फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   P C Sorcar The magician of India who scared Britain

भारत का वो जादूगर जिसने ब्रिटेन को डरा दिया

Mon, 04 Jun 2018 12:44 PM IST
बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Updated Mon, 04 Jun 2018 12:44 PM IST
विज्ञापन
P C Sorcar The magician of India who scared Britain
पीसी सरकार - फोटो : BBC
9 अप्रैल, 1956 की शाम 9 बजकर 15 मिनट पर अचानक ही बीबीसी के दफ्तर में एकाएक सैकड़ों लोग फोन करने लगे। फोन करने वालों को यकीन था कि उन्होंने अपनी आंखों से टीवी स्क्रीन पर एक कत्ल होते हुए देखा था।
विज्ञापन


टीवी स्क्रीन पर रहस्यमयी से दिख रहे एक जादूगर ने 17 साल की लड़की को अपने वश में करके एक मेज पर लिटा दिया। इसके बाद इस जादूगर ने एक आरी से कुछ इस तरह इस लड़की के शरीर के दो टुकड़े कर दिए जैसे कि वह कसाई की मेज पर पड़ा हुआ मांस का टुकड़ा हो।
विज्ञापन


ये उन दिनों की बात है जब टीवी पर पैनोरामा नाम का एक चर्चित कार्यक्रम आया करता था। इसी कार्यक्रम की आखिरी कड़ी में लोगों ने इस जादूगर को अपना करतब दिखाते हुए देखा लेकिन लोगों को ऐसा लगा कि कोई बड़ी गड़बड़ हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्योंकि जादूगर ने जैसे ही अपनी सहयोगी को मेज से उठाने के लिए उसके हाथों को मलना शुरू किया लेकिन उसकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। ऐसे में उसने अपने सिर को नीचे झुकाते हुए अपनी सहयोगी के चेहरे पर एक काला कपड़ा डाल दिया।

जादूगर के ऐसा करते ही कार्यक्रम के प्रस्तोता रिचर्ड डिंबलबाय ने कैमरे के सामने आकर कहा कि अब कार्यक्रम खत्म होता है।

इसके तुरंत बाद लाइम ग्रोव स्टूडियो में एक के बाद एक कई फोन आना शुरू हो गए। 

पश्चिमी दुनिया में कैसे पहुंचे सरकार?

P C Sorcar The magician of India who scared Britain
सरकार के लिए पश्चिमी देशों में जादूगरी के क्षेत्र में अपनी जगह बनाना बेहद संघर्षपूर्ण था। तीन हफ्ते के सीजन के लिए ड्यूक ऑफ यॉर्क थिएटर को आरक्षित कराया गया था। लेकिन इस सीजन के टिकटों की बिक्री अब तक बेहद कम थी।

ऐसे में चर्चित कार्यक्रम पैनोरामा की आखिरी कड़ी में पहुंचना अपने आप में खेल बदलने जैसा फैसला था और वह इस मौके का भरपूर फायदा उठाना चाहते थे।

पैनोरामा कार्यक्रम को इस तरह अचानक खत्म किए जाने पर आधिकारिक स्पष्टीकरण भी दिया गया। लेकिन इस स्पष्टीकरण में कहा गया कि सरकार ने उन्हें मिली समयसीमा को पार कर दिया था।

लेकिन सरकार के विरोधी भी ये बात स्वीकार करते थे कि सरकार की टाइमिंग बेहद शानदार थी।

ऐसे में अपनी सहयोगी दिप्ती डे को एक आरी से काटकर मेज पर छोड़ देना हाथ की सफाई का एक बेमिसाल नमूना था।

इस घटना के अगले दिन अखबारों में सरकार और उनका ये करतब प्रमुखता से छाया हुआ था। इसके बाद ड्यूक ऑफ यॉर्क में आयोजित होने वाला उनका सीजन के सारे टिकट तेजी से बिक गए। 

बंगाल में पैदा हुए थे सरकार 

P C Sorcar The magician of India who scared Britain
सरकार का जन्म बंगाल (मौजूदा बांग्लादेश) के टांगाइल जिले के अशेकपुर गांव में 23 फरवरी, 1913 को प्रोतुल चंद्र सरकार के रूप में हुआ था।

पढ़ाई करते हुए उन्होंने गणित में महारथ हासिल कर ली थी। कई लोग उन्हें एक जन्मजात प्रतिभा के नाम से भी पुकारते थे। लेकिन सरकार का दिल जादूगरी में लगता था।

सरकार ने अपना आखिरी नाम सरकार से बदलकर सॉरसर कर लिया जो कि अंग्रेजी भाषा के सॉरसरर यानी जादूगर की आवाज से मिलता-जुलता था। इसके बाद उन्होंने क्लबों, सर्कसों और थिएटरों में अपना जादू दिखाना शुरू कर दिया।

लेकिन बंगाल के कुछ शहरों के परे अभी भी लोग उनसे अपरिचित ही थे। ऐसे में उन्होंने अपने आप को दुनिया का सबसे महान जादूगर कहना शुरू कर दिया। उनकी ये चतुराई काम कर गई। इसके बाद देश भर में से कई जगहों से उनके पास निमंत्रण आने लगे।

लेकिन अंतर्राष्ट्रीय जगत में अपनी जगह बनाना अभी भी एक मुश्किल काम था। पश्चिमी दुनिया के जादूगर अभी भी भारतीय जादूगरों को अकुशल मानते थे।

इसी समय सरकार ने सावधानी पूर्वक द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत आकर सैन्य टुकड़ियों का मनोरंजन करने वाले अमरीकी जादूगरों के साथ मेलजोल बढ़ाना शुरू किया। उन्होंने इनके बारे में जादूगरी क्षेत्र से जुड़ी पत्रिकाओं में लेख लिखने शुरू किए। 

जब अमरीका पहुंचे पी सी सरकार 

P C Sorcar The magician of India who scared Britain
साल 1950 में सरकार अमरीकी जादूगर समाज की ओर से आए बुलावे पर शिकागो में अपना जादू दिखाने के लिए तैयार हो गए।

इसके बाद जब वह शर्मन होटल के कंवेंशन हॉल से बाहर निकले तो वहां मौजूद दर्शकों और पत्रकारों ने उन्हें ऐसी प्रतिक्रिया दी कि जैसे वह मशहूर कहानी अरेबियन नाइट्स के पन्नों से बाहर निकलकर आ गए हों।

लेकिन उनका पहला शो आईलैस साइट निराशाजनक रहा। इस शो में उन्हें आंखों पर पट्टी बांधकर ब्लैकबोर्ड पर लिखी हुई चीजों को पढ़ना था। मगर बात यहीं नहीं थमी।

इसके बाद उन्होंने उस दौर के दो सबसे चर्चित जादूगरों पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया।

जादूगरी के क्षेत्र से जुड़ी पत्रिका जेनी के संपादक सैमुअल पैट्रिक स्मिथ याद करते हैं उनके इस आरोप से सभी लोग सन्न रह गए।

वो कहते हैं, "अमरीका में इस तरह से व्यवहार नहीं किया जाता था। लेकिन ये बयान आने के बाद जादूगरी की दुनिया दो हिस्सों में बंट गई। एक तरफ सरकार के समर्थक थे तो दूसरी ओर उनके विरोधी।"

विवादों से भरा रहा करियर 

सरकार द्वारा खुद को दुनिया का सबसे महान जादूगर कहने की हिम्मत करना भी कई लोगों द्वारा सबसे बड़े धोखे के रूप में देखा गया।

ऐसे में जब लोगों को उनकी जादूगरी पर शक हुआ तो इससे सरकार का ही फायदा हुआ क्योंकि बॉक्स ऑफिस पर उनके शो हिट हो रहे थे।

सरकार का प्रचार तंत्र भी बेजोड़ था। जादूगरी के क्षेत्र से जुड़ी पत्रिकाएं और अखबार उनके काम की सकारात्मक समीक्षाओं से भरे हुए होते थे। इनमें शानदार तस्वीरों और पोस्टरों की भरमार हुआ करती थी।

लेकिन ये सब कुछ अभी भी ग्लैमर तक ही सीमित था। श्वेत एंग्लो-सेक्सन जादूगरों के प्रभुत्व वाले इस क्षेत्र में अभी भी उन्हें एक बाहरी व्यक्ति माना जा रहा था।

साल 1955 में हुआ कुछ खास 

P C Sorcar The magician of India who scared Britain
कलानग के नाम से स्टेज पर जादू दिखाने वाले और कभी हिटलर के पसंदीदा जादूगर रहे हेलमट एवाल्ड स्क्रिवर ने 1955 में सरकार पर उनकी तरकीबों को चुराने का आरोप लगाया।

इसके बाद जर्मन जादूगर के खिलाफ और सरकार के पक्ष में कई जादूगर खड़े हो गए।

इन जर्मन जादूगर को याद दिलाया गया कि उन्होंने अपनी राष्ट्रीयता छुपाई है और जिन तरकीबों को लेकर उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया था, वह भी चोरी की हैं या मांगी हुई हैं।

आज सरकार को उनके इंद्रजाल या द मैजिक ऑफ इंडिया शो के लिए जाना जाता है जिसे 1955 में पेरिस में आयोजित किया गया था। इस टूर पर सरकार अपने साथ कई सहयोगियों, अलग-अलग किस्मों के जादू और ज्यादा उपकरणों के साथ गए।

इस कार्यक्रम ने उन अपेक्षाओं को बदलकर रख दिया जो पश्चिमी देशों के दर्शक किसी भारतीय जादूगर से रखते थे।

थिएटरों को ताजमहल जैसा बनाया जाता था। यही नहीं, शो में आने वाले दर्शकों का स्वागत सर्कस के हाथी अपनी रंगी हुई सूड़ उठाकर करते थे।

कार्यक्रम का प्रस्तुतीकरण भी बेहद शानदार था जिसमें कई तरह के बैकड्रॉप, कई बार कॉस्ट्यूम का बदला जाना, शानदार लाइटिंग शामिल थी।

लेकिन सरकार के करियर का टर्निंग प्वॉइंट पैनोरामा कार्यक्रम में उनका सनसनीखेज शो था। हालांकि, उन दिनों में टेलीविजन अपने शुरुआती दौर में था लेकिन सरकार इतने अक्लमंद थे कि उन्होंने इसका फायदा उठा लिया। सरकार की तरह किसी भी जादूगर ने इस माध्यम का इतना सफलतापूर्वक इस्तेमाल नहीं किया था।

अनसुनी की डॉक्टरों की सलाह 

P C Sorcar The magician of India who scared Britain
पीसी सरकार - फोटो : BBC
सरकार अपने स्टेज इफेक्ट्स और खास अंदाज की बदौलत दूसरे कई जादूगरों से कहीं आगे निकल गए। उन्होंने भारतीय जादू को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया।

साल 1970 में डॉक्टरों ने उन्हें ट्रेवल नहीं करने की सलाह दी। लेकिन इसके बावजूद सरकार अपने चार महीने के कार्यक्रम के लिए जापान रवाना हो गए।

छह जनवरी, 1970 को सरकार ने होक्काइडो द्वीप के शिबेत्सू शहर में अपना इंद्रजाल शो किया। लेकिन स्टेज छोड़कर बाहर निकलते ही जानलेवा दिल के दौरे ने उनकी जान ले ली। सरकार को दुनिया के कई सम्मानित जादूगरों द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। 

जादू की दुनिया का इतिहास लिखने वाले डेविड प्राइस कहते हैं कि जादू की दुनिया में भारत को पश्चिमी दुनिया के जादूगरों से टक्कर लेने के लिए एक महान जादूगर की जरूरत थी और सरकार का शुक्रिया क्योंकि उनकी वजह से भारतीय जादू ने दुनिया में अपनी जगह बनाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed