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नोटबंदी पर आज राष्ट्रपति का दरवाजा खटखटा सकता है विपक्ष
अमर उजाला ब्यूरो/ नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Dec 2016 05:49 AM IST
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प्रणब मुखर्जी
- फोटो : PTI
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संसद की शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन से नोट बंदी के सवाल पर सरकार और विपक्ष के बीच जारी तल्खी और बढने के आसार हैं। बुधवार को लोकसभा में आयकर संशोधन बिल को पारित कराने के तरीके पर नाराज विपक्ष राष्ट्रपति से मिलने की योजना बना रहा है। संभव है कि गुरूवार को कई विपक्षी दल राष्टï्रपति से मुलाकात कर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलामनबी आजाद के साथ कई विपक्षी दलों ने बैठक कर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने पर अपनी सहमति दी है। गौरतलब है कि आयकर संशोधन बिल को बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच ही पारित कर दिया गया था। राज्यसभा की मंजूरी की मजबूरी से बचने केलिए सरकार ने इसे मनी बिल के रूप में पेश किया था।
आजाद के साथ टीएमसी, सपा, बसपा, राजद सहित कुछ अन्य दलों के नेताओं की बैठक में तय किया गया कि पूरे मामले में राष्ट्रपति से मिल कर उनसे हस्तक्षेप की मांग की जाए। विपक्ष के नेताओं के बीच गुरूवार को ही राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने पर भी सहमति थी।
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हालांकि खबर लिखे जाने तक इस पर अंतिम फैसला तो नहीं हुआ था मगर ज्ञापन तैयार हो गया था। ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 117 और 274 के हवाला देते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। गौरतलब है कि शीत सत्र के पहले ही दिन से इस मुद्दे पर जारी टकराव के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्रवाई ठप है।
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राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलामनबी आजाद के साथ कई विपक्षी दलों ने बैठक कर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने पर अपनी सहमति दी है। गौरतलब है कि आयकर संशोधन बिल को बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे के बीच ही पारित कर दिया गया था। राज्यसभा की मंजूरी की मजबूरी से बचने केलिए सरकार ने इसे मनी बिल के रूप में पेश किया था।
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आजाद के साथ टीएमसी, सपा, बसपा, राजद सहित कुछ अन्य दलों के नेताओं की बैठक में तय किया गया कि पूरे मामले में राष्ट्रपति से मिल कर उनसे हस्तक्षेप की मांग की जाए। विपक्ष के नेताओं के बीच गुरूवार को ही राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने पर भी सहमति थी।
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हालांकि खबर लिखे जाने तक इस पर अंतिम फैसला तो नहीं हुआ था मगर ज्ञापन तैयार हो गया था। ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 117 और 274 के हवाला देते हुए राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की गुहार लगाई गई है। गौरतलब है कि शीत सत्र के पहले ही दिन से इस मुद्दे पर जारी टकराव के कारण संसद के दोनों सदनों की कार्रवाई ठप है।