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ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय: 100 वर्ष पहले दाखिला भी नहीं, अब आधे से अधिक छात्राएं

Fri, 16 Oct 2020 07:06 AM IST
Kuldeep Singh अमर उजाला रिसर्च टीम
अमर उजाला रिसर्च टीम Published by: Kuldeep Singh Updated Fri, 16 Oct 2020 07:06 AM IST
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Oxford University: Not even a hundred years ago, now more than half of the students
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में महिला विद्यार्थियों को डिग्री और पूर्ण सदस्यता प्रदान करने के लिए 100 वर्ष इसी महीने पूरे हुए हैं। खास बात यह है कि इन 100 वर्षों में विश्वविद्यालय में महिला विद्यार्थियों की मौजूदगी 50 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है। पिछले दो सत्र से यहां के स्नातक पाठ्यक्रमों में छात्राओं की संख्या छात्रों के मुकाबले अधिक है।

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1920 में मिला था लड़कियों को पूर्ण सदस्य बनने व डिग्री पाने का अधिकार
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने 7 अक्तूबर 1920 को छात्रों छात्राओं को पहली बार पूर्ण सदस्यता देने की घोषणा की थी। इसके एक हफ्ते बाद छात्राओं को डिग्री पाने वाली वाला भी दिया गया। इस वजह से वर्ष 1870 से 1920 तक यहां से बड़ी छात्राओं ने विश्वविद्यालय पहुंचकर अपनी डिग्रियां हासिल की।
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इस महत्वपूर्ण बदलाव के सौ वर्ष पूरे होने पर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय ने शताब्दी का इतिहास बनाती महिलाएं नाम से अभियान शुरू किया है। पूरे अकादमी वर्ष इस अहम उपलब्धि को यादगार बनाने के लिए विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में कई आयोजनों में होने जा रहे हैं। इनमें छात्र व स्टाफ और आम नागरिक तो शामिल हो ही रहे हैं। ऐसे लोगों को विशेष सम्मान दिया जा रहा है जिन्होंने कभी पूरी तरह पुरुषों से भरी रहने वाले इस विश्वविद्यालय में परिवर्तन के लिए योगदान दिया।
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महिलाओं के अधिकार मिलने के सौ वर्ष पर होंगे आयोजन
विश्वविद्यालय में लैंगिक समानता की यात्रा को दर्शाते चार्ट बनाए जाएंगे। इनमें सौ वर्ष में आए बदलाव को दर्शाया जाएगा। कई विद्वानों के व्याख्यान भी होंगे। विश्वविद्यालय में महिला इतिहास पर हिलेरी क्लिंटन चेयर स्थापित की गई है, जिसके जरिए विश्वविद्यालय के महिला इतिहास पर काम शोध और बदलावों में भूमिका को दर्शाया जाएगा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रिचर्ड्सन सौवीं वर्षगांठ को गर्व का बताया।


आधुनिक इतिहास के प्रोफेसर सोनिया ने बताया 1920 में छात्राओं को पूर्ण सदस्यता पाने के लिए लंबा अभियान और संघर्ष करना पड़ा था। यह वर्षगांठ आज भी विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं और पुरुषों के बीच में समानता के लिए पूरे प्रयास करने का संकल्प लेने का मौका है।
 

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