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Reservation Bill: BRS सांसद की मांग- संसद में पेश किया जाए महिला आरक्षण विधेयक, विपक्षी नेताओं ने किया समर्थन

Wed, 15 Mar 2023 09:15 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 15 Mar 2023 09:15 PM IST
सार

बैठक में चर्चा के दौरान कविता ने कहा कि उनका और उनकी पार्टी बीआरएस का दृढ़ विश्वास है कि महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ-साथ 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' पर भी काम किया जाना चाहिए।

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Opposition leaders support BRS MP Kavithas demand for tabling of Womens Reservation Bill in Parliament
महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्षी दलों की बैठक - फोटो : ट्विटर/कविता कलवकुंतला

विस्तार

भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की सांसद के. कविता की ओर से अहम बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 13 विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में सभी ने सर्वसम्मति से संसद के मौजूदा बजट सत्र में महिला आरक्षण विधेयक पेश करने की मांग की। समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सहित कुछ दलों ने मांग की कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करने वाले कानून में पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जातियों की महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए।

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बैठक में चर्चा के दौरान कविता ने कहा कि उनका और उनकी पार्टी बीआरएस का दृढ़ विश्वास है कि महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ-साथ 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' पर भी काम किया जाना चाहिए। पिछले दिनों सपा और राजद ने मांग की थी कि विधेयक में पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए कोटा होना चाहिए।
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बैठक में भाकपा सांसद बिनय विश्वम, द्रमुक सांसद टी सुमति, सपा सांसद एसटी हसन, झामुमो सांसद महुआ मांजी, राजद सांसद मनोज झा, शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी, आप सांसद राघव चड्ढा और आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन शामिल हुए। चर्चा में भाग लेते हुए हसन और झा दोनों ने लोकसभा में महिलाओं के लिए 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' की मांग उठाई।
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हसन ने कहा, हम महिला आरक्षण विधेयक का पूरी तरह समर्थन करते हैं, लेकिन इस आरक्षण के भीतर पिछड़ी, अनुसूचित जाति की महिलाओं के लिए आरक्षण होना चाहिए। सम्मेलन में शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि संविधान के संस्थापक वोट देने के अधिकार के साथ ही महिलाओं के प्रतिनिधित्व में विश्वास करते हैं। उन्होंने दावा किया कि कई प्रासंगिक विषयों पर महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा गया है।

कविता ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि देश और समाज के समग्र विकास और वृद्धि के लिए महिलाओं को निर्णय लेने में बड़ी भूमिका दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस मंच से संदेश स्पष्ट है कि राजनीतिक दल, विशेष रूप से विपक्ष के लोग महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन में हैं और यह मौजूदा सरकार है जो कोई पहल नहीं कर रही है। पिछले सप्ताह कविता संसद के मौजूदा बजट सत्र में इस विधेयक पेश करने की मांग को लेकर यहां जंतर मंतर पर एक दिन की भूख हड़ताल पर बैठी थीं।

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