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सांसदों का सरकार पर तंज, कहा- हम विधेयक पास कर रहे हैं या पिज्जा डिलीवरी

Thu, 01 Aug 2019 09:47 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Thu, 01 Aug 2019 09:47 AM IST
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opposition members asks government that are we delivering pizzas or passing bills in parliament
गुलाम नबी आजाद (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

राज्यसभा से तीन तलाक विधेयक पास होने के बाद विपक्षी पार्टियों कांग्रेस सहित टीएमसी, सीपीएम, सीपीआई, आरजेडी और डीएमके के नेताओं ने सोमवार रात को विधेयक के सूचीबद्ध होने के तरीके पर विरोध जताया है। इसे राज्यसभा से मंगलवार को पास किया गया है। विपक्षी नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि उन्हें अपने सांसदों को व्हिप जारी करने का समय नहीं मिला जिससे कि वह सदन में मौजूद रह सकें। इसी कारण उन्हें बिल का विरोध करने के लिए पर्याप्त संख्या मौजूद नहीं थी। 

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शून्यकाल में मामले को उठाते हुए आजाद ने कहा जब विपक्ष आरटीआई संशोधन विधेयक का विरोध कर रही थी तब सरकार ने हमसे पूछा कि वह किन विधेयकों को सिलेक्ट कमिटी के पास भेजना चाहते हैं। आजाद ने कहा, 'उन्होंने हमें 23 बिलों की सूची दी थी। हम उसमें से आधों को कमेटी के पास भेजना चाहते थे। उन्होंने कहा जितना हो सके उतना कम करो। इसलिए विपक्ष ने छह विधेयकों को ए श्रेणी और 2 को बी श्रेणी के रूप में वर्गीकृत किया। मंगलवार को पेश हुए मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019) विधेयक और बुधवार को पेश हुए गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2019 को चयन समिति में जाने के लिए सूचीबद्ध किया गया था।'
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टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा, 'हमें आपकी सुरक्षा की जरूरत है। हम इन बिलों की जांच करना चाहते हैं। यदि सरकार के पास संख्या है तो वह विधेयक को पास करवा सकती है। लेकिन हमें संसद की अखंडता के लिए लड़ने दीजिए। संसद को विधेयकों की जांच करनी है। हम पिज्जा डिलीवर कर रहे हैं या विधेयकों को पास कर रहे हैं?'
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विपक्षी पार्टियों के आरोपों को खारिज करते हुए केंद्रीय मंत्री पाकाश जावड़ेकर ने कहा कि चेयर पहले ही कह चुका है कि पिछले दो सालों में 10 में से आठ विधेयकों को सिलेक्ट कमिटी के पास भेजा गया है। उन्होंने कहा, 'यह सरकार की मंशा दिखाता है। यूपीए सरकार के दौरान यूएपीए विधेयक को सिलेक्ट कमिटी के पास नहीं भेजा गया था।' राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने विपक्षी नेताओं को आश्वासन दिया है कि वह मामले की जांच करेंगे।

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