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Hindi News ›   India News ›   Opportunity to IAS officers who do not give property details, will open portal for two months to file IPR

अवसर : संपत्ति का ब्योरा न देने वाले आईएएस अफसरों को मौका, आईपीआर दाखिल करने के लिए दो महीने तक खोलेगा पोर्टल

Sun, 03 Jul 2022 05:28 AM IST
योगेश साहू महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली।
महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 03 Jul 2022 05:28 AM IST
सार

2021 में एक्ट में संशोधन के बाद आईपीआर दाखिल करने की व्यवस्था में सुधार हुआ। मगर, यह पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो सका। इस नई व्यवस्था के बाद अफसरों को बहाने की गुंजाइश नहीं बचेगी।

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Opportunity to IAS officers who do not give property details, will open portal for two months to file IPR
document - फोटो : pixabay

विस्तार

केंद्र 2011 या उसके बाद किसी वर्ष आईपीआर दाखिल न करने वालों के लिए दो सरकार ने वर्ष 2011 या उसके बाद किसी भी वर्ष चल संपत्ति का ब्योरा (आईपीआर) न देने वाले आईएएस अधिकारियों को इसके लिए एक विशेष अवसर देने का फैसला किया है। आईएएस अधिकारी 15 जुलाई से 14 सितंबर के बीच छूटे वर्षों से संबंधित संपत्ति का ब्योरा दाखिल कर सकेंगे।

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इसके बाद समय से संपत्ति का ब्योरा न देने वाले अफसरों की पदोन्नति पर विचार नहीं होगा। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक केंद्र सरकार ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (वेतन) नियम, 2016 में वर्ष 2021 में संशोधन किया था।
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इसमें वेतन मैट्रिक्स में वेतन के अगले स्तर में नियुक्ति (स्तरोन्नयन व पदोन्नति) पर विचार के लिए गत वर्ष से संबंधित अचल संपत्ति का विवरण अगले वर्ष 31 जनवरी तक फाइल करना अनिवार्य कर दिया था। इस व्यवस्था का कड़ाई से पालन नहीं हो पा रहा था और तमाम अधिकारी बार-बार के निर्देश के बावजूद इसे नजरंदाज कर आईपीआर दाखिल नहीं कर रहे थे।
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केंद्र ने अब इस व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने के लिए आईपीआर का ब्योरा देने से छूटे समस्त आईएएस अधिकारियों को एकमुश्त आखिरी अवसर देने का फैसला किया है। मंत्रलाय में अनुसचिव कुलदीप चौधरी ने समस्त राज्यों के मुख्य सचिवों को इस संबंध में केंद्र के निर्णय की जानकारी भेज दी है।

मुख्य सचिवों से आग्रह किया गया है कि वे समस्त कार्यरत आईएएस अधिकारियों को सरकार के निर्णय व समयसीमा के बारे में जानकारी उपलब्ध करा दें। गौर करने वाली बात ये है कि 2011 से 2022 के बीच संपत्ति का लेखाजोखा न देने वाले तमाम आईएएस अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं और कई की मृत्यु हो चुकी है।


इस छूट के बाद हर अफसर पर रहेगी निगाह
2021 में एक्ट में संशोधन के बाद आईपीआर दाखिल करने की व्यवस्था में सुधार हुआ। मगर, यह पूरी तरह से प्रभावी नहीं हो सका। इस नई व्यवस्था के बाद अफसरों को बहाने की गुंजाइश नहीं बचेगी। आगे समय से आईपीआर दाखिल न करने पर न सिर्फ वे पदोन्नति से वंचित होंगे बल्कि उनकी छवि भी शक के दायरे में होगी।

यूपी में समय पर आईपीआर दाखिल न करने वाले अफसरों की संख्या

वर्ष संख्या
2011 69
2012 77
2013 98
2014 101
2015 120
2016 143
2017 79
2018 99
2019 96
2020 63
2021 64
2022 35
स्रोत- डीओपीटी

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