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ऑर्गनाइजर के 80 साल पूरे: उपराष्ट्रपति बोले- प्रेस के सही जानकारी देने और सवाल पूछने से मजबूत होता है लोकतंत्र
Fri, 03 Jul 2026 11:42 PM IST
अमन तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 03 Jul 2026 11:42 PM IST
सार
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने ऑर्गनाइजर के 80 साल पूरे होने पर प्रेस की आजादी को लोकतंत्र के लिए जरूरी बताया। उन्होंने आपातकाल और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर पत्रिका के योगदान की सराहना की। इस दौरान उन्होंने भारत के सामाजिक-राजनीतिक विकास पर आधारित दो नई किताबें भी जारी कीं।
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सीपी राधाकृष्णन, उपराष्ट्रपति
- फोटो : ANI
विस्तार
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित किया। यह कार्यक्रम आरएसएस के मुखपत्र 'ऑर्गनाइजर' के 80 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित हुआ। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब प्रेस जनता को सही जानकारी दे, सवाल पूछे और बहस को बढ़ावा दे। उन्होंने जोर दिया कि प्रेस को अपनी विश्वसनीयता और तथ्यों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए।
साहस और जिम्मेदारी पर जोर
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रेस की आजादी तभी सार्थक है जब इसका इस्तेमाल साहस और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। उन्होंने 'ऑर्गनाइजर' की 80 साल की लंबी यात्रा की प्रशंसा की। उन्होंने इसे सार्वजनिक चर्चा के प्रति एक निरंतर प्रतिबद्धता बताया और राष्ट्रीय घटनाओं में इसकी ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आजाद भारत में स्वतंत्र प्रेस के विकास में 1949 में सेंसरशिप के खिलाफ इसकी कानूनी लड़ाई को एक अहम मोड़ बताया।
आपातकाल और राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका
उपराष्ट्रपति ने आपातकाल के दौरान 'ऑर्गनाइजर' और 'द मदरलैंड' अखबार की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि इन प्रकाशनों ने संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुख्य केंद्र के रूप में काम किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर, चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वदेशी और राम जन्मभूमि आंदोलन जैसे गंभीर मुद्दों पर पत्रिका के सक्रिय जुड़ाव की भी चर्चा की।
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ये भी पढ़ें: Ethanol Blending: ई20 पेट्रोल को लेकर फैली अफवाहों की आखिर क्या है सच्चाई? सरकार ने दिया हर सवाल का जवाब
दो नई किताबों का विमोचन
इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने दो किताबें भी जारी कीं। पहली किताब 'हिंदुत्व डिस्कोर्स आफ्टर इंडिपेंडेंस- रीडिंग विद ऑर्गनाइजर पेजेस' है। (जिसे उन्होंने भारत के सामाजिक और राजनीतिक विकास का एक मूल्यवान अभिलेखीय रिकॉर्ड बताया) और दूसरी किताब का नाम 'टेम्पल्स बियॉन्ड' भारत है।
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साहस और जिम्मेदारी पर जोर
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रेस की आजादी तभी सार्थक है जब इसका इस्तेमाल साहस और जिम्मेदारी के साथ किया जाए। उन्होंने 'ऑर्गनाइजर' की 80 साल की लंबी यात्रा की प्रशंसा की। उन्होंने इसे सार्वजनिक चर्चा के प्रति एक निरंतर प्रतिबद्धता बताया और राष्ट्रीय घटनाओं में इसकी ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने आजाद भारत में स्वतंत्र प्रेस के विकास में 1949 में सेंसरशिप के खिलाफ इसकी कानूनी लड़ाई को एक अहम मोड़ बताया।
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आपातकाल और राष्ट्रीय सुरक्षा में भूमिका
उपराष्ट्रपति ने आपातकाल के दौरान 'ऑर्गनाइजर' और 'द मदरलैंड' अखबार की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि इन प्रकाशनों ने संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुख्य केंद्र के रूप में काम किया। उन्होंने जम्मू-कश्मीर, चीन और पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वदेशी और राम जन्मभूमि आंदोलन जैसे गंभीर मुद्दों पर पत्रिका के सक्रिय जुड़ाव की भी चर्चा की।
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दो नई किताबों का विमोचन
इस कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने दो किताबें भी जारी कीं। पहली किताब 'हिंदुत्व डिस्कोर्स आफ्टर इंडिपेंडेंस- रीडिंग विद ऑर्गनाइजर पेजेस' है। (जिसे उन्होंने भारत के सामाजिक और राजनीतिक विकास का एक मूल्यवान अभिलेखीय रिकॉर्ड बताया) और दूसरी किताब का नाम 'टेम्पल्स बियॉन्ड' भारत है।