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एक देश, एक चुनाव: सुप्रीम कोर्ट से प्रस्तावित बैठक रद्द, जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी बोले- मुद्दे का तूल न दें
Mon, 05 Oct 2026 06:02 PM IST
देवेश त्रिपाठी
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 05 Oct 2026 06:02 PM IST
सार
एक देश, एक चुनाव पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति के सुप्रीम कोर्ट दौरे को लेकर उठे विवाद पर समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि 6 अक्तूबर को शाम 4:30 बजे प्रस्तावित बातचीत का समय सुप्रीम कोर्ट ने खुद तय किया था। बाद में अदालत ने बैठक रद्द कर दी, जिसके बाद समिति ने भी अपना दौरा रद्द कर दिया।
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जेपीसी अध्यक्ष पीपी चौधरी ने बताया पूरा घटनाक्रम
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
एक देश, एक चुनाव पर विचार कर रही संयुक्त संसदीय समिति के सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर उठे विवाद के बीच समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद पीपी चौधरी ने सोमवार को स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ही शुरुआत में समिति के साथ 6 अक्तूबर को शाम 4:30 बजे बातचीत का समय तय किया था। बाद में अदालत ने बैठक रद्द कर दी, जिसके बाद समिति ने भी अपना दौरा रद्द कर दिया।
पीपी चौधरी ने बताया कि 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से समिति के निदेशक को ईमेल भेजकर 6 अक्तूबर को शाम 4:30 बजे बैठक तय किए जाने की जानकारी दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रद्द हुई बैठक
जेपीसी के अध्यक्ष ने कहा, "कई सदस्यों को यह जानकारी नहीं थी कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद बैठक तय की थी। 22 तारीख के ईमेल के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने हमारे निदेशक को बताया था कि उसने 6 तारीख को शाम 4:30 बजे बैठक तय की है। बाद में जब सुप्रीम कोर्ट ने बैठक रद्द कर दी तो हमने भी इसे रद्द कर दिया और सभी सदस्यों को इसकी सूचना दे दी। चूंकि बैठक शुरू में सुप्रीम कोर्ट ने तय की थी, इसलिए हमने सभी सदस्यों को इसकी जानकारी दी थी।"
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'बैठक अनौपचारिक थी, मुद्दे को तूल न दें'
संयुक्त संसदीय समिति की बैठक के बाद पीपी चौधरी ने कहा कि प्रस्तावित बातचीत पूरी तरह अनौपचारिक थी और इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समिति और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने यह बात कही थी कि अगर ऐसी बातचीत उचित नहीं है तो मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। उनके अनुसार, दोनों पक्ष बातचीत कर सकते हैं तो ठीक है और नहीं करना चाहते तो भी कोई समस्या नहीं है।
पीपी चौधरी ने कहा कि इस मामले पर इतना जोर देने या इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले शिक्षा विधेयक समेत समिति के अन्य मामलों में भी ऐसी चर्चाओं के उदाहरण रहे हैं। उन्होंने डीएमके सांसद पी. विल्सन के पत्र का भी जिक्र किया और कहा कि अतीत में इस तरह की बातचीत हुई है। उनके मुताबिक, इन मामलों का जिक्र विल्सन ने समिति को दिए अपने पत्र में किया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सदस्यों को दी सूचना
पीपी चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से बैठक रद्द किए जाने की जानकारी मिलने के बाद समिति ने तुरंत सभी सदस्यों को औपचारिक सूचना जारी की और संशोधित कार्यक्रम की जानकारी दी। संयुक्त संसदीय समिति की सोमवार को नई दिल्ली स्थित संसद पुस्तकालय भवन में बैठक हुई। इसमें दोनों विधेयकों से जुड़े आगे के काम पर चर्चा की गई।
किन विधेयकों की जांच कर रही है समिति?
संयुक्त संसदीय समिति संविधान के 129वें संशोधन विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक, 2024 की जांच कर रही है। इन दोनों विधेयकों में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की प्रस्तावित व्यवस्था के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान है।
पीपी चौधरी ने कहा कि समिति विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हितधारकों से लगातार बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि जब समिति के सभी सदस्य यह मान लेंगे कि जरूरी सभी पक्षों के बयान और राय सामने आ चुकी हैं, तब अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा, "प्रक्रिया अभी चल रही है। हम हितधारकों को सुन रहे हैं। जब सभी सदस्य यह बताएंगे कि अब किसी और को सुनने की जरूरत नहीं है और सभी सदस्यों की राय सामने आ जाएगी, तब हम रिपोर्ट सौंपेंगे।"
कपिल सिब्बल ने बताया था 'असांविधानिक'
इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रस्तावित बैठक पर सवाल उठाए थे। उन्होंने गुरुवार को कहा था कि एक देश, एक चुनाव विधेयक की जांच कर रही समिति का सुप्रीम कोर्ट जाकर विधेयक पर चर्चा करना असांविधानिक है।
सिब्बल ने एक प्रेस वार्ता में कहा था कि संविधान शक्तियों के स्पष्ट विभाजन का प्रावधान करता है। उनके अनुसार, संसद से पारित किसी विधेयक की सांविधानिकता पर फैसला अदालत करती है। उन्होंने कहा था कि उन्हें पता चला है कि एक देश, एक चुनाव समिति के 6 अक्तूबर 2026 के स्थानीय अध्ययन दौरे का कार्यक्रम जारी किया गया था, जिसमें एक साथ चुनाव के मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा भी शामिल थी।
सिब्बल ने कहा था, "मैंने आज तक भारत के इतिहास में ऐसा नहीं सुना कि कोई संसदीय समूह सुप्रीम कोर्ट में किसी कानून के बारे में बैठक करे और न्यायाधीशों को बताए कि यह कानून वास्तव में क्या है। मैं एक देश, एक चुनाव की बात कर रहा हूं। अपने कानूनी करियर में मैंने ऐसा कभी नहीं सुना। यह असांविधानिक है।" अब समिति की ओर से पीपी चौधरी के स्पष्टीकरण के बाद इस प्रस्तावित बैठक को लेकर स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने बैठक रद्द कर दी है और समिति ने भी अपना दौरा रद्द कर दिया है।
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पीपी चौधरी ने बताया कि 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की ओर से समिति के निदेशक को ईमेल भेजकर 6 अक्तूबर को शाम 4:30 बजे बैठक तय किए जाने की जानकारी दी गई थी।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद रद्द हुई बैठक
जेपीसी के अध्यक्ष ने कहा, "कई सदस्यों को यह जानकारी नहीं थी कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद बैठक तय की थी। 22 तारीख के ईमेल के जरिए सुप्रीम कोर्ट ने हमारे निदेशक को बताया था कि उसने 6 तारीख को शाम 4:30 बजे बैठक तय की है। बाद में जब सुप्रीम कोर्ट ने बैठक रद्द कर दी तो हमने भी इसे रद्द कर दिया और सभी सदस्यों को इसकी सूचना दे दी। चूंकि बैठक शुरू में सुप्रीम कोर्ट ने तय की थी, इसलिए हमने सभी सदस्यों को इसकी जानकारी दी थी।"
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'बैठक अनौपचारिक थी, मुद्दे को तूल न दें'
संयुक्त संसदीय समिति की बैठक के बाद पीपी चौधरी ने कहा कि प्रस्तावित बातचीत पूरी तरह अनौपचारिक थी और इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समिति और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने यह बात कही थी कि अगर ऐसी बातचीत उचित नहीं है तो मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए। उनके अनुसार, दोनों पक्ष बातचीत कर सकते हैं तो ठीक है और नहीं करना चाहते तो भी कोई समस्या नहीं है।
पीपी चौधरी ने कहा कि इस मामले पर इतना जोर देने या इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे पहले शिक्षा विधेयक समेत समिति के अन्य मामलों में भी ऐसी चर्चाओं के उदाहरण रहे हैं। उन्होंने डीएमके सांसद पी. विल्सन के पत्र का भी जिक्र किया और कहा कि अतीत में इस तरह की बातचीत हुई है। उनके मुताबिक, इन मामलों का जिक्र विल्सन ने समिति को दिए अपने पत्र में किया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सदस्यों को दी सूचना
पीपी चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से बैठक रद्द किए जाने की जानकारी मिलने के बाद समिति ने तुरंत सभी सदस्यों को औपचारिक सूचना जारी की और संशोधित कार्यक्रम की जानकारी दी। संयुक्त संसदीय समिति की सोमवार को नई दिल्ली स्थित संसद पुस्तकालय भवन में बैठक हुई। इसमें दोनों विधेयकों से जुड़े आगे के काम पर चर्चा की गई।
किन विधेयकों की जांच कर रही है समिति?
संयुक्त संसदीय समिति संविधान के 129वें संशोधन विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक, 2024 की जांच कर रही है। इन दोनों विधेयकों में लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराने की प्रस्तावित व्यवस्था के लिए कानूनी ढांचा तैयार करने का प्रावधान है।
पीपी चौधरी ने कहा कि समिति विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हितधारकों से लगातार बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि जब समिति के सभी सदस्य यह मान लेंगे कि जरूरी सभी पक्षों के बयान और राय सामने आ चुकी हैं, तब अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा, "प्रक्रिया अभी चल रही है। हम हितधारकों को सुन रहे हैं। जब सभी सदस्य यह बताएंगे कि अब किसी और को सुनने की जरूरत नहीं है और सभी सदस्यों की राय सामने आ जाएगी, तब हम रिपोर्ट सौंपेंगे।"
कपिल सिब्बल ने बताया था 'असांविधानिक'
इससे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने प्रस्तावित बैठक पर सवाल उठाए थे। उन्होंने गुरुवार को कहा था कि एक देश, एक चुनाव विधेयक की जांच कर रही समिति का सुप्रीम कोर्ट जाकर विधेयक पर चर्चा करना असांविधानिक है।
सिब्बल ने एक प्रेस वार्ता में कहा था कि संविधान शक्तियों के स्पष्ट विभाजन का प्रावधान करता है। उनके अनुसार, संसद से पारित किसी विधेयक की सांविधानिकता पर फैसला अदालत करती है। उन्होंने कहा था कि उन्हें पता चला है कि एक देश, एक चुनाव समिति के 6 अक्तूबर 2026 के स्थानीय अध्ययन दौरे का कार्यक्रम जारी किया गया था, जिसमें एक साथ चुनाव के मुद्दे पर अनौपचारिक चर्चा भी शामिल थी।
सिब्बल ने कहा था, "मैंने आज तक भारत के इतिहास में ऐसा नहीं सुना कि कोई संसदीय समूह सुप्रीम कोर्ट में किसी कानून के बारे में बैठक करे और न्यायाधीशों को बताए कि यह कानून वास्तव में क्या है। मैं एक देश, एक चुनाव की बात कर रहा हूं। अपने कानूनी करियर में मैंने ऐसा कभी नहीं सुना। यह असांविधानिक है।" अब समिति की ओर से पीपी चौधरी के स्पष्टीकरण के बाद इस प्रस्तावित बैठक को लेकर स्थिति यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने बैठक रद्द कर दी है और समिति ने भी अपना दौरा रद्द कर दिया है।