स्वामित्व योजना: गांवों में किसानों को मकान बनवाने के लिए बैंको से मिलेगा लोन
-केन्द्र सरकार गांवों को देनी जा रही है नई सौगात
-संपत्ति कार्ड के स्वामियों की बदलेगी तकदीर, घटेंगे विवाद
-नए प्रधान के पास आएगा पुराने प्रधान के कामकाज का रिकॉर्ड
-पहली बार आबादी की जमीन का होगा दस्तावेजीकरण
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पहली बार केन्द्र सरकार देश के गांवों में आबादी से लेकर सार्वजनिक जमीनों का रिकॉर्ड दुरुस्त रखने के साथ-साथ लोगों को जमीन के स्वामित्व को निर्धारित करने वाला संपत्ति कार्ड देने की तैयारी कर चुकी है। इसका फायदा यह होगा कि किसानों को गांवों में अपना मकान बनवाने के लिए भी बैंकों से लोन मिल सकेगा।
केंद्र के इस महत्वपूर्ण कदम के फायदे बताते हुए केंद्रीय पंचायती राज सचिव सुनील कुमार ने बताया कि यह संपत्ति कार्ड मिलने के बाद गांव के लोगों, किसानों को मकान बनवाने के लिए बैंक से लोन मिल सकता है। इससे उनकी संपत्ति के मूल्यांकन को भी प्रामाणिकता मिलेगी और भविष्य में राजस्व से जुड़े मुकदमों में भी भारी कमी आएगी।
यह योजना दूरगामी असर डालेगी। इससे गांव में मेड़, नाली, खरंजा, सार्वजनिक हैंड पंप, स्कूल समेत सभी की भू-स्थिति को प्रमाणिकता मिलेगी। पंचायतीराज स्तर पर सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार रोका जा सकेगा। इतना ही नहीं नए चुनकर आने वाले ग्राम प्रधान और पंचायत प्रतिनिधियों को पुराने ग्राम प्रधान आदि के द्वारा कराए गए कामकाज का सीधा ब्यौरा मिल जाएगा। इसके लिए उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा।
बजट 2021-22 में भी स्वामित्व योजना के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्री ने 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। पंचायती राज मंत्रालय के बजट में भी 32 प्रतिशत (913.43 करोड़) की वृद्धि हुई है। सुनील कुमार के अनुसार 2021-22 के बजट में राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान का बजट बढ़ाकर 593 करोड़ (18.6 प्रतिशत अधिक) किया गया है। इससे 2.55 लाख ग्राम पंचायतों को मजबूती देने में सहायता मिलेगी।
स्वामित्व योजना बदलेगी देश का नक्शा
पंचायती राज सचिव ने कहा कि सबसे महत्वर्ण कदम स्वामित्व योजना है। इसके जरिए गांव, गांव वासियों, जिले के राजस्व विभाग और प्रदेश सरकार को जमीन, जायदाद से जुड़ा एक सटीक आंकड़ा दिया जा सकेगा। इससे गांव के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में सहूलियत होगी तथा सार्वजनिक भूमि आदि को लोगों के अतिक्रमण, तरह-तरह के अनियमित कार्यों से बचाया जा सकेगा। पंचायतों की जमीनों को सुरक्षित रखा जा सकेगा। ऐसा ड्रोन से हवाई मैपिंग के जरिए महज छह हजार रुपये प्रति गांव खर्च करके किया जा सकेगा। इसकी प्रामाणिकता भी सर्वे ऑफ इंडिया की रहेगी।
पहले चरण में एक लाख गांवों का सर्वे
पंचायती राज सचिव के अनुसार इसके पहले चरण में हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उ.प्र., उत्तराखंड, आंध्रप्रदेश, पंजाब और राज्य के सीमावर्ती जिलों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके अंतर्गत करीब एक लाख गांव आएंगे। इसके लिए म.प्र., हरियाणा, राजस्थान, पंजाब में 210 सीओआरएस नेटवर्क स्थापित किए जाने हैं। 95 के करीब सीओआरएस नेटवर्क नमामि गंगे परियोजना के तहत स्थापित हैं और 2022 तक कुल 567 सीओआरएस नेटवर्क स्थापित करने की योजना है। सुनील कुमार कहते हैं कि यह नेटवर्क स्थापित होने के बाद यथा शीघ्र पूरे देश के जमीन, जायदाद, गांव आदि की वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
लोग पहुंचें गांव और जताएं आबादी, मकान पर अपना मालिकाना हक
पंचायती राज सचिव ने कहा कि उनकी लोगों से अपील है कि जब उनके क्षेत्र में ड्रोन से सर्वे हो रहा हो तो उन्हें अपने गांव में पहुंचना चाहिए। वहां अपनी जमीन पर मालिकाना हक पाने, आबादी पर अपना हक जताने में सहयोग देना चाहिए। यह पूरी पैमाइश जीपीएस के सहयोग से ड्रोन के माध्यम से सर्वे द्वारा की जाएगी। इसमें राज्य सरकार की सहमति होगी और राज्य सरकार का राजस्व विभाग सहयोगी भूमिका में रहेगा। ऐसा पहली बार होगा जब गांवों में आबादी आदि की प्रामाणिक जानकारी मिल सकेगी। लोगों का उस पर स्वामित्व तय हो सकेगा।