Karnataka: बंगलूरू में 100 से अधिक आईटी कर्मचारियों का प्रदर्शन, काम और जीवन संतुलन की मांग
Karnataka: केआईटीयू के आह्वान पर बंगलूरू में 100 से अधिक कर्मचारी एकत्र हुए और आईटी क्षेत्र में स्वस्थ काम-जीवन संतुलन की मांग की। कर्मचारियों ने आईटी उद्योग की कार्य संस्कृति और उसका मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों के खिलाफ आवाज उठाई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कर्नाटक राज्य आईटी कर्मचारी संघ (केआईटीयू) के आह्वान पर सौ से अधिक कर्मचारी रविवार को बंगलूरू के फ्रीडम पार्क में एकत्र हुए और उन्होंने आईटी क्षेत्र में स्वस्थ काम-जीवन संतुलन की मांग की। केआईटीयू के सलाहकार वसंतराज ने कहा कि बंगलूरूर को तकनीकी केंद्र के रूप में देखते हुए कम से कम छह हजार लोगों को इस प्रदर्शन में भाग लेना चाहिए था, लेकिन इसको अपेक्षा से कम समर्थन मिला।
वसंतराज ने कहा, सचाई यह है कि आईटी उद्योग के मालिक डॉलर में विनिमय दर के साथ मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन काम करने वालों को परेशान कर रहे हैं। पिछले तीन दशकों में आईटी उद्योग को एक उत्पाद निर्माता बन जाना चाहिए था, लेकिन यह अभी भी एक सेवा उद्योग बना हुआ है।
केआईटीयू के सदस्य राम ने कहा, यह प्रदर्शन हाल ही में इन्फोसिस प्रमुख नारायण मूर्ति और एलएंडटी के प्रबंध निदेशक एस.एन. सुब्रमण्यम की ओर से कर्मचारियों को दोषी ठहराए जाने के खिलाफ था। उन्होंने कहा था कि कर्मचारियों के कारण ही इस क्षेत्र ने मूल्य श्रृंखला (वैल्यू चेन) में प्रगति नहीं की। राम ने कहा, वे काम के घंटों को बढ़ाने की बात कर रहे हैं, जैसे कि इससे समस्या का समाधान हो जाएगा। लेकिन घंटे बढ़ाने से उत्पादकता नहीं बढ़ती है। उनके बयानों के विरोध में हम सब ने अपनी आवाज उठाई है और काम-जीवन संतुलन की पैरवी की है।
वहीं, केआईटीयू के महासचिव सुहास आडिगा ने बताया कि हाल के वर्षों में आईटी उद्योग की तीव्र कार्यशैली ने कर्मचारियो के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला है, इसलिए इसकी आलोचना की जा रही है। उन्होंने कहा, कई अध्ययन और सर्वेक्षण बताते हैं कि लंबे कामकाजी घंटे आईटी कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस क्षेत्र के सत्तर फीसदी से अधिक कर्मचारी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
आडिगा के मुताबिक, 13 मार्च 2024 को श्रम मंत्री को एक ज्ञापन सौंपा गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आईटी कंपनियां ओवरटाइम काम के वेतन का भुगतान नहीं कर रही हैं और काम के घंटे कानूनी सीमा से अधिक बढ़ा रही हैं। संगठन ने सरकार से वास्तविक कामकाजी घंटों और ओवरटाइम काम के भुगतान की जांच करने का आग्रह किया था।उन्होंने आरोप लगाया, एक साल से अधिक समय तक कई बैठकें और विरोध प्रदर्शन के बावजूद सरकार ने श्रम कानूनों को कड़ाई से लागू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
संबंधित वीडियो-
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.