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सीबीआई और ईडी की दलील: चिदंबरम जांच में नहीं कर रहे सहयोग, हिरासत में लेने की जरूरत
Fri, 25 Jan 2019 08:44 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Fri, 25 Jan 2019 08:44 PM IST
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पी चिदंबरम
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हाईकोर्ट ने पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) तथा बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सीबीआई और ईडी का कहना है कि चिदंबरम पर बेटे के साथ मिलकर भ्रष्टाचार करने का आरोप है। वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत है, इसलिए उनकी याचिका खारिज कर गिरफ्तार करने की अनुमति दी जाए।
न्यायमूर्ति सुनील गौड़ के समक्ष चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कहा, इस मामले की एफआईआर में चिदंबरम का नाम नहीं है। चिदंबरम के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है क्योंकि एजेंसी ने उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति सरकार से ले ली है। सरकार आरोप पत्र पर विचार के बाद ही अनुमति देती है। चिदंबरम सीबीआई के समक्ष एक व ईडी के सामने तीन बाद पेश हो चुके हैं।
सीबीआई व ईडी की ओर से पेश सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की अनुमति देने में भ्रष्टाचार का आरोप है। इस पर सिबल व अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, मामला 2007 का है। तब धनशोधन निवारण अधिनियम नहीं था।
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) डी भी नहीं थी। संशोधन 2009 में हुए, इसलिए चिदंबरम के खिलाफ मनी लांड्रिंग व भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता। जब मामला नहीं बनता तो फिर सीबीआई चिदंबरम को क्यों गिरफ्तार करना चाहती है।
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न्यायमूर्ति सुनील गौड़ के समक्ष चिदंबरम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कहा, इस मामले की एफआईआर में चिदंबरम का नाम नहीं है। चिदंबरम के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है क्योंकि एजेंसी ने उन पर मुकदमा चलाने की अनुमति सरकार से ले ली है। सरकार आरोप पत्र पर विचार के बाद ही अनुमति देती है। चिदंबरम सीबीआई के समक्ष एक व ईडी के सामने तीन बाद पेश हो चुके हैं।
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सीबीआई व ईडी की ओर से पेश सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड की अनुमति देने में भ्रष्टाचार का आरोप है। इस पर सिबल व अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, मामला 2007 का है। तब धनशोधन निवारण अधिनियम नहीं था।
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भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) डी भी नहीं थी। संशोधन 2009 में हुए, इसलिए चिदंबरम के खिलाफ मनी लांड्रिंग व भ्रष्टाचार का मामला नहीं बनता। जब मामला नहीं बनता तो फिर सीबीआई चिदंबरम को क्यों गिरफ्तार करना चाहती है।