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One Nation One Election: समिति ने संविधान समेत 18 कानूनी संशोधन के सुझाव दिए; एक साथ चुनाव के लिए और भी बदलाव

Thu, 14 Mar 2024 09:01 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Thu, 14 Mar 2024 09:01 PM IST
सार

एक देश-एक चुनाव की संभावनाओं पर विचार करने वाली समिति ने भारत के संविधान और कानूनों में 18 संशोधन के सुझाव दिए हैं। समिति ने कहा है कि देश में एक साथ चुनाव कराने के लिए कई और कानूनी बदलाव करने पड़ेंगे।

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One Nation One Election Ram Nath Kovind Panel 18 amendment in Constitution suggestion
कोविंद समिति ने संविधान के साथ-साथ देश में कुल 18 कानूनी संशोधनों का सुझाव दिया - फोटो : ani

विस्तार

'एक देश एक चुनाव' के मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में बनी समिति ने आज रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में समिति ने कहा है कि देश में एक साथ चुनाव कराने से पहले भारत के संविधान और कानूनों में कुल 18 संशोधन कराने पड़ेंगे। समिति ने सुझाव दिया है कि संविधान संशोधन के अलावा देश में कई और वैधानिक बदलाव भी करने पड़ेंगे। एक साथ विधानसभा और संसदीय चुनाव कराने की संभावनाओं पर उच्च स्तरीय समिति ने गुरुवार को कहा, पहले कदम के रूप में 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव कराने पर विचार किया जा सकता है।
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समिति ने संविधान के अनुच्छेद 324ए और अनुच्छेद 325 में बदलाव का परामर्श दिया 
सुझाए गए कानूनी बदलावों में स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए राज्य चुनाव आयोग (आयोगों) के परामर्श से मतदाता सूची तैयार से संबंधित संविधान के प्रावधान भी शामिल हैं। समिति ने संविधान के अनुच्छेद 325 में संशोधन का भी सुझाव दिया है।  समिति ने अनुच्छेद 324 ए में भी बदलाव का परामर्श दिया है। समिति ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए होने वाले आम चुनाव के साथ-साथ नगर पालिकाओं, पंचायत के चुनाव एक साथ कराने के लिए संवैधानिक प्रावधान में संशोधन की भी सिफारिश की है।
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इस अनुच्छेद में भी संशोधन का परामर्श, त्रिशंकु विधानसभा जैसी जटिल स्थिति में क्या?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 368 (2) के तहत, दूसरे संवैधानिक संशोधन विधेयक में संशोधन का सुझाव भी दिया गया है। इस फैसले को लागू करने के लिए कम से कम देश के आधे राज्यों का समर्थन जरूरी है। फिलहाल लागू संविधान के अनुसार ये मामले राज्य के मामलों से संबंधित हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि संवैधानिक मूल्य यह मानते हैं कि सार्वजनिक जीवन में शामिल लोग जरूरत पड़ने पर स्पष्ट बहुमत न मिलने जैसे अवसरों पर आगे आएंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश या राज्य की जनता के निष्पक्ष जनादेश के बाद एक निर्वाचित सरकार का गठन हो।
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