फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Opinion of agricultural economist on the return of agricultural laws Ashok Gulati said train of agricultural reforms derailed

कृषि कानूनों की वापसी पर कृषि अर्थशास्त्री की राय: अशोक गुलाटी बोले- बैलगाड़ी से चलने वाले को स्पीड नहीं चाहिए

Sat, 20 Nov 2021 06:57 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Sat, 20 Nov 2021 06:57 AM IST
सार

कानूनों की वापसी को दुर्भाग्यपूर्ण और पंजाब और यूपी चुनावों से प्ररित मानते हुए अशोक गुलाटी कहते हैं, शायद ही आगे कोई सरकार इसके लिए साहस जुटा पाए और इसमें किसान ही सफर करेगा।

विज्ञापन
Opinion of agricultural economist on the return of agricultural laws Ashok Gulati said train of agricultural reforms derailed
गाजीपुर बॉर्डर पर खुशी का इजहार करते किसान - फोटो : ANI

विस्तार

कृषि कानूनों की वापसी को कृषि अर्थशास्त्री कृषि सुधारों की गाड़ी पटरी से उतरना मानते हैं। वरिष्ठ कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी कहते है कि जो बैलगाड़ी से चल रहा है, उसे तेज गति नहीं चाहिए। खेती में जो जैसे चल रहा है अब वैसे ही चलता रहेगा।

विज्ञापन


कानूनों की वापसी को दुर्भाग्यपूर्ण और पंजाब और यूपी चुनावों से प्ररित मानते हुए अशोक गुलाटी कहते हैं, शायद ही आगे कोई सरकार इसके लिए साहस जुटा पाए और इसमें किसान ही सफर करेगा। सरकार को चाहिए कि आज की तारीख में एमएसपी के मसले को राज्यों पर छोड़ देना चाहिए। अब वो जो चाहे करें।  
विज्ञापन


बीएचयू के पूर्व कृषि अर्थशास्त्री डॉ. चंद्रसेन भी कहते हैं, जो इस समय चल रहा है, इसमें बड़े किसान तो फायदा उठाएंगे, लेकिन छोटे किसान मारे जाएंगे। कानून बनने से छोटे किसानों को ज्यादा फायदा होता। सरकारी केंद्रों पर अनाज सड़ाने की घपलेबाजी होती है। यह तभी रुक सकता था, जब निजी क्षेत्र आगे आते। अभी भी निजी क्षेत्र को स्टोरेज के लिए आगे किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


भारत को खेती को लाभकारी बनाने के लिए चीन और जापान से सीखने की सलाह देते हुए डॉ. चंद्रसेन कहते हैं, चीन और जापान में खेती में कम लोग हैं, उद्योगों में ज्यादा लोग हैं। खेती से लोगों को बाहर लाना होगा, तभी देश की तरक्की होगी। जब देश की औसत जोत बढ़ेगी, तभी देश विकास करेगा।

आईआईएम अहमदाबाद के कृषि अर्थशास्त्री प्रो. सुखपाल की राय इससे अलग है। कानूनों के डिजाइन में खामी बताते हुए इनकी वापसी को सही मानते हुए वह कहते हैं, इन कानूनों की ड्राफ्टिंग ही खराब थी। कानून वापसी बिल्कुल सही है, इसकी जरूरत ही नहीं थी। खेती राज्य का विषय थी इसमें केन्द्र को कूदना ही नहीं चाहिए था।

कानूनों की वापसी समाधान नहीं
कृषि कानूनों की वापसी भर को खेती की समस्या का हल नहीं मानते हुए प्रो. सुखपाल कहते हैं, “इसके लिए पॉलिसी पर ध्यान देना होगा। सरकार ने जो कमेटियां बनाने की बात कही है वो तो एक वर्किंग ग्रुप जैसा है। किसान को तुरंत लाभ चाहिए। इसके लिए एमएसपी पर कमेटी बनानी चाहिए थी। कृषि क्षेत्र की समस्याओं का समाधान आगे का विषय है। केन्द्र ऐसा कानून बनाए कि एपीएमसी एक्ट को कैसे प्रभावी से राज्य लागू करें?


प्रो. सुखपाल कहते हैं, अब किसान यूनियन राज्यों से बात करें कि वो क्या कर रहे हैं? न केन्द्र के पास कृषि पॉलिसी है न राज्यों के पास। एक दो राज्यों को छोड़कर। पंजाब में एग्रीकल्चर पॉलिसी तक नहीं है। साढे चार साल से ड्राफ्ट ही पड़ा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed