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Ovarian Cancer: महिलाओं में होने वाला सबसे खतरनाक कैंसर, शुरुआती चरण में स्पष्ट नहीं होते इसके लक्षण
Sun, 15 Feb 2026 05:36 AM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 15 Feb 2026 05:36 AM IST
सार
Ovarian Cancer: ओवेरियन कैंसर घातक इसलिए है क्योंकि इसका पता अक्सर तब चलता है जब यह पेट में फैल चुका होता है। एक शोध के अनुसार, कैंसर कोशिकाएं मेसोथीलियल कोशिकाओं के साथ 'हाइब्रिड' समूह बनाकर ऊतकों में तेजी से घुसपैठ करती हैं और कीमोथेरेपी से भी बच निकलती हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट-
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ओवेरियन कैंसर
- फोटो : Freepik.com
विस्तार
ओवेरियन कैंसर को स्त्री रोगों से जुड़ा सबसे घातक कैंसर माना जाता है, क्योंकि अधिकांश मामलों में इसका पता तब चलता है जब यह पूरे पेट में फैल चुका होता है। अब जापान की नागोया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने इस तेज प्रसार के पीछे छिपे जैविक रहस्य का खुलासा किया है।
साइंस एडवांसेज में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार कैंसर कोशिकाएं अकेले नहीं फैलतीं, बल्कि वे पेट की गुहा की सुरक्षात्मक मेसोथीलियल कोशिकाओं को अपने साथ जोड़कर ‘हाइब्रिड’ समूह बनाती हैं, जो ऊतकों में तेजी से घुसपैठ करते हैं और कीमोथेरेपी का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करते हैं। ओवेरियन कैंसर महिलाओं में होने वाले स्त्रीरोग संबंधी कैंसरों में मृत्यु दर के लिहाज से सबसे ऊपर है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते और अधिकांश रोगियों का निदान तब होता है जब कैंसर पहले ही पेट की गुहा में व्यापक रूप से फैल चुका होता है। नागोया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस रहस्य को सुलझाने का प्रयास किया और पाया कि कैंसर कोशिकाएं शरीर की सामान्य सुरक्षात्मक कोशिकाओं को अपने पक्ष में कर लेती हैं। सामान्य धारणा यह थी कि कैंसर कोशिकाएं इस तरल में स्वतंत्र रूप से तैरती हैं, लेकिन अध्ययन में पाया गया कि वे अक्सर अकेली नहीं होतीं। वे मेसोथीलियल कोशिकाओं से चिपककर ठोस, मिश्रित गोलाकार समूह बनाती हैं।
इनवाडोपोडिया : ऊतक में घुसपैठ का हथियार
अध्ययन में पाया गया कि इसी तैरते चरण के दौरान कैंसर कोशिकाएं पेट की परत से झड़ चुकी मेसोथीलियल कोशिकाओं को अपने साथ जोड़ लेती हैं। दोनों मिलकर हाइब्रिड स्फीयर्स बनाते हैं। इसके बाद मेसोथीलियल कोशिकाएं इनवाडोपोडिया नामक नुकीली संरचनाएँ विकसित करती हैं। ये संरचनाएं ड्रिल की तरह काम करती हैं और आसपास के ऊतकों में छेद कर देती हैं। जब ये हाइब्रिड स्फीयर्स किसी अंग की सतह तक पहुंचते हैं, तो वे साधारण कैंसर कोशिकाओं की तुलना में अधिक तेजी से ऊतक में प्रवेश करते हैं।
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ये भी पढ़ें: Supreme Court: 'वकील साहब, मत जाइए, आपकी जरूरत पड़ेगी', सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पारदीवाला ने क्यों कही ये बात?
एक मरीज की कहानी से शुरू हुआ शोध
डॉ. उनो ने शोध में आने से पहले आठ वर्ष तक स्त्रीरोग विशेषज्ञ के रूप में काम किया। एक मरीज का अनुभव उनके करियर की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। उस महिला की स्क्रीनिंग रिपोर्ट तीन महीने पहले तक सामान्य थी, लेकिन बाद में उसमें उन्नत चरण का ओवेरियन कैंसर पाया गया। मौजूदा डायग्नोस्टिक उपकरण समय रहते बीमारी का पता नहीं लगा सके और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। वर्तमान कीमोथेरेपी दवाएं मुख्यतः कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं, लेकिन वे मेसोथीलियल कोशिकाओं को नहीं रोकतीं, जो घुसपैठ में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
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साइंस एडवांसेज में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार कैंसर कोशिकाएं अकेले नहीं फैलतीं, बल्कि वे पेट की गुहा की सुरक्षात्मक मेसोथीलियल कोशिकाओं को अपने साथ जोड़कर ‘हाइब्रिड’ समूह बनाती हैं, जो ऊतकों में तेजी से घुसपैठ करते हैं और कीमोथेरेपी का अधिक प्रभावी ढंग से सामना करते हैं। ओवेरियन कैंसर महिलाओं में होने वाले स्त्रीरोग संबंधी कैंसरों में मृत्यु दर के लिहाज से सबसे ऊपर है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शुरुआती चरण में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते और अधिकांश रोगियों का निदान तब होता है जब कैंसर पहले ही पेट की गुहा में व्यापक रूप से फैल चुका होता है। नागोया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस रहस्य को सुलझाने का प्रयास किया और पाया कि कैंसर कोशिकाएं शरीर की सामान्य सुरक्षात्मक कोशिकाओं को अपने पक्ष में कर लेती हैं। सामान्य धारणा यह थी कि कैंसर कोशिकाएं इस तरल में स्वतंत्र रूप से तैरती हैं, लेकिन अध्ययन में पाया गया कि वे अक्सर अकेली नहीं होतीं। वे मेसोथीलियल कोशिकाओं से चिपककर ठोस, मिश्रित गोलाकार समूह बनाती हैं।
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इनवाडोपोडिया : ऊतक में घुसपैठ का हथियार
अध्ययन में पाया गया कि इसी तैरते चरण के दौरान कैंसर कोशिकाएं पेट की परत से झड़ चुकी मेसोथीलियल कोशिकाओं को अपने साथ जोड़ लेती हैं। दोनों मिलकर हाइब्रिड स्फीयर्स बनाते हैं। इसके बाद मेसोथीलियल कोशिकाएं इनवाडोपोडिया नामक नुकीली संरचनाएँ विकसित करती हैं। ये संरचनाएं ड्रिल की तरह काम करती हैं और आसपास के ऊतकों में छेद कर देती हैं। जब ये हाइब्रिड स्फीयर्स किसी अंग की सतह तक पहुंचते हैं, तो वे साधारण कैंसर कोशिकाओं की तुलना में अधिक तेजी से ऊतक में प्रवेश करते हैं।
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एक मरीज की कहानी से शुरू हुआ शोध
डॉ. उनो ने शोध में आने से पहले आठ वर्ष तक स्त्रीरोग विशेषज्ञ के रूप में काम किया। एक मरीज का अनुभव उनके करियर की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। उस महिला की स्क्रीनिंग रिपोर्ट तीन महीने पहले तक सामान्य थी, लेकिन बाद में उसमें उन्नत चरण का ओवेरियन कैंसर पाया गया। मौजूदा डायग्नोस्टिक उपकरण समय रहते बीमारी का पता नहीं लगा सके और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। वर्तमान कीमोथेरेपी दवाएं मुख्यतः कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाती हैं, लेकिन वे मेसोथीलियल कोशिकाओं को नहीं रोकतीं, जो घुसपैठ में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।