{"_id":"663428f993e82fbf77006573","slug":"organ-donation-reduced-due-to-neglect-of-brain-dead-in-hospitals-only-one-donor-per-10-lakh-population-2024-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"लापरवाही: अस्पतालों में ब्रेन डेड की अनदेखी के कारण अंगदान कम, 10 लाख की आबादी पर केवल एक दाता","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
लापरवाही: अस्पतालों में ब्रेन डेड की अनदेखी के कारण अंगदान कम, 10 लाख की आबादी पर केवल एक दाता
Fri, 03 May 2024 05:30 AM IST
निर्मल कांत
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 03 May 2024 05:30 AM IST
सार
Organ Donation: नोटो ने साफ तौर पर कहा है कि आईसीयू में तैनात डॉक्टर की पहली जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों की पहचान करे जो ब्रेन डेड हैं या हो सकते हैं। उनके परिजनों से काउंसलर के साथ बातचीत करें और उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित करें।
विज्ञापन
अंग प्रत्यारोपण (सांकेतिक)
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सरकार ने लगातार प्रयास के बाद भी अंगदान में कमी के लिए अस्पतालों में ब्रेन डेड की अनदेखी को जिम्मेदार माना है। हालात ऐसे हैं कि देश में अभी 10 लाख की आबादी पर एक ही दाता मिल रहा है। यह स्थिति तब है जब अकेले सड़क हादसों में ही ब्रेन स्टेम से होने वाली मौतों की संख्या सालाना 1.50 लाख है।
विज्ञापन
यह खुलासा राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने सभी राज्य सरकारों को भेजे पत्र में किया है। नाराजगी जताते हुए उन्होंने लिखा कि अस्पतालों में कई संभावित मामलों की उपलब्धता के बावजूद ब्रेन स्टेम डेड (बीएसडी) के मामलों की खराब पहचान और प्रमाणीकरण हो रहा है। बीएसडी को सामान्य तौर पर ब्रेन डेड या मस्तिष्क मृत्यु भी कहा जाता है। ब्रेन स्टेम दिमाग का निचला हिस्सा होता है जो रीढ़ की हड्डी से जुड़ा होता है। बीएसडी स्थिति में मरीज के शरीर और आंखों की पुतलियों की क्रिया बंद हो जाती है। हालांकि, हृदय व बाकी अंग जीवित होते हैं। 1994 में पारित मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (टीएचओए) के तहत ब्रेन डेड के मरीजों के अंगों को परिवार की मंजूरी के बाद दान किया जा सकता है। अस्पतालों की इस अनदेखी को दूर करने के लिए डॉ. अनिल ने देशभर में नियमित तौर पर ब्रेन स्टेम डेथ मामलों की निगरानी का आदेश दिया है।
विज्ञापन
आईसीयू में कार्यरत डॉक्टर की पहली जिम्मेदारी
नोटो ने साफ तौर पर कहा है कि आईसीयू में तैनात डॉक्टर की पहली जिम्मेदारी है कि वह ऐसे मामलों की पहचान करे जो ब्रेन डेड हैं या हो सकते हैं। उनके परिजनों से काउंसलर के साथ बातचीत करें और उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित करें। राज्य सरकारों के साथ नोटो ने 17 बिंदु का एक फार्म भी साझा किया है, जिसे हर दिन अस्पताल प्रबंधन को भरना होगा और महीने के अंत में इसे साझा करना होगा। फॉर्म में आईसीयू रोगियों से लेकर मृत्यु, वेंटिलेटर और इस्तेमाल में आने वाले टिश्यू तक की जानकारी शामिल है। साथ ही अस्पतालों को अब नियमित तौर पर दान में मिलने वाले अंगों में से इस्तेमाल होने वालों की सूचना भी साझा करनी होगी।
विज्ञापन
अस्पतालों का सहयोग मिलना जरूरी : नीति आयोग...
नीति आयोग की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सुमना अरोड़ा का मानना है कि अंगदान को बढ़ाने के लिए अस्पतालों का सहयोग मिलना बहुत जरूरी है। अस्पतालों में ब्रेन स्टेम मृत्यु घोषणाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। सरकार जागरूकता के साथ-साथ अंगों को हवाई, रेल, मेट्रो रेल से निर्बाध रूप से लाने जाने का प्रयास कर रही है।
अनदेखी का परिणाम, 30 साल बाद एक हजार मिले दाता...
नोटो के मुताबिक, भारत में 1994 से अधिनियम लागू है, लेकिन 1994 से 2024 के बीच 30 साल में पहली बार 2023 में एक साल में 1,092 ब्रेन डेड से अंग प्राप्त हुए हैं। 2013 में 340, 2014 में 408, 2015 में 666, 2016 में 930, 2017 में 773, 2018 में 875, 2019 में 715, 2020 में 351, 2021 में 552 और 2022 में 941 ब्रेन डेड मामलों की सूचना अस्पतालों से मिली।