मानसून सत्र में कश्मीर और अरुणाचल पर केंद्र को घेरने की तैयारी में विपक्ष
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विपक्षी पार्टियों ने मानसून सत्र के लिए अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। केंद्र सरकार की सदन चलाने में सहयोग की अपील का असर हुआ है। लेकिन कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष कश्मीर के हालात के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराते हुए तल्ख विरोध का मन बना चुका है।
अरुणाचल प्रदेश में सुप्रीम कोर्ट के आदेश से सरकार की बहाली के बाद लोकतंत्र की हत्या का मामला दोनों सदनों में गूंज सकता है। कांग्रेस इन मुद्दों पर राज्यसभा में जोरदार हंगामे की रणनीति तय कर चुकी है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद और उपनेता आनंद शर्मा ने सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात कर वित्त मंत्री अरुण जेटली से हुई बातचीत का ब्योरा दिया है। जेटली ने जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) बिल पारित करने में सहयोग की अपील की थी।
कांग्रेस के सूत्रों के मुताबिक, सरकार की नरमी के बाद अब कांग्रेस इस मुद्दे पर सकारात्मक रुख अपनाने का मन बना रही है। दरअसल कांग्रेस को छोड़कर सभी प्रमुख दलों ने जीएसटी बिल के लिए समर्थन दे दिया है। ऐसे में कांग्रेस खुद को अलग-थलग साबित होने से बचना चाहती है। 18 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में जीएसटी विधेयक पारित हो सकता है।
जीएसटी पर केंद्र ने कांग्रेस की मांग पर एक प्रतिशत अतिरिक्त कर के प्रावधान को समाप्त करने का निर्णय ले लिया है। सिर्फ बीस प्रतिशत के अधिकतम कर को संविधान संशोधन में शामिल करने के मुद्दे पर जिद थी। अब इसे संबंधित दस्तावेजों में शामिल करने के आश्वासन पर कांग्रेस सहमत दिख रही है।
सूत्रों की मानें तो जीएसटी को सर्वसम्मति से पारित कराने का सर्वमान्य फार्मूला बन चुका है। कांग्रेस अब इसमें रोड़े अटकाने के मूड में नहीं है लेकिन अन्य मुद्दों पर कांग्रेस राज्यसभा में सरकार को कठघरे में खड़ा करने की रणनीति को अमल में लाएगी। अरुणाचल के मुद्दे पर शुरुआती दिनों में राज्यसभा हंगामे का साक्षी बन सकती है।
सरकार की उपलब्धियों के जश्न पर टकराव के मूड में है विपक्ष
विपक्ष दो साल की उपलब्धियों पर सरकार को घेरने के मूड में है। पूरे देश में जिस तरह दो साल की उपलब्धियों का जश्न मनाया गया, उस पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को आपत्ति है। कांग्रेस और वामपंथी दलों के अलावा सपा, बसपा और जदयू जैसे दल भी सरकार के दो साल को विफल करार दे रहे हैं। देश के कई हिस्सों में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के कोशिशों पर भी कांग्रेस और विपक्षी दल सरकार को घेरेंगे।
कांग्रेस महंगाई पर चर्चा कराना चाहती है। पिछले दिनों टमाटर से लेकर चने दाल तक की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का मुद्दा सदन के दोनों सदनों में उठेगा। प्रधानमंत्री के विदेश दौरे और एनएसजी का मुद्दा भी दोनों सदनों में गूंज सकता है।
एनएसजी की सदस्यता के लिए भारत की ओर से की गई लाबिंग की विफलता को कांग्रेस रेखांकित करने वाली है। कांग्रेस इसे विदेश नीति और कूटनीतिक विफलता मानती है। कांग्रेस का तर्क है कि इस तरीके की लाबिंग की जरूरत ही नहीं थी। इस कदम से दुनिया में बेवजह भारत की फजीहत हुई है।