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ऑनलाइन कट्टरपंथ केस: एनआईए ने नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की, गुप्त संचार के लिए तैयार किया एप्लीकेशन
Fri, 18 Sep 2026 08:34 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 18 Sep 2026 08:34 PM IST
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NIA
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
एनआईए ने विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश की स्पेशल कोर्ट में 9 आरोपियों - मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ, मोहम्मद दानिश, मिर्ज़ा सोहेल बेग, लकी अहमद, जीशान अब्दुल मजीद, मीर आसिफ अली, अब्दुल सलाम, शाहरुख खान और शेख फैज-उर-रहमान - के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह कार्रवाई एनआईए केस नंबर RC-01/2026/NIA/VSKP (ऑनलाइन कट्टरपंथ मामला) के तहत भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61(2) (धारा 3(5) और 152 के साथ) और UA (P) एक्ट की धारा 13(1), 38 और 39 के तहत की गई है।
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यह मामला शुरू में केस नंबर 98/2026 (23 मार्च 2026) के तौर पर विजयवाड़ा टाउन पुलिस स्टेशन, एनटीआर कमिश्नरेट, विजयवाड़ा में दर्ज किया गया था। इसे भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 113(3), 152, 196(1)(a) और 196(2) (धारा 61(2) के साथ), इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 की धारा 66F और UA (P) एक्ट, 1967 की धारा 13, 18, 18A, 18B, 38 और 39 के तहत दर्ज किया गया था। अब तक इस मामले में 11 आरोपियों और कानून के साथ संघर्षरत एक नाबालिग को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी, जो प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के सदस्य और समर्थक हैं, ने आईएसआईएस की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी साजिश रची थी। मुख्य रूप से इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए, उनका मकसद हिंसक जिहाद के लिए भारत में खिलाफत कायम करना था। वे भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने की फिराक में थे।
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यह भी पता चला है कि आरोपियों ने भोले-भाले युवाओं को हिंसक आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाया और कट्टरपंथी बनाया। साथ ही विस्फोटक बनाने और हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग लेने की योजना भी तैयार की। इसी साजिश के तहत, हिंसक आतंकवादी गतिविधियों की तैयारी के दौरान आपस में गुप्त रूप से बातचीत करने के लिए आरोपियों ने एक सुरक्षित कम्युनिकेशन एप्लीकेशन भी बनाया और उसका परीक्षण किया।बाकी आरोपियों और अन्य संदिग्धों के खिलाफ मामले में आगे की जांच चल रही है।
Online Radicalization Case, NIA