Opposition meet: इन चार राज्यों में कांग्रेस को करना होगा सबसे बड़ा सियासी बलिदान! कैसे हुआ सब कुछ 'ऑल इज वेल'
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विस्तार
राहुल गांधी के दाहिनी तरफ नीतीश कुमार और बाईं तरफ लालू यादव। सोनिया गांधी के एक तरफ खरगे और दूसरी और ममता बनर्जी। विपक्षी दलों की बेंगलुरु में शुरू हुई बैठक में यह तस्वीरें और बैठने की व्यवस्था कुछ ऐसी है, जिसके सियासत में अब जबरदस्त मायने निकाले जा रहे हैं। सियासी जानकारों का कहना है कि विपक्षी दलों की एकता में डांवाडोल स्थिति अरविंद केजरीवाल की मांग पर कांग्रेस के समर्थन न किए जाने से बन रही थी। लेकिन बैठक में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और सोनिया गांधी के अगल-बगल में होने के साथ ममता बनर्जी की पड़ी हुई बगल की कुर्सी यह इशारा कर रही है कि अब सब कुछ 'ऑल इज वेल' हो गया है। लेकिन इस ऑल इज वेल के फेर में पांच राज्यों में सबसे ज्यादा कांग्रेस के नेताओं को बड़ा सियासी बलिदान भी करना होगा। क्योंकि गठबंधन में कांग्रेस की सबसे बड़ी पार्टी है, जिसका देश के सभी राज्यों में विस्तार है। फिलहाल बैंगलोर की बैठक के बाद अगली कुछ बैठक और होनी है, जिसमें चुनाव लड़ने के फॉर्मूले पर बड़ी चर्चा होगी।
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बैठने से लेकर खड़े होने तक में बनाया गया संदेश देने का इंतजाम
कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हो रही विपक्षी दलों के नेताओं की बैठकों के एक-एक मिनट की योजना ऐसी बनाई गई कि उसका सियासी संदेश जमकर निकले। शुरुआत बेंगलुरु में डिनर और उससे पहले होने वाली बैठक से हुई। इस बैठक में जो तस्वीर सामने आई है, उसमें राहुल गांधी और सोनिया गांधी के आस पास बैठे हुए नेताओं से गठबंधन की तस्वीर के साथ साथ उसकी तासीर भी दिखी। सोनिया गांधी के दाहिनी ओर जहां ममता बनर्जी बैठी दिखीं, वहीं राहुल गांधी के बाईं ओर लालू यादव और दाहिनी ओर नीतीश कुमार दिखे। लालू यादव के बगल में अरविंद केजरीवाल, उनके बगल में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नजर आए। जबकि अखिलेश यादव के बगल में एक ओर जयंत चौधरी, तो चौधरी के बगल में ही बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी बैठे दिखे। तेजस्वी के बगल में ही महबूबा मुफ्ती और उनके पास पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बैठे दिखे। राजनीतिक जानकारों का कहना है यह उन राज्यों के नेताओं की वह तस्वीरें हैं, जहां पर उनका दावा सियासी गठबंधन में बड़ा माना जा रहा है।
ममता और केजरीवाल से मिला यह बड़ा संदेश
सियासी जानकारों का कहना है कि नेताओं के बैठने की जो व्यवस्था की गई है, उससे पता चलता है कि राहुल और सोनिया इस गठबंधन में सबसे महत्वपूर्ण क्यों है। वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि बैठक के दौरान जिस तरह से राहुल गांधी के अगल-बगल में बिहार के दो बड़े नेता लालू यादव और नीतीश कुमार बैठे हैं, वह बताता है कि सियासी गठबंधन में नीतीश और लालू की कितनी भूमिका होने वाली है। इसी तरह पश्चिम बंगाल की नेता ममता बनर्जी की कुर्सी भी सोनिया गांधी के बिल्कुल दाहिनी ओर थी। शुक्ला कहते हैं कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की अगल-बगल बैठने का संदेश स्पष्ट है कि गठबंधन में पड़ने वाली गांठों को सुलझा लिया गया है। इस बैठक में ही अरविंद केजरीवाल और सोनिया गांधी की भी तस्वीर सामने आई है। राजनीतिक विश्लेषक जटाशंकर सिंह कहते हैं कि गठबंधन में सबसे बड़ा पेंच आम आदमी पार्टी और कांग्रेस की आपसी समझौते को लेकर मच रहा था। सिंह कहते हैं कि जिस तरह कांग्रेस ने ऑर्डिनेंस मामले में आम आदमी पार्टी के समर्थन की बात कही है उससे बहुत हद तक सियासी अदावत खत्म होने जैसा ही लग रहा है।
पंजाब, प. बंगाल, यूपी और दिल्ली में कांग्रेस नेताओं का कटेगा टिकट
बैठक में शामिल सूत्रों के मुताबिक जल्द ही सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला भी तय किया जाएगा। बैठक में शिरकत कर रहे वरिष्ठ नेता बताते हैं कि हालांकि सबसे बड़ा पेंच अभी सीटों के बंटवारे को लेकर होना बाकी है। इसमें पंजाब, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर बड़ा मंथन किया जाना है। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार जीडी शुक्ला कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकारें हैं। उत्तर प्रदेश में विपक्ष के नाम पर समाजवादी पार्टी और आरएलडी मजबूत स्थिति में है। इसलिए इन तीन राज्यों में कांग्रेस के नेताओं को बड़े सियासी बलिदान के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा बड़ी सियासत दिल्ली में भी होनी है। दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के चलते कांग्रेस के नेताओं को यहां भी बड़े समझौते करने पड़ सकते हैं। बैठक में शामिल सूत्रों का कहना है कि ऐसे ही मामलों पर सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला जल्द ही तय कर लिया जाएगा। बिहार में इस वक्त कांग्रेस के साथ गठबंधन में सरकार चल रही है। इसलिए वहां पर अन्य राज्यों की तुलना में यह स्थिति नहीं होने वाली है। इसी तरह महाराष्ट्र में भी महाविकास आघाडी गठबंधन पहले से बना हुआ है।
कांग्रेस तो अभी भी है केंद्र में
विपक्षी नेताओं की बैठकों में जिस तरीके की सामने तस्वीरें आ रही हैं, उससे एक बात तो स्पष्ट हो रही है कि अभी भी केंद्र में कांग्रेस ही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कहते हैं कि कांग्रेस प्रधानमंत्री पद की बिल्कुल इच्छुक नहीं है। खरगे ने कहा कि हम मानते हैं कि हमारे बीच राज्य स्तर पर कुछ मतभेद हैं, लेकिन यह मतभेद वैचारिक नहीं हैं। यह मतभेद इतने बड़े भी नहीं हैं कि आम आदमी, गरीब, युवाओं और मध्यम वर्ग के लिए हम इन्हें भुलाकर आगे नहीं बढ़ सकते। 26 पार्टियां साथ हैं और 11 राज्यों में हम सबकी सरकार है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस की ओर से आए इस बयान से फिलहाल गठबंधन में जुड़ने वाले नेताओं की बड़ी दुविधा तो खत्म होती हुई नजर आ रही है।