमि समुदाय के पाइते अनुसूचित जनजाति से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे शब्दों को बढ़ावा देने का आग्रह किया जो उनके साझा इतिहास और आकांक्षाओं को एकजुट करता है।
विज्ञापन
बता दें कि कुकी और जोमी ऐसे शब्द हैं जिनका उपयोग संबंधित प्रथाओं और पहचानों को साझा करने वाली विभिन्न उप-जनजातियों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। ब्रिटिश शासन में 19वीं और 20वीं सदी नें कुकी शब्द बहुत ज्यादा प्रचलित था। जबकि, जोमी भारत, म्यांमार और बांग्लादेश में कुछ कुकी-चिन भाषा बोलने वालों द्वारा अपनाई गई एक पहचान है। जोमी आमतौर पर कुकी और चिन के लेबल को अस्वीकार करते हैं।